Ayodhya राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण: चंपत राय-अनिल मिश्रा के इस्तीफा पत्र में 81 लाख की रिकवरी का दावा

Ayodhya: श्री राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नया खुलासा हुआ है। पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफा पत्र में 81 लाख रुपये की आंतरिक बरामदगी का दावा सामने आया है।

Newstrack Network
Published on: 29 July 2026 2:33 PM IST (Updated on: 29 July 2026 2:34 PM IST)
Champat Rai
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Ayodhya: श्री राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में नित नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का संयुक्त इस्तीफा पत्र (जो उन्होंने 24 जून को सौंपा था) पहली बार सामने आया है। इस पत्र में दोनों पूर्व अधिकारियों ने यह बात स्वीकार की है कि चोरी की घटना के तुरंत बाद ट्रस्ट ने अपनी शुरुआती आंतरिक कार्रवाई के दौरान संदिग्धों और उनके परिजनों से कुल 81 लाख रुपये खुद ही बरामद कर वापस जमा करा लिए थे।

चंपत राय और अनिल मिश्रा का क्या कहना है?

सामने आए इस्तीफा पत्र के अनुसार, 8 जून से दान राशि की गणना और गबन को लेकर मीडिया में समाचार प्रकाशित हो रहे थे, जिससे श्रद्धालुओं में भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी और उनकी आस्था आहत हो रही थी। पत्र में लिखा गया है:

4 जून की रात मामला आया संज्ञान में: दान पेटिकाओं की गणना के दौरान 5-6 युवकों द्वारा चोरी की घटना 4 जून की रात को एक ट्रस्टी के ध्यान में आई थी।

CCTV फुटेज से पहचान: 5 जून की सुबह जब मंदिर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो उसमें कुछ आरोपी युवकों की पहचान हुई।

पुलिस के बजाय आंतरिक कार्रवाई: पत्र के मुताबिक, उस समय तत्काल पुलिस में एफआईआर दर्ज कराना उचित नहीं समझा गया। इसके स्थान पर संबंधित युवकों को बुलाकर उनसे कड़ाई से पूछताछ की गई।

81 लाख रुपये की रिकवरी: 5 जून की रात से 8 जून के बीच आरोपी युवकों और उनके परिजनों ने कुल 81 लाख रुपये ट्रस्ट को वापस लौटा दिए।

निष्पक्ष जांच के लिए स्वयं दिया इस्तीफा, सरकार से की SIT जांच की मांग

मामले की गंभीरता, समाचार पत्रों में चर्चाएं और जिम्मेदार लोगों की अनर्गल बयानबाजी को देखते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने स्वयं सरकार से किसी विशेष दल से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था।

इसी अनुरोध के आधार पर सरकार ने 15 जून से एसआईटी (SIT) जांच शुरू कराई थी। अपने इस्तीफा पत्र के अंतिम हिस्से में दोनों पदाधिकारियों ने 'नीर-क्षीर विवेक' (दूध का दूध और पानी का पानी होने) का हवाला देते हुए लिखा था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें ट्रस्ट के कार्यों से मुक्त रखा जाए। ट्रस्ट की बैठक में उनके इस पत्र को स्वीकार कर लिया गया था।

अब निर्णायक दौर में जांच: अचल संपत्तियों की कुर्की और अनिल मिश्रा से पूछताछ की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी आईपीएस (IPS) अधिकारियों की नई एसआईटी के बाद इस मामले में कार्रवाई और तेज हो गई है:

संपत्तियों की पड़ताल अंतिम दौर में: आरोपियों द्वारा चोरी के पैसों से खरीदी गई अचल संपत्तियों की गहनता से जांच की जा रही है। साक्ष्य मिलते ही अदालत की अनुमति से इन्हें कुर्क (जब्त) किया जाएगा।

रडार पर प्रमुख संपत्तियां: आरोपी अनुकल्प मिश्रा का कौशलपुरी स्थित मकान, लवकुश मिश्रा की पत्नी के नाम सहादतगंज का प्लॉट, अविनाश के भाई के नाम सरियांवा में खरीदी गई जमीन और मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बेटे के नाम सहादतगंज की जमीन पुलिस जांच की जद में हैं। (कार, बाइक, जेवर और नकदी पहले ही बरामद हो चुकी है)।

डॉ. अनिल मिश्रा के दर्ज होंगे बयान: एसआईटी द्वारा बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों के बयान दर्ज करने के बाद, अब माना जा रहा है कि सबसे पहले पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

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