Gen-Z आंदोलन, आरक्षण और नशे पर RSS की सोच क्या है? संघ ने बतया भविष्य का प्लान

RSS Indore Meeting 2026: मोहन भागवत की मौजूदगी में RSS की तीन दिवसीय बैठक संपन्न। दत्तात्रेय होसबाले ने आरक्षण, Gen-Z आंदोलन, SIR, नशे और संगठन के विस्तार पर बड़े बयान दिए।

Alakha Singh
Published on: 4 Nov 2026 7:29 PM IST (Updated on: 4 Nov 2026 7:31 PM IST)
Gen-Z आंदोलन, आरक्षण और नशे पर RSS की सोच क्या है? संघ ने बतया भविष्य का प्लान
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इंदौर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक बुधवार, 4 नवंबर को इंदौर में संपन्न हो गई। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी में हुई इस बैठक में संगठन के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ भविष्य की रणनीति पर मंथन किया गया। देशभर से करीब 400 पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। बैठक के समापन के बाद दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरक्षण, युवाओं में बढ़ती नशे की लत, Gen-Z आंदोलनों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), संगठन के पंजीकरण और हिंदुत्व जैसे मुद्दों पर संघ का रुख स्पष्ट किया।

आरक्षण पर RSS का रुख साफ

आरक्षण के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि जब तक समाज में सामाजिक पिछड़ापन मौजूद है, तब तक पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। उन्होंने आरक्षण को सामाजिक समानता से जोड़ते हुए कहा कि इस व्यवस्था को खत्म करने का सवाल नहीं उठता। वहीं, आरक्षण का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचने और इस मुद्दे पर राजनीति से बचने की जरूरत पर भी जोर दिया।

Gen-Z आंदोलन पर क्या बोले होसबाले?

देश में युवाओं के आंदोलनों और Gen-Z के असंतोष पर होसबाले ने कहा कि युवाओं की नाराजगी और उनकी समस्याओं को समझना जरूरी है। उन्हें केवल देशविरोधी बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। संघ नई पीढ़ी के साथ सकारात्मक संवाद का पक्षधर है।

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अराजक ताकतें देश के भीतर और बाहर से युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनावों से होना चाहिए। समाज में अशांति फैलाना, विभाजन पैदा करना और हिंसा का सहारा लेना उचित नहीं है।

SIR का समर्थन, विपक्ष से तथ्यों के आधार पर विरोध करने की अपील

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर होसबाले ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में मृत लोगों के नाम और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम हटाए जाने चाहिए। गैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होना भी देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।

उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि किसी भी प्रक्रिया का विरोध करने से पहले उसके तथ्यों की जांच करें। साथ ही कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटाए गए हैं, उनके लिए शिकायत और सुधार की व्यवस्था मौजूद है।

नशे के खिलाफ देशव्यापी अभियान की तैयारी

होसबाले ने युवाओं में बढ़ती नशे की लत को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि संघ इस समस्या से निपटने के लिए सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और एनजीओ को एक मंच पर लाने की कोशिश करेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नशे की तस्करी रोकना पर्याप्त नहीं है। जो युवा पहले ही इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं, उनके पुनर्वास, मानसिक काउंसलिंग और पारिवारिक समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा। नशे के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर नियंत्रण की जिम्मेदारी प्रशासन की है।

RSS के पंजीकरण पर क्या बोले सरकार्यवाह?

RSS के पंजीकरण को लेकर उठने वाले सवालों पर होसबाले ने कहा कि देश में किसी संगठन के सामाजिक कार्य करने के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने वाला कोई सामान्य कानूनी प्रावधान नहीं है। संघ खुद को समाज से अलग संस्था नहीं मानता और देश के संविधान तथा कानूनों के अनुसार काम करता है।

उन्होंने विदेशों में संघ की गतिविधियों पर भी स्थिति स्पष्ट की। उनके मुताबिक, RSS अंतरराष्ट्रीय संगठन बनने की योजना नहीं रखता। स्वयंसेवक करीब 80 देशों में स्थानीय कानूनों के तहत हिंदू समुदायों के बीच काम कर रहे हैं।

राम मंदिर के बाद काशी-मथुरा पर संघ का रुख

काशी और मथुरा के धार्मिक विवादों पर होसबाले ने कहा कि हर मुद्दे को राम जन्मभूमि आंदोलन की तरह आगे बढ़ाना जरूरी नहीं है। राम मंदिर के निर्माण का संकल्प पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कृष्ण जन्मभूमि समेत अदालतों में लंबित मामलों का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।

46 प्रांतों की जगह 88 संभागों में होगा RSS का संगठन

बैठक में संघ के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की योजना भी सामने आई। होसबाले के मुताबिक, मौजूदा 46 प्रांतों की व्यवस्था को पुनर्गठित कर 88 संभागों के आधार पर संगठन का काम आगे बढ़ाया जाएगा। नवंबर और दिसंबर में संगठनात्मक चुनाव तथा नई कार्यकारिणियों के गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

संघ के विस्तार का आंकड़ा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि देशभर में 63,208 स्थानों पर 99,433 दैनिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। साप्ताहिक मिलन की संख्या 34,982 और मासिक मंडलियों की संख्या 14,096 है। कुल मिलाकर संघ की गतिविधियां 1,03,397 स्थानों तक पहुंच चुकी हैं।

शताब्दी वर्ष में करीब पांच करोड़ लोगों तक पहुंचा संघ

होसबाले ने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65,664 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें करीब 4.93 करोड़ लोगों ने भाग लिया। ये सम्मेलन 3,08,429 गांवों तक पहुंचे।

इसके अलावा गृह संपर्क अभियान के तहत स्वयंसेवकों ने 4.63 लाख से अधिक गांवों और 41,825 शहरी बस्तियों में संपर्क किया। इस अभियान के दौरान 10.22 करोड़ से अधिक परिवारों तक पहुंचने का दावा किया गया।

युवाओं को जोड़ने के लिए भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। कॉलेज के विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों की भागीदारी के साथ 57,243 कार्यक्रम हुए।

बाढ़ और चक्रवात प्रभावितों की मदद का दावा

होसबाले ने स्वयंसेवकों के राहत कार्यों का ब्यौरा देते हुए बताया कि असम के शिवसागर और जोरहाट जिलों में 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाईं। करीब 150 परिवारों के मकानों के पुनर्निर्माण के लिए निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। राहत कार्यों के लिए समाज के सहयोग से पांच करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश के चक्रवात प्रभावित इलाकों में भी स्वयंसेवकों ने बिजली बहाली, भोजन-पानी और मछुआरों को नाव तथा जाल उपलब्ध कराने में सहयोग किया।

उत्तर प्रदेश में लखनऊ और चित्रकूट की बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ में 40 हजार से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। करीब 25 हजार परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। चित्रकूट में 28 गांवों के दो हजार से अधिक परिवार प्रभावित हुए और स्वयंसेवकों ने राहत एवं चिकित्सा सहायता पहुंचाई।

कुल मिलाकर, इंदौर की इस बैठक से RSS ने शताब्दी वर्ष के बाद की अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। संगठन का जोर शाखाओं के विस्तार, युवाओं को जोड़ने, नशामुक्ति, सामाजिक समरसता और पंच परिवर्तन को जन-जन तक पहुंचाने पर रहेगा। साथ ही संगठनात्मक ढांचे में 88 संभागों के आधार पर बदलाव भी आने वाले समय का बड़ा कदम होगा।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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