Rajya Sabha: 26 सीटों पर 30 उम्मीदवार...4 राज्यों में बंपर खींचतान, कांग्रेस में क्यों मची खलबली? समझिए राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण

Rajya Sabha Seats Equation: देश की 26 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। मध्य प्रदेश, झारखंड और कर्नाटक में अतिरिक्त उम्मीदवारों की एंट्री से कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग का डर है।

Harsh Srivastava
Published on: 17 Jun 2026 4:54 PM IST (Updated on: 17 Jun 2026 4:54 PM IST)
Rajya Sabha: 26 सीटों पर 30 उम्मीदवार...4 राज्यों में बंपर खींचतान, कांग्रेस में क्यों मची खलबली? समझिए राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण
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Rajya Sabha Seats Equation: देश के राजनैतिक गलियारों में इस समय उच्च सदन यानी राज्यसभा की 24 मुख्य सीटों और 2 सीटों पर होने वाले उपचुनावों को लेकर हलचल बेहद तेज हो चुकी है। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो तस्वीर सामने आई है, उसने कई राज्यों के सियासी समीकरणों को पूरी तरह उलझा दिया है। इन कुल 26 सीटों के लिए चुनावी मैदान में कुल 30 योद्धा आमने-सामने आ चुके हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि 4 राज्यों की सीटों पर अब जबरदस्त शह और मात का खेल देखने को मिलने वाला है।

इस नए राजनैतिक घटनाक्रम ने सबसे ज्यादा परेशानी कांग्रेस खेमे के लिए खड़ी कर दी है। मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में कांग्रेस को अपने ही कुनबे में सेंध लगने का इतना बड़ा डर सता रहा है कि उसने अभी से अपने विधायकों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि यदि इन चुनावों में जरा सी भी भीतरघात या क्रॉस वोटिंग हुई, तो मध्य प्रदेश, झारखंड और कर्नाटक के मैदान में कांग्रेस को तगड़ा झटका लग सकता है और उसके उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ सकता है।

इस बार के चुनावी समर में देश के कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। मैदान में उतरे प्रमुख चेहरों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तेजतर्रार नेता पवन खेड़ा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग, सतीश पूनिया, जाने-माने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी के साथ-साथ कांग्रेस के प्रवीण चक्रवर्ती और मीनाक्षी नटराजन जैसे बड़े नाम शामिल हैं। आइए सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि किस राज्य में क्या राजनैतिक समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं।

आंध्र प्रदेश: 4 सीटों पर 4 ही चेहरे

दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य आंध्र प्रदेश में राज्यसभा की कुल चार सीटें खाली हो रही हैं। यहां की सियासत इस समय पूरी तरह से सत्तारूढ़ गठबंधन के पाले में झुकी नजर आ रही है। खाली हो रही इन 4 सीटों में से 3 पर तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने और 1 सीट पर उसकी सहयोगी जनसेना ने अपना उम्मीदवार उतारा है। इस राज्य से जिन मौजूदा सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें ए. अयोध्या रामी रेड्डी, परिमल नाथवानी, पी. सुभाष चंद्र बोस और सतीश बाबू के नाम शामिल हैं। हालांकि सतीश बाबू ने दोबारा अपनी किस्मत आजमाने के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है।

अगर विधानसभा के भीतर विधायकों की संख्या के गणित को देखें तो इस बार समीकरण पूरी तरह बदलने जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश की मौजूदा विधानसभा में टीडीपी के पास 135, जनसेना के पास 21 और भाजपा के पास 8 विधायक हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल YSR कांग्रेस के पास केवल 11 विधायक ही बचे हैं। सीटों की संख्या के बराबर ही उम्मीदवार मैदान में होने के कारण यहां किसी भी तरह के मुकाबले की गुंजाइश नहीं है और सभी चारों प्रत्याशियों की जीत बिल्कुल तय मानी जा रही है।

गुजरात: BJP ने किया क्लीन स्वीप

गुजरात की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा इस बार राज्यसभा चुनावों में भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। सूबे की 4 सीटों के लिए विधायकों की संख्या बल के आधार पर सिर्फ भाजपा ने ही अपने 4 सिपहसालार मैदान में उतारे हैं। भाजपा की तरफ से राजूभाई शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेशभाई राठवा और जितेंद्र कंजारिया ने पूरी ताकत के साथ अपना पर्चा भरा है। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और पार्टी के अन्य शीर्ष नेता भी एकजुटता दिखाने के लिए मौजूद रहे।

इस चुनाव के साथ ही गुजरात की राजनीति में कांग्रेस के लिए एक बेहद निराशाजनक दौर शुरू होने जा रहा है। इस महीने के अंत में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, जो संसद के उच्च सदन में गुजरात से कांग्रेस के इकलौते आवाज थे। उनके हटने के बाद राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का कोई भी नुमाइंदा नहीं बचेगा। चूंकि 4 सीटों पर सिर्फ 4 ही उम्मीदवार हैं, इसलिए यहां भी किसी मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और सभी का निर्विरोध चुना जाना तय है।

झारखंड: 2 सीटों पर 3 दावेदार

झारखंड की 2 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य का सियासी पारा अचानक बढ़ा दिया है। यहां सीटें सिर्फ 2 हैं लेकिन मैदान में 3 उम्मीदवारों के आ जाने से मुकाबला बेहद रोमांचक और त्रिकोणीय हो चुका है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की तरफ से बैद्यनाथ राम और कांग्रेस की ओर से प्रणव झा ने साझा गठबंधन के तहत पर्चा भरा है। लेकिन असली ट्विस्ट तब आया जब जाने-माने उद्योगपति परिमल नथवानी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी दावेदारी ठोक दी। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें भाजपा और अन्य छोटे दलों का पूरा अंदरूनी समर्थन हासिल है।

झारखंड की इस चुनावी जंग को जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को पहली वरीयता के कम से कम 28 वोटों की जरूरत होगी। मौजूदा विधानसभा में सत्ताधारी 'इंडिया' गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिनमें JMM के 34 और कांग्रेस के 16 विधायक मुख्य हैं। दूसरी तरफ NDA गठबंधन के पास 24 विधायक हैं। ऐसे में यदि निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को जीत हासिल करनी है, तो उन्हें सत्ताधारी गठबंधन के खेमे में बड़ी सेंध लगानी होगी, यही वजह है कि कांग्रेस अपने विधायकों को लेकर बेहद चौकन्नी हो गई है।

मध्य प्रदेश: 3 सीटों पर 4 उम्मीदवार

मध्य प्रदेश का राजनैतिक ड्रामा इस समय सबसे ज्यादा दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। यहां 3 खाली सीटों के लिए मुकाबला होना है, लेकिन भाजपा ने रणनीतिक रूप से 3 उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। भाजपा की ओर से तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस ने अपनी वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन पर दांव खेला है। राज्य की दो सौ 30 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन उसने तीसरा उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है।

पार्टी बदलने और विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद फिलहाल भाजपा के पास 165 और कांग्रेस के पास 63 विधायकों का बल दिखाई दे रहा है। हालांकि कुछ विधायकों के वोट देने के अधिकार पर अभी संशय बरकरार है। यदि कांग्रेस अपने सभी 63 विधायकों को पूरी तरह एकजुट रखने में कामयाब हो जाती है, तो मीनाक्षी नटराजन की जीत मुमकिन है। लेकिन अगर भाजपा के तीसरे उम्मीदवार को जीतना है, तो उसे कांग्रेस के कम से कम दस विधायकों के समर्थन या क्रॉस वोटिंग की जरूरत होगी। इसी कशमकश ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

राजस्थान और कर्नाटक

राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों पर इस बार किसी भी तरह की खींचतान देखने को नहीं मिलने वाली है। यहां 3 सीटों के लिए कुल 3 ही उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें भाजपा के सतीश पूनिया और अल्का गुर्जर शामिल हैं, जबकि कांग्रेस की तरफ से नीरज डांगी फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। संख्या बल के हिसाब से यहां वोटिंग की कोई नौबत नहीं आएगी और सभी उम्मीदवार आराम से संसद पहुंच जाएंगे।

इसके विपरीत, दक्षिण के राज्य कर्नाटक में माहौल बेहद गरमाया हुआ है। कर्नाटक में 4 सीटों के लिए कुल 5 उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। विधायकों की भारी संख्या को देखते हुए कांग्रेस ने मंसूर अली खान, पवन खेड़ा और मल्लिकार्जुन खड़गे के रूप में तीन चेहरे उतारे हैं, जबकि भाजपा ने एम नागराज को टिकट दिया है। इस बीच पांचवें उम्मीदवार के रूप में बोजन्ना सोमैया ने निर्दलीय पर्चा भरकर पूरी बाजी को फंसा दिया है। इस पांचवें खिलाड़ी की एंट्री से कर्नाटक में भी क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडराने लगा है।

पूर्वोत्तर का हाल: मणिपुर, मेघालय और अरुणाचल

देश के पूर्वोत्तर राज्यों की बात करें तो वहां चुनावी समीकरण पूरी तरह से साफ और एकतरफा नजर आ रहे हैं। मणिपुर की इकलौती सीट पर भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष मयुम शारदा देवी ने अपना नामांकन किया है। 60 सदस्यों वाली विधानसभा में विपक्षी दलों ने हार के डर से कोई भी उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है, जिससे उनकी जीत पूरी तरह सुनिश्चित हो गई है।

यही स्थिति मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी देखने को मिल रही है। मेघालय में सत्तारूढ़ गठबंधन ने सर्वसम्मति से वरिष्ठ नेता जेम्स के. संगमा को अपना साझा उम्मीदवार बनाया है, जिनके पास बहुमत का पूरा आंकड़ा है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश की एकमात्र सीट पर भाजपा के ताई टागक ने अपना पर्चा भरा है और वहां भी विपक्ष की तरफ से कोई चुनौती न होने के कारण उनका निर्विरोध चुना जाना महज एक औपचारिकता मात्र रह गया है।

मिजोरम, महाराष्ट्र और तमिलनाडु

मिजोरम की इकलौती राज्यसभा सीट के लिए इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। यहां कुल दो उम्मीदवार आमने-सामने हैं। सत्ताधारी जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) की तरफ से के. लालतलुआंगकिमा और मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) की ओर से जोथांसंगी हमार ने अपना पर्चा भरा है। 40 सीटों वाली विधानसभा में ZDPM के पास सत्ता का पूरा बल है, जिससे उनका पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है।

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एक-एक सीट पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) की तरफ से राजेंद्र जैन ने पर्चा भरा है। महायुति गठबंधन के भारी बहुमत को देखते हुए उनका निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। वहीं, तमिलनाडु में कांग्रेस के प्रवीण चक्रवर्ती उम्मीदवार बने हैं, जिन्हें स्थानीय दलों का पूरा समर्थन हासिल है और विपक्ष के मैदान छोड़ने के कारण वे भी बिना किसी अड़चन के संसद पहुंचने के लिए तैयार हैं।

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