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रांची में पुलिस की बर्बरता की इंतहा! रात के अंधेरे में छात्रों पर बरसाई लाठियां, बौखलाए अभ्यर्थियों ने दी चेतावनी
Ranchi Student Warns Police: रांची में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान 10 अगस्त की रात पुलिस लाठीचार्ज का आरोप लगने के बाद छात्रों में भारी आक्रोश है। धुर्वा मोड़ पर अनशन जारी है और अभ्यर्थी CBI जांच समेत अपनी मांगों पर अड़े हैं।
Ranchi Student Warns Police: झारखंड की राजधानी रांची की फिज़ाओं में इस समय गहरा आक्रोश और तनाव साफ महसूस किया जा सकता है। 10 अगस्त की काली रात में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने राज्य के लाखों युवाओं के सब्र का बांध पूरी तरह तोड़ दिया है। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं। इस अप्रत्याशित पुलिसिया कार्रवाई में कई निर्दोष अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे झारखंड के नौजवानों में भारी आक्रोश की लहर दौड़ गई है।
धुर्वा मोड़ पर डटे जांबाज, अनशन आठवें दिन जारी
इस हिंसक घटनाक्रम के बावजूद अभ्यर्थियों का मनोबल ज़रा भी कमज़ोर नहीं हुआ है। रांची के धुर्वा मोड़ और धरने के मुख्य स्थल पर देवेंद्र नाथ महतो के साथ चार अन्य जांबाज साथी लगातार आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। लगातार 8 दिनों से अन्न का एक दाना भी ग्रहण न करने वाले अभ्यर्थी रूपेश कुमार पाल का इरादा काफी मजबूत दिखता है। उनका कहना है कि पुलिस का दमनकारी रुख या पानी की बौछारें उन्हें उनके लक्ष्य से डिगा नहीं सकतीं। जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा और सभी मांगें स्वीकार नहीं की जाएंगी, तब तक यह अनशन और विरोध प्रदर्शन थमेगा नहीं।
किसान परिवार का संघर्ष और 9 साल का इंतज़ार
आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में खड़े रूपेश वर्ष 2020 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं। 11वीं, 12वीं, 13वीं के बाद उन्होंने 14वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा भी दी, परंतु हर बार सिस्टम में जारी गड़बड़ियों ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रूपेश के घर में 4 बहनें और 2 भाई हैं। अगर उनके बड़े भाई नौकरी में न होते तो शायद उनका पढ़ाई का यह सफर कब का थम गया होता।
दूसरी ओर, बोकारो के कसमार (सुरजुडी) की रहने वाली हबीबा वर्ष 2017 से लगातार भर्ती प्रक्रियाओं की अव्यवस्था का दंश झेल रही हैं। 2016 में 12वीं करने के बाद उन्होंने 2017 में पंचायत सचिव की परीक्षा पास की थी। लंबी प्रक्रिया, हिंदी टाइपिंग टेस्ट और दस्तावेज़ सत्यापन के बाद भी महज़ 1 दिन उम्र कम बताकर उनका चयन रोक दिया गया। 3 बार JPSC का प्रयास कर चुकी हबीबा के बीमार पिता किसान हैं और 5 भाइयों तथा 3 बहनों का यह बड़ा परिवार व्यवस्था की मार से टूट चुका है।
'वोट मांगने आओगे तो मिलेगा करारा जवाब'
10 अगस्त की रात हुई पुलिस कार्रवाई के बाद अभ्यर्थियों का गुस्सा अब चेतावनी में बदल चुका है। सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे राहुल कुमार ने राज्य सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब विरोध की यह आग झारखंड के हर ब्लॉक और गांव तक पहुंचेगी। राहुल का आरोप है कि हिंसा की शुरुआत पुलिस प्रशासन की तरफ से की गई थी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सत्ता में बैठे लोग केवल लाठी की भाषा समझते हैं, तो अब राज्य का युवा भी चुप नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में किसी भी मंत्री या जनप्रतिनिधि को गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा और चुनाव के समय उनसे हिसाब चुकता किया जाएगा।
आर-पार की लड़ाई और सीबीआई जांच पर अड़े युवा
धरना स्थल पर देवेंद्र नाथ महतो, राहुल क्रांति, रूपेश कुमार पाल, हबीबा और सविता कुमारी जैसे युवा पूरे झारखंड के लाखों अभ्यर्थियों के स्वाभिमान की लड़ाई की अगुवाई कर रहे हैं। इन सभी अनशनकारियों का एक ही सुर में कहना है कि यह लड़ाई केवल नौकरी पाने की नहीं है, बल्कि उस गहरे भ्रष्टाचार और धांधली के खात्मे की है जिसने लाखों मेधावी छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। छात्र संगठन पूरी धांधली की सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर पूरी तरह अड़े हुए हैं। हालांकि सरकार की तरफ से सकारात्मक वार्ता का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन 10 अगस्त की घटना ने इस शांतिपूर्ण आंदोलन को एक उग्र क्रांति की दिशा में मोड़ दिया है।


