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'कॉकरोच नहीं इस्तीफा जनता पार्टी', CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर भड़के केंद्रीय मंत्री
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने CJP पर तंज कसा और संगठन का नाम 'इस्तीफा जनता पार्टी' रखने की बात कही। जानें पूरा विवाद।
गुवाहाटी: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर तीखा हमला बोला है। गुवाहाटी में मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आठवले ने तंज कसते हुए कहा कि CJP को अपना नाम बदलकर 'इस्तीफा जनता पार्टी' कर लेना चाहिए।
आठवले ने आरोप लगाया कि CJP हर मुद्दे पर नेताओं या संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के इस्तीफे की मांग करती है। उन्होंने CJP की ओर से पहले NEET मामले में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और अब CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का हवाला दिया।
'हर बात पर सिर्फ इस्तीफा मांगते हैं'
आठवले ने कहा कि CJP का राजनीतिक एजेंडा नेताओं और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से इस्तीफा मांगने तक सीमित है। इसी को लेकर उन्होंने संगठन के नाम पर कटाक्ष करते हुए इसे 'इस्तीफा जनता पार्टी' कहने की सलाह दी। उनका यह बयान मंगलवार, 29 सितंबर को गुवाहाटी दौरे के दौरान आया।
आठवले ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पर भी निशाना साधा। उन्होंने दीपके के राजनीतिक अनुभव पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह राजनीति के क्षेत्र में नए हैं, जबकि वह खुद लंबे समय से दलितों और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर काम कर रहे हैं।
आठवले के मुताबिक, दीपके महाराष्ट्र से हैं और उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई की है, लेकिन राजनीति और देश की समस्याओं की समझ अनुभव के साथ विकसित होती है। ये टिप्पणियां उनके अपने राजनीतिक आकलन के रूप में सामने आई हैं।
मोदी सरकार की तारीफ, 2029 को लेकर भी दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आठवले ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि सरकार देश की चुनौतियों को हल करने के लिए काम कर रही है।
आठवले ने 2029 को लेकर दावा किया कि नरेंद्र मोदी लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। यह आठवले का राजनीतिक दावा है, न कि कोई सत्यापित चुनावी परिणाम या पूर्वानुमान।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों?
CJP की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठाए गए सवालों के बीच की गई है।
हाल में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ चुनावी फैसलों को लेकर पिछले महीनों में कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक पत्राचार को आयोग के सामूहिक निर्णय पर सवाल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इसी विवाद को लेकर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। संगठन ने SIR को लेकर भी सवाल उठाए हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में बदलाव की मांग की है।
2 अक्टूबर को CJP का 'जेल भरो आंदोलन'
CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन मुंबई में प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन की ओर से इसे 'जेल भरो आंदोलन' बताया गया है।
CJP ने शुरुआत में मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन मुंबई पुलिस ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर को आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।
CJP की मांगों में CEC के इस्तीफे के अलावा SIR को रोकना और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े बदलाव शामिल हैं। संगठन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव/रद्द करने की मांग भी उठाई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग के कुछ फैसले संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्था के अनुरूप सामूहिक रूप से नहीं लिए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई कर सकती है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।
इस पूरे विवाद में फिलहाल तीन अलग-अलग स्तर दिखाई दे रहे हैं: CJP की ओर से इस्तीफे और SIR को लेकर आंदोलन, विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग पर सवाल और चुनाव आयोग की ओर से अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताना। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से इस विवाद की दिशा पर नजर रहेगी।


