मां-बाप में सुलह कराना चाहता था कुणाल, डॉक्टर बनने का था सपना... संभाजीनगर केस में सामने आई नई कहानी

संभाजीनगर के कुणाल चांदगुडे केस में नई जानकारी सामने आई है। कुणाल MBBS करना चाहता था और माता-पिता में सुलह की कोशिश कर रहा था। जानें पूरे मामले की कहानी।

Alakha Singh
Published on: 24 Aug 2026 8:21 PM IST
मां-बाप में सुलह कराना चाहता था कुणाल, डॉक्टर बनने का था सपना... संभाजीनगर केस में सामने आई नई कहानी
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Kunal Chandgude iPhone Case: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में 19 वर्षीय कुणाल चांदगुडे और उसके माता-पिता की खुवड़िया पहाड़ी से गिरने के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के चार-पांच दिन बाद भी यह मामला चर्चा में है। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल है और इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, पुलिस की जांच और परिवार, पड़ोसियों तथा फायर ब्रिगेड से सामने आई जानकारी से घटना की कई परतें खुल रही हैं।

पुलिस के अनुसार, पारिवारिक तनाव से परेशान कुणाल आत्महत्या के इरादे से पहाड़ी पर पहुंचा था। उसे बचाने के लिए पहुंचे पिता मुरलीधर का हाथ पकड़ते समय संतुलन बिगड़ गया और दोनों करीब 300 फीट नीचे जा गिरे। कुछ ही सेकंड बाद कुणाल की मां संगीता ने भी पहाड़ी से छलांग लगा दी। हादसे में तीनों की मौत हो गई।

क्लास में नहीं पहुंचा तो शुरू हुई तलाश

DCP जोन-2 पंकज अतुलकर के मुताबिक, कुणाल सुबह करीब 8 बजे घर से आकाश इंस्टीट्यूट जाने के लिए निकला था। जब वह सुबह 9:10 बजे तक क्लास में नहीं पहुंचा तो संस्थान ने उसकी मां के मोबाइल पर मैसेज भेजा। इसके बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू की।

करीब 10 से 10:30 बजे के बीच कुणाल के खुवड़िया पहाड़ पर होने की जानकारी मिली। ग्रामीणों ने करीब 10:45 बजे पुलिस को सूचना दी। इसके बाद करीब 11:30 बजे फायर ब्रिगेड को भी मौके पर बुलाया गया।

रेस्क्यू टीम ने समझाने की कोशिश की

फायर ब्रिगेड की टीम जब पहाड़ी पर पहुंची तो कुणाल लगातार अपनी जगह बदल रहा था। टीम ने उसे समझाने की कोशिश की। किसी अनहोनी की स्थिति में उसे बचाने के लिए नीचे जाल भी लगाया गया था।

पुलिस के मुताबिक, कुणाल के माता-पिता और अन्य लोग भी उसे समझाने के लिए पहाड़ी पर पहुंचे। इसी दौरान पिता मुरलीधर उसके करीब गए और उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की। हाथ पकड़ते समय दोनों का संतुलन बिगड़ गया और पिता-पुत्र नीचे गिर गए।

पथरीली जगह पर गिरने से दोनों की मौत हो गई। इसके कुछ ही सेकंड बाद कुणाल की मां संगीता ने भी पहाड़ी से छलांग लगा दी।

फायर ब्रिगेड अधिकारी सैयद सईद के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक कर्मचारी को भी मामूली चोट आई। तीनों शवों को दोपहर करीब 2:30 बजे घाटी अस्पताल लाया गया, जहां पोस्टमार्टम कराया गया।

परिवार का दावा- कुणाल माता-पिता को साथ लाना चाहता था

इस मामले में परिवार के दोनों पक्षों से अलग-अलग बातें सामने आई हैं। संगीता के मायके वालों के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच संपत्ति और पारिवारिक तनाव को लेकर विवाद था। उनका दावा है कि कुणाल अपने माता-पिता के बीच सुलह कराना चाहता था।

संगीता के पिता बबन राव ने बताया कि कुणाल पढ़ाई में अच्छा था। उसने इसी साल 10वीं की CBSE परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। परिवार के अनुसार, कुणाल आगे चलकर MBBS करना चाहता था और डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था।

बुआ ने बताया- 22 साल पहले हुई थी लव मैरिज

वहीं, मुरलीधर की बहन शोभा राजेंद्र मस्के ने परिवार की स्थिति को लेकर अलग जानकारी दी। उनके मुताबिक, करीब 22 साल पहले मुरलीधर और संगीता ने लव मैरिज की थी। मुरलीधर के माता-पिता इस शादी से खुश नहीं थे और शादी में शामिल भी नहीं हुए थे।

शोभा का कहना है कि शादी के बाद भी मुरलीधर और उनके परिवार के बीच रिश्ते सामान्य नहीं हो सके। उन्होंने पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद का भी जिक्र किया।

हालांकि, पड़ोसियों और मुरलीधर के साथ काम करने वाले लोगों की बात इससे अलग है। उनका कहना है कि परिवार सामान्य जीवन जी रहा था और बाहर से किसी बड़े विवाद का अंदाजा नहीं होता था।

पड़ोसियों ने बताया शांत स्वभाव का था परिवार

घर के केयरटेकर आदित्य देशपांडे के मुताबिक, परिवार करीब चार महीने पहले ही किराए के मकान में रहने आया था। उनके अनुसार, परिवार के लोगों का व्यवहार अच्छा था और कुणाल शांत स्वभाव का लड़का था।

मुरलीधर के साथ काम करने वाले चौधरी ट्रांसपोर्ट के मैनेजर पवन ओटंबे ने बताया कि मुरलीधर करीब 10 साल से ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे थे। उनके खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं मिली।

पड़ोसी माधव बजरंग ढकने और अन्य लोगों ने भी कुणाल को पढ़ाई में अच्छा बताया। उनके मुताबिक, कुणाल का सपना MBBS करने का था।

तीन मौतों के बाद घर में अकेला रह गया शेरू

इस दर्दनाक घटना का एक और पहलू सामने आया है। परिवार के तीनों सदस्यों की मौत के बाद उनका पालतू कुत्ता शेरू करीब दो दिनों तक उसी घर में अकेला बंद रहा।

पड़ोसियों की मदद से उसे खाना-पानी दिया जाता रहा। दरवाजे के बाहर किसी के आने की आहट होते ही शेरू दौड़कर दरवाजे तक पहुंच जाता था। मानो उसे अब भी अपने मालिकों के लौटने का इंतजार हो।

दो दिन बाद पेट एनिमल लवर एसोसिएशन की टीम घर पहुंची और शेरू को सुरक्षित बाहर निकाला। फिलहाल उसे नगर निगम के शेल्टर होम में रखने की तैयारी है।

एसोसिएशन से जुड़े बारेल सांचीस ने अपील की है कि शेरू को लंबे समय तक शेल्टर में रखना उचित नहीं होगा। उन्होंने किसी संवेदनशील परिवार से उसे गोद लेकर नया घर देने की अपील की है।

हादसे के पीछे की पूरी वजह अब भी जांच का विषय

कुणाल की मौत के पीछे पारिवारिक तनाव, माता-पिता के बीच विवाद और अन्य वजहों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। पुलिस की शुरुआती जांच घटना को आत्महत्या की कोशिश और उसके बाद हुए दर्दनाक हादसे के रूप में देख रही है। वहीं, परिवार और परिचितों के बयान इस घटना के पीछे की पारिवारिक परिस्थितियों को समझने के लिए अहम हैं।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कुणाल आखिर किस मानसिक और पारिवारिक दबाव से गुजर रहा था और उस सुबह पहाड़ी तक पहुंचने के पीछे उसके मन में क्या चल रहा था। पुलिस की जांच और सामने आने वाले अन्य साक्ष्य ही इस सवाल का स्पष्ट जवाब दे पाएंगे।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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