‘न हुआ, न होगा रिजीम चेंज…’, RSS चीफ मोहन भागवत ने क्यों किया फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र?

Mohan Bhagwat Statement: RSS के 100 साल पूरे होने पर मोहन भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र करते हुए रिजीम चेंज पर बड़ा बयान दिया। जानिए उन्होंने क्या कहा।

Aditya Kumar Verma
Published on: 20 Oct 2026 11:44 AM IST
Mohan Bhagwat Says Regime Change
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Mohan Bhagwat Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के मौके पर नागपुर में विजयादशमी और शस्त्र पूजा कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में भारत की एकता, स्वदेशी, नई पीढ़ी, AI, ड्रग्स और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे बदलावों पर बात की। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि केवल रिजीम चेंज (Regime Change) होने से परिस्थितियां नहीं बदलती हैं।

फ्रांस से नेपाल और बांग्लादेश तक का जिक्र

मोहन भागवत ने फ्रांस में हुए विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरह का पश्चिमी तूफान चल रहा है, जो सभ्यता, व्यवस्था और संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने फ्रांस के साथ अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “एक पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। देखिए फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, नेपाल, बांग्लादेश में क्या हुआ। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी। लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा।”

राज नारायण बसु और स्वदेशी की बात

संघ प्रमुख ने राज नारायण बसु की 200वीं जयंती का उल्लेख किया। उन्होंने हिंदू मेला और स्वदेशी मेलों की परंपरा की भी बात की। RSS के 100 साल के सफर का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ ने भारत को उसकी पहचान, संस्कृति और परंपराओं के आधार पर संगठित और मजबूत करने का काम किया है। उन्होंने संघ के काम से जुड़े पांच बड़े बदलावों का उल्लेख किया, जिसमें पहचान के प्रति जागरूकता और स्वदेशी को महत्वपूर्ण बताया।

संत रविदास का उदाहरण दिया

मोहन भागवत ने विदेशी आक्रमणों के दौर का जिक्र करते हुए संत रविदास की बात की। उन्होंने कहा कि उस समय समाज में डर था। ऐसे समय में संत रविदास ने सामाजिक समरसता और भक्ति के माध्यम से समाज को जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी सामाजिक एकता और आपसी जुड़ाव में है।

भारत की विविधता पर बोले भागवत

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्म, पंथ, प्रांत, जातियां और भाषाएं हैं। लोगों के खान-पान और रीति-रिवाज भी अलग हैं। इसके बावजूद भारत एक है।

उन्होंने कहा कि भारत माता सर्वोच्च है और देश की एकता बनी रहनी चाहिए। अलग-अलग विविधताओं के बावजूद भारत के लोगों के बीच अपनापन और एकता का भाव रहना जरूरी है।

ड्रग्स को लेकर युवाओं और माता-पिता को संदेश

मोहन भागवत ने युवाओं में ड्रग्स की लत को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को नशे से बचाना जरूरी है। इसके लिए माता-पिता को बच्चों को सही और गलत का अंतर समझाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि परिवार की जिम्मेदारी है कि बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें सही दिशा दिखाई जाए।

आंदोलन और राजनीतिक इस्तेमाल पर बयान

मोहन भागवत ने आंदोलनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई आंदोलन अपनेपन की भावना से प्रेरित है तो वह एक अलग बात है। लेकिन अगर उसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य है तो उसका इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत को दबाने वाली ताकतें ऐसी परिस्थितियों का इस्तेमाल कर सकती हैं।

AI और नई पीढ़ी पर भी बोले

मोहन भागवत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को बदलती तकनीक और उसके प्रभाव को समझना होगा।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सही और गलत के बीच अंतर समझना चाहिए। OTT और दूसरे मीडिया माध्यमों को लेकर नियम और अनुशासन पर सरकार के साथ चर्चा का भी उन्होंने उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि अगर सही समझ और अनुशासन नहीं होगा तो इसका असर व्यक्ति, परिवार और समाज पर पड़ सकता है।

विजयादशमी पर शस्त्र पूजा और पथ संचलन

RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर नागपुर में विजयादशमी कार्यक्रम के दौरान शस्त्र पूजा और पथ संचलन हुआ। कार्यक्रम से पहले मोहन भागवत ने RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के स्मृति मंदिर पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

1925 में हुई थी RSS की स्थापना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में मोहन भागवत ने भारत की एकता, स्वदेशी, नई पीढ़ी, AI, ड्रग्स और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे बदलावों को लेकर अपनी बात रखी।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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