Ritu Jaiswal Joining BJP: बिहार में बड़ा सियासी खेला! तेजस्वी की 'प्रखर सेनापति' रितु जायसवाल BJP में होंगी शामिल, RJD को बड़ा झटका

RJD Ritu Jaiswal Joining BJP: बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर! तेजस्वी यादव की करीबी और RJD की तेजतर्रार नेता रितु जायसवाल अब BJP में शामिल होने जा रही हैं। RJD के ‘A to Z’ फॉर्मूले को बड़ा लगेगा बड़ा झटका।जानिए पूरी सियासी कहानी।

Harsh Srivastava
Published on: 14 May 2026 2:37 PM IST (Updated on: 14 May 2026 2:38 PM IST)
Ritu Jaiswal Joining BJP:  बिहार में बड़ा सियासी खेला! तेजस्वी की प्रखर सेनापति रितु जायसवाल BJP में होंगी शामिल, RJD को बड़ा झटका
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RJD Ritu Jaiswal Joining BJP: बिहार की राजनीति की बिसात पर एक ऐसा मोहरा पलटने जा रहा है, जिसकी गूंज पटना से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का सबसे पढ़ा-लिखा, मुखर और प्रखर चेहरा मानी जाने वाली रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पाले में जाने को तैयार हैं। कभी तेजस्वी यादव की सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में शामिल रहीं रितु जायसवाल का भगवा चोला ओढ़ना महज एक दलबदल नहीं है, बल्कि यह बिहार की विपक्षी राजनीति के लिए एक ऐसा रणनीतिक भूकंप है, जिसकी दरारें आरजेडी के किले को कमजोर कर सकती हैं। टीवी डिबेट्स में विरोधियों के पसीने छुड़ाने वाली रितु अब भाजपा के मंच से राजद की खामियां गिनाती नजर आएंगी।

टिकट की 'सियासी कैंची' और कड़वाहट की कहानी

रितु जायसवाल और लालू परिवार के बीच दरार कोई रातों-रात नहीं आई, बल्कि इसकी नींव पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान ही पड़ गई थी। सूत्रों की मानें तो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ रितु की बातचीत अंतिम चरण में है। रितु ने सीतामढ़ी की परिहार विधानसभा सीट पर पांच साल तक खून-पसीना बहाया था। वे वहां से टिकट की सबसे स्वाभाविक दावेदार थीं। लेकिन ऐन वक्त पर तेजस्वी यादव के करीबियों ने उनकी दावेदारी को किनारे कर वरिष्ठ नेता रामचंद्र पूर्वे की बहू स्मिता गुप्ता को मैदान में उतार दिया। अपनी उपेक्षा से आहत रितु ने बगावत का बिगुल फूंका और निर्दलीय मैदान में उतर गईं, जिसके बाद राजद ने उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया।

जब रितु ने RJD को धकेला तीसरे नंबर पर

परिहार के चुनावी नतीजों ने आरजेडी नेतृत्व के उस भरोसे को हिला दिया कि केवल पार्टी का 'सिंबल' ही जीत की गारंटी है। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर रितु जायसवाल ने अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता का ऐसा लोहा मनवाया कि वे 65,455 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहीं। वहीं, राजद की आधिकारिक उम्मीदवार स्मिता गुप्ता महज 48,534 वोटों पर सिमटकर तीसरे नंबर पर चली गईं। इस त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा की गायत्री देवी 82,644 वोटों के साथ विजयी रहीं। इस चुनाव ने साफ कर दिया कि परिहार और शिवहर क्षेत्र में राजद के पारंपरिक वोट बैंक से ज्यादा रितु जायसवाल का अपना व्यक्तिगत जनाधार मजबूत है।

मुखिया से 'मास्टरस्ट्रोक' तक: एक प्रेरणादायक सफर

रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दिल्ली की लग्जरी लाइफ और अपने पति की 'आईएएस' स्तर की प्रतिष्ठित नौकरी की सुख-सुविधाओं को छोड़कर वे बिहार के पिछड़े गांवों को संवारने लौटी थीं। सीतामढ़ी की सिंहवाहिनी ग्राम पंचायत की मुखिया के रूप में उन्होंने विकास का ऐसा मॉडल पेश किया कि उन्हें भारत सरकार ने ‘सर्वश्रेष्ठ मुखिया’ के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा। उनकी इसी प्रशासनिक सूझबूझ और प्रखर भाषण शैली को देखकर तेजस्वी यादव ने उन्हें पार्टी का मुख्य प्रवक्ता और महिला सेल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। वे युवाओं और महिलाओं के बीच राजद का सबसे आधुनिक चेहरा थीं।

RJD के 'A to Z' समीकरण का पतन?

रितु जायसवाल का भाजपा में जाना तेजस्वी यादव की उस लंबी राजनीतिक रणनीति पर पानी फेरने जैसा है, जिसे वे 'ए टू जे़ड' फॉर्मूला कह रहे थे। तेजस्वी कोशिश कर रहे थे कि राजद की छवि सिर्फ ‘माय’ (MY – मुस्लिम+यादव) वाली न रहकर सभी जातियों की पार्टी बने। रितु जायसवाल इस नैरेटिव का सबसे मजबूत गैर-यादव चेहरा थीं। उनके जाने से राजद की सोशल इंजीनियरिंग को गहरा धक्का लगा है। खासकर वैश्य समुदाय (कलवार), जो बिहार में एक प्रभावशाली आर्थिक और राजनीतिक समूह है, उस पर राजद की पकड़ ढीली होना तय माना जा रहा है।

तिरहुत बेल्ट में BJP की 'बल्ले-बल्ले'

रितु जायसवाल के भाजपा में आने से सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर और पूरे तिरहुत प्रमंडल का सियासी भूगोल बदलने वाला है। अब तक भाजपा के पास इस क्षेत्र में कोई ऐसा तेजतर्रार महिला चेहरा नहीं था जिसकी पकड़ ग्रामीण इलाकों से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग तक हो। रितु के आने से भाजपा न केवल अपने पारंपरिक वैश्य वोट बैंक को अभेद्य बनाएगी, बल्कि 'आधी आबादी' के बीच भी अपनी पैठ मजबूत करेगी। भाजपा के लिए यह एक ऐसा 'मास्टरस्ट्रोक' है जो उन्हें आगामी लोकसभा और स्थानीय चुनावों में एकतरफा बढ़त दिला सकता है।

RJD के पास अब कोई विकल्प नहीं!

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि शिवहर और सीतामढ़ी बेल्ट में अब राजद के पास जमीन पर लड़ने वाला कोई दूसरा बड़ा गैर-यादव चेहरा नहीं बचा है। रितु के निष्कासन और अब उनके भाजपा में जाने से राजद ने अपना एक ऐसा योद्धा खो दिया है जो हर मोर्चे पर भाजपा को कड़ी टक्कर देने में सक्षम था। जानकारों का मानना है कि रितु जायसवाल का भाजपा में जाना बिहार की राजनीति में कई नए समीकरणों को जन्म देगा, जिसका सीधा खामियाजा महागठबंधन को भुगतना पड़ सकता है। अब देखना यह है कि तेजस्वी यादव इस भारी नुकसान की भरपाई कैसे करते हैं।

Harsh Srivastava

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