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राम मंदिर दान चोरी केस: नई SIT में शामिल DIG सोमेन वर्मा और SSP डॉ. गौरव ग्रोवर कौन हैं?
राम मंदिर दान चोरी मामले की नई SIT में शामिल DIG सोमेन वर्मा और SSP डॉ. गौरव ग्रोवर कौन हैं? जानिए दोनों IPS अधिकारियों का करियर, उपलब्धियां और नई जांच में उनकी भूमिका।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बनी नई SIT
राम मंदिर दान चोरी मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए नई एसआईटी गठित की जा सकती है। राज्य सरकार की सहमति के बाद नई टीम के गठन का फैसला लिया गया।
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पुरानी एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की दोबारा और व्यापक जांच के लिए नई एसआईटी बनाने का निर्देश दिया।
कौन हैं डीआईजी सोमेन वर्मा?
अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन वर्मा वर्ष 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका मूल निवास पश्चिम बंगाल है, जबकि उनकी प्रारंभिक शिक्षा असम में हुई। उन्होंने बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) में ऊर्जा मंत्रालय के तहत अधिकारी के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने आईपीएस सेवा जॉइन की।
सोमेन वर्मा मिर्जापुर और सुल्तानपुर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी कार्यशैली से पहचान बना चुके हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि और अपराध नियंत्रण पर सख्त रुख के कारण उन्हें आधुनिक और परिणामोन्मुख पुलिस अधिकारी माना जाता है। अपराधियों के खिलाफ उनकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति अक्सर चर्चा में रही है।
कौन हैं एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर?
नई एसआईटी के दूसरे सदस्य डॉ. गौरव ग्रोवर वर्ष 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। पंजाब के बठिंडा निवासी डॉ. ग्रोवर ने आईपीएस बनने से पहले एमबीबीएस की पढ़ाई की थी।
उन्होंने वर्ष 2022 से 2025 तक गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के रूप में कार्य किया और कई चर्चित मामलों की जांच व कानून-व्यवस्था संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2020 में सिल्वर, 2022 में गोल्ड और 2024 में प्लेटिनम डिस्क से सम्मानित किया गया। जून 2026 में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी उन्हें विशेष सम्मान प्रदान किया था।
नई SIT के सामने क्या होगी सबसे बड़ी चुनौती?
नई एसआईटी को राम मंदिर दान चोरी मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं, आरोपियों की भूमिका, धन के प्रवाह और पूर्व जांच में सामने आए तथ्यों की नए सिरे से समीक्षा करनी होगी। चूंकि मामला देश की सबसे संवेदनशील धार्मिक संस्थाओं में से एक से जुड़ा है और सुप्रीम कोर्ट इसकी निगरानी कर रहा है, इसलिए जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सभी की नजर रहेगी।
अब यह देखना होगा कि आईजी किरण एस. के नेतृत्व में डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर की टीम जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और अदालत के सामने क्या निष्कर्ष प्रस्तुत करती है।


