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'हम लड़कियां थीं, फिर भी पुरुष पुलिसवालों...' रांची में घायल छात्राओं का छलका दर्द, लाठीचार्ज के बाद घिरी पुलिस!
Ranchi Female Students Lathicharge: रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। घायल छात्राओं ने पुरुष पुलिसकर्मियों पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं।
Ranchi Female Students Lathicharge: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को उस समय माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ी के खिलाफ हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे। सोमवार दोपहर को अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में राज्य विधानसभा भवन का घेराव करने का बड़ा ऐलान किया था। प्रदर्शनकारियों का विशाल समूह जैसे ही सुरक्षा घेरे के समीप पहुंचा, उन्हें रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग लगा रखी थी। जब छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे और आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे, तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन से पानी की तेज बौछारें छोड़ी गईं। इसके तुरंत बाद पुलिस बलों ने अभ्यर्थियों को खदेड़ने के लिए लाठियां भांजना शुरू कर दिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
'महिला पुलिसकर्मियों की गैरमौजूदगी में हुआ हमला'
इस घटना के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी चेतावनी के उन पर बल प्रयोग किया। एक प्रदर्शनकारी ने अत्यंत दुखी मन से बताया कि मौके पर पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मी तैनात नहीं थीं। इसके बावजूद पुरुष जवानों ने महिला अभ्यर्थियों पर लाठियां बरसाईं। छात्राओं का कहना है कि वे बेहद शांत तरीके से अपनी आवाज उठा रही थीं, लेकिन उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई। एक छात्रा ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार एक तरफ तो महिला सम्मान और कल्याण की योजनाएं चलाती है, वहीं दूसरी तरफ हक मांगने वाली बेटियों पर पुलिस से हमले करवाती है।
'अब यह छात्र आंदोलन नहीं, जन आंदोलन बन चुका है'
लाठीचार्ज के बाद अभ्यर्थियों का आक्रोश और अधिक बढ़ गया है। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने स्थिति की गंभीरता को बताते हुए कहा कि मौजूदा सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो इतने बड़े प्रदर्शन के बाद अधिकारियों का दल आकर उनसे वार्ता करता। रविंद्र पासवान ने राज्य के तमाम माता-पिता और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के अधिकारों की इस लड़ाई में उनका साथ देने के लिए बाहर निकलें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब सिर्फ परीक्षार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज का जन आंदोलन बन चुकी है। छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब किसी निचले प्रतिनिधि से वार्ता नहीं करेंगे, बल्कि अपनी मांगें सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।
धक्का-मुक्की और भगदड़ में कई अभ्यर्थी हुए घायल
पुलिस की इस कार्रवाई के कारण मुख्य मार्ग पर अचानक भगदड़ मच गई। इस अफरा-तफरी में कई निर्दोष परीक्षार्थी नीचे गिर पड़े और चोटिल हो गए। वहीं कुछ छात्रों ने सुरक्षाकर्मियों पर बेवजह धक्का देने का आरोप भी लगाया। एक घायल परीक्षार्थी ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वह पूरी तरह शांत होकर सड़क किनारे बैठा हुआ था और किसी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं था। अचानक मची भगदड़ के बीच पुलिसकर्मियों ने उसे जोर से धक्का दे दिया, जिससे उसके पैर में गंभीर चोट आई। पीड़ित छात्र ने सवाल उठाया कि अगर इस चोट की वजह से भविष्य में उसे कोई शारीरिक दिक्कत होती है, तो क्या इसकी जिम्मेदारी सरकार या पुलिस प्रशासन लेगा? छात्रों का कहना है कि वे किसी नियम को तोड़ने नहीं, बल्कि अपना हक मांगने आए थे।
राहुल गांधी ने जताई चिंता
रांची के इस घटनाक्रम की गूंज राष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर छात्रों पर लाठीचार्ज को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं हो सकता। सरकार को प्रदर्शनकारियों से सीधे बातचीत करनी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद ही सबसे बेहतर रास्ता है। फिलहाल रांची में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है।


