सम्राट कैबिनेट से BJP दिग्गजों का पत्ता साफ! मैथिली ठाकुर से उलझने वाले मंगल पांडेय की भी छुट्टी, जानें कौन इन, कौन आउट?

Samrat Choudhary cabinet expansion Bihar: सम्राट चौधरी कैबिनेट में बड़ा उलटफेर! BJP के दिग्गज मंगल पांडेय समेत कई मंत्रियों की छुट्टी, मैथिली ठाकुर विवाद बना वजह? जानिए बिहार की नई NDA सरकार में कौन इन और कौन आउट।

Harsh Srivastava
Published on: 7 May 2026 3:08 PM IST (Updated on: 7 May 2026 3:08 PM IST)
सम्राट कैबिनेट से BJP दिग्गजों का पत्ता साफ! मैथिली ठाकुर से उलझने वाले मंगल पांडेय की भी छुट्टी, जानें कौन इन, कौन आउट?
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Samrat Choudhary cabinet expansion Bihar: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन एक नए युग की शुरुआत लेकर आया है। राजधानी पटना में सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का भव्य विस्तार संपन्न हो गया। इस नए स्वरूप वाली कैबिनेट में कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली है। सत्ता के इस नए समीकरण में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश की गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस नई टीम में जहां पुराने चेहरों पर भरोसा जताया गया है, वहीं कुछ दिग्गज नामों की छुट्टी ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

सत्ता का नया गणित: किस पार्टी को मिली कितनी जगह?

मंत्रिमंडल विस्तार में सहयोगी दलों के बीच सीटों का बंटवारा बहुत ही सलीके से किया गया है। सम्राट सरकार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की रही है, जिसके कोटे से 15 मंत्रियों ने शपथ ली। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से 13 नेताओं को मंत्री बनाया गया है। गठबंधन को मजबूती देने के लिए चिराग पासवान की पार्टी (एलजेपी-आर) से दो मंत्रियों को जगह दी गई है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक नेता को कैबिनेट में शामिल किया गया है। इस विस्तार की सबसे चर्चित बात नीतीश कुमार के बेटे का शपथ लेना रही, जो भविष्य की राजनीति के संकेत दे रहा है।

मैथिली ठाकुर का वो सवाल और दिग्गज मंगल पांडेय की विदाई

इस पूरे शपथ ग्रहण समारोह में अगर किसी एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह है बीजेपी के दिग्गज नेता मंगल पांडेय की। बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को सम्राट कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी है। सूत्रों और राजनीतिक जानकारों की मानें तो उनकी विदाई के पीछे लोक गायिका और बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर के साथ हुआ विवाद एक बड़ी वजह माना जा रहा है। 2025 में बीजेपी के टिकट पर विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने सदन में अस्पतालों की बदहाली का मुद्दा बड़े जोर-शोर से उठाया था, जिससे सरकार को काफी असहज होना पड़ा था।

अस्पताल की जर्जर हालत पर सदन में हुई थी तीखी बहस

फरवरी के बजट सत्र के दौरान मैथिली ठाकुर ने अपने क्षेत्र के अस्पताल की खस्ताहाल स्थिति को लेकर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को घेरा था। मैथिली ने कहा था कि अस्पताल की इमारत इतनी जर्जर है कि मरीजों के सिर पर प्लास्टर गिर रहा है और दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। उन्होंने सवाल पूछा था कि क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? मंगल पांडेय ने जवाब में सब कुछ ठीक होने का दावा किया था और कहा था कि नई बिल्डिंग को मंजूरी मिल गई है। लेकिन मैथिली ठाकुर उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुईं और उन्होंने सदन में ही कह दिया कि जमीनी हकीकत कागजों से बिल्कुल अलग है। माना जा रहा है कि इस विवाद ने मंगल पांडेय की छवि को नुकसान पहुंचाया।

तीन पुराने दिग्गजों की छुट्टी: बीजेपी ने दिखाए कड़े तेवर

सम्राट चौधरी ने अपनी नई टीम में बीजेपी के तीन पुराने मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। मंगल पांडेय के अलावा नारायण प्रसाद और सुरेंद्र मेहता का पत्ता भी कट गया है। नारायण प्रसाद नीतीश सरकार में आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग को संभाल चुके थे, वहीं सुरेंद्र मेहता पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री थे। बीजेपी ने इन तीन मंत्रियों को जगह न देकर यह साफ संदेश दिया है कि अब केवल काम और परफॉरमेंस के आधार पर ही मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। मंगल पांडेय जैसे कद्दावर नेता का बाहर होना यह भी दर्शाता है कि पार्टी अब नए और ऊर्जावान चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

नए बिहार के लिए नई टीम का 'अग्निपरीक्षा' शुरू

सम्राट चौधरी की इस नई टीम के सामने बिहार के विकास और आगामी चुनौतियों से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी है। मंत्रिमंडल में पुराने और अनुभवी मंत्रियों की भरमार है, जिससे यह साफ है कि सरकार शासन में कोई ढिलाई नहीं चाहती। हालांकि, पुराने मंत्रियों की छुट्टी होने से जो आंतरिक नाराजगी पैदा हो सकती है, उसे संभालना मुख्यमंत्री के लिए एक चुनौती होगी। बिहार की जनता अब इस नई कैबिनेट से उम्मीद लगाए बैठी है कि जो मुद्दे मैथिली ठाकुर जैसे विधायकों ने उठाए हैं, उन पर यह सरकार त्वरित कार्रवाई करेगी। फिलहाल, बिहार की सत्ता में सम्राट का 'राजतिलक' हो चुका है और अब सबकी नजरें उनके कामकाज पर टिकी हैं।

Harsh Srivastava

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