“मक्का-मदीना नहीं… पहले हिंदुस्तान!” गणतंत्र दिवस पर मुस्लिम बच्ची का ऐसा जवाब कि नफरत फैलाने वाले चुप हो गए, Video Viral

Muslim girl viral video: गणतंत्र दिवस पर वायरल हुए वीडियो में एक मुस्लिम बच्ची ने नफरत फैलाने वालों को करारा जवाब दिया। बच्ची ने कहा- ‘सारे जहाँ से अच्छा’ में मक्का या मदीना नहीं, हिंदुस्तान लिखा गया। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल।

Harsh Sharma
Published on: 26 Jan 2026 7:02 AM IST (Updated on: 26 Jan 2026 7:11 AM IST)
“मक्का-मदीना नहीं… पहले हिंदुस्तान!” गणतंत्र दिवस पर मुस्लिम बच्ची का ऐसा जवाब कि नफरत फैलाने वाले चुप हो गए, Video Viral
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Muslim girl viral video: गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक मुस्लिम बच्ची देश में मुसलमानों के खिलाफ फैल रही नफरत और सवालों का बेबाकी से जवाब देती नज़र आ रही है। बच्ची के शब्द सादे हैं, लेकिन उनका असर गहरा है। यह वीडियो देखते ही देखते लाखों लोगों तक पहुंच चुका है और लगातार शेयर किया जा रहा है।

“सारे जहाँ से अच्छा” में क्या लिखा गया?

वायरल वीडियो में मुस्लिम बच्ची देशभक्ति को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर सीधे शब्दों में कहती है कि जब भी मुसलमानों ने अपने वतन से मोहब्बत ज़ाहिर की, तो उन्होंने “सारे जहाँ से अच्छा” लिखा।लेकिन उसमें न पाकिस्तान लिखा गया, न मक्का या मदीना, बल्कि हिंदुस्तान लिखा गया।

बच्ची सवाल करती है कि जब मुसलमानों ने हमेशा इस देश को अपना वतन माना है, तो फिर उनसे बार-बार वतनपरस्ती का प्रमाण क्यों मांगा जाता है। उसका कहना है कि देशभक्ति किसी धर्म से नहीं, बल्कि सोच और भावना से जुड़ी होती है।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम: धर्म से ऊपर देश की पहचान

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत के उन व्यक्तित्वों में से थे, जिनकी पहचान कभी धर्म से नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा से बनी। देश के “मिसाइल मैन” कहे जाने वाले कलाम ने भारत को रक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा दी। राष्ट्रपति पद तक पहुंचने के बावजूद उनकी सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति ने उन्हें हर भारतीय का प्रिय बना दिया। डॉ. कलाम यह साबित करते हैं कि सच्ची देशभक्ति शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म और योगदान से दिखाई देती है।

वीर अब्दुल हमीद: देश के लिए सर्वोच्च बलिदान

वीर अब्दुल हमीद भारतीय सेना के उस जांबाज़ सपूत का नाम हैं, जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की। असाधारण साहस और निडरता का परिचय देते हुए उन्होंने दुश्मन के टैंकों को तबाह किया और अंत तक मोर्चे पर डटे रहे। उनकी वीरता और बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वीर अब्दुल हमीद की शहादत यह याद दिलाती है कि वतन की हिफ़ाज़त में मज़हब नहीं, सिर्फ़ तिरंगा सबसे ऊपर होता है।

गणतंत्र दिवस पर मिला एक साफ संदेश

गणतंत्र दिवस जैसे मौके पर सामने आया यह वीडियो एक स्पष्ट संदेश देता है, भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाना न सिर्फ़ गलत है, बल्कि देश की एकता के खिलाफ भी है। एक मुस्लिम बच्ची की यह आवाज़ यह याद दिलाती है कि भारत की असली पहचान विविधता और आपसी सम्मान में ही है।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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