आसमान में दिखा रमजान का चांद! गुरुवार को होगा पहला रोजा, आज से मस्जिदों में गूंजेगी तरावीह की गूंज

Ramadan Moon Sighted India 2026: भारत में दिखा रमजान का चांद! बिहार, असम और राजस्थान समेत कई राज्यों में हुआ दीदार। जानें 19 फरवरी को होने वाले पहले रोजे, सहरी-इफ्तार के समय और इस पाक महीने के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी।"

Harsh Sharma
Published on: 18 Feb 2026 7:30 PM IST
आसमान में दिखा रमजान का चांद! गुरुवार को होगा पहला रोजा, आज से मस्जिदों में गूंजेगी तरावीह की गूंज
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Ramadan Moon Sighted India 2026: इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं और बरकतों का महीना शुरू हो गया! भारत के आसमान में रमजान का पाक चांद नजर आ गया है, जिसने करोड़ों चेहरों पर मुस्कुराहट बिखेर दी है। बिहार से लेकर असम और राजस्थान से लेकर यूपी तक, चांद के दीदार की गवाहियां मिलने के बाद अब यह साफ हो गया है कि गुरुवार, 19 फरवरी को पहला रोजा रखा जाएगा। जैसे ही चांद दिखने की तस्दीक हुई, वैसे ही बाजारों और घरों में खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। लोग एक-दूसरे को गले लगकर 'रमजान मुबारक' कह रहे हैं। आइए जानते हैं इस पाक महीने की शुरुआत और इससे जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प बातें।

बिहार और असम में सबसे पहले हुआ दीदार

भारत में इस बार रमजान के चांद की सबसे पहली झलक बिहार और असम में देखने को मिली। इमारत-ए-शरिया, फुलवारी शरीफ पटना के काज़ी रिजवान नदवी ने पुष्टि की कि कई इलाकों से चांद देखे जाने की खबरें आईं और गवाहियां भी दर्ज की गईं। वहीं, लखनऊ में मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी आधिकारिक तौर पर चांद की तस्दीक कर दी है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में बादल छाए होने के बावजूद लोगों ने गवाही दी कि उन्हें चांद दिख गया है। चांद दिखने के साथ ही आज यानी बुधवार रात से ही मस्जिदों में 'तरावीह' (रमजान की विशेष नमाज) की शुरुआत हो रही है।

तारीखों का खेल और चांद की अहमियत

शायद आप सोच रहे होंगे कि हर साल रमजान की तारीख बदल क्यों जाती है? दरअसल, इस्लाम में महीनों की गिनती चांद के घटने और बढ़ने के आधार पर होती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर (अंग्रेजी कैलेंडर) सूरज पर आधारित होता है, जबकि इस्लामिक कैलेंडर चांद पर। यही वजह है कि रमजान हर साल करीब 10-11 दिन पहले आता है। जिस दिन चांद दिखता है, उसका अगला दिन पहली तारीख माना जाता है और उसी दिन से रोजे शुरू होते हैं। 30 दिनों के कठिन उपवास और इबादत के बाद जब दोबारा चांद दिखता है, तब 'ईद-उल-फितर' यानी मीठी ईद मनाई जाती है।

सहरी और इफ्तार का क्या है गणित

रमजान के दौरान दो शब्द सबसे ज्यादा सुने जाते हैं- सहरी और इफ्तार। सहरी वह खाना है जो सूरज निकलने से पहले यानी फज्र की अजान से पहले खाया जाता है। इसके बाद दिन भर बिना कुछ खाए-पिए खुदा की इबादत की जाती है। शाम को जब सूरज डूब जाता है, तब खजूर या पानी से रोजा खोला जाता है, जिसे इफ्तार कहते हैं। यह सिर्फ भूख-प्यास का नाम नहीं है, बल्कि यह खुद पर काबू रखने और जरूरतमंदों का दर्द समझने का महीना है।

भीषण गर्मी से जुड़ा है रमजान का नाम

क्या आप जानते हैं कि रमजान की शुरुआत कब हुई थी? इतिहास के पन्नों को पलटें तो रोजा रखने की परंपरा 622 ईस्वी में मदीना से शुरू हुई थी। उस समय अरब में भीषण गर्मी पड़ रही थी। अरबी भाषा में 'रमज' का अर्थ ही भीषण गर्मी या जलना होता है। इस महीने में इंसान अपनी बुराइयों को जलाकर पाक और साफ हो जाता है, इसीलिए इसे रमजान कहा गया। अब अगले 30 दिनों तक पूरे देश में भक्ति और भाईचारे का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।_

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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