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'अंतिम संस्कार में कोई न जाए, जानवर खाएंगे... 'किसानों की आत्महत्या पर विधायक जी के बिगड़े बोल
Sanjay Gaikwad Statement: महाराष्ट्र में किसान आत्महत्या पर शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ के बयान से विवाद। अंतिम संस्कार में शामिल न होने की टिप्पणी पर किसान संगठनों ने जताई नाराजगी।
Sanjay Gaikwad Statement
Sanjay Gaikwad Statement: महाराष्ट्र (Maharashtra) में किसानों की आत्महत्या (Farmers' Suicides) जैसे गंभीर मुद्दे पर शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ (Shiv Sena MLA Sanjay Gaikwad) के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। बुलढाणा (Buldhana) से विधायक गायकवाड़ ने कहा कि आत्महत्या करने वाले किसानों के अंतिम संस्कार (Funeral) में किसी को शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जब जानवर किसानों के शवों को खाएंगे, तब उन्हें अपने कदम का एहसास होगा और वे आत्महत्या करना बंद कर देंगे। उनके इस बयान की किसान संगठनों (Farmers' Organisations) के नेताओं ने कड़ी आलोचना की है। वहीं, शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने नेताओं से किसानों के प्रति संवेदनशीलता बरतने की अपील की है।
किसानों की आत्महत्या पर क्या बोले संजय गायकवाड़?
शिंदे गुट की शिवसेना (Shinde-led Shiv Sena) के विधायक संजय गायकवाड़ ने बुधवार को मीडिया (Media) से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने किसानों से आत्महत्या करने के बजाय अपनी समस्याएं सरकार, विधायक या सांसद तक पहुंचाने को कहा। गायकवाड़ के मुताबिक, अगर किसानों को कोई परेशानी है तो उन्हें संबंधित जनप्रतिनिधियों (Public Representatives) को पत्र लिखना चाहिए, क्योंकि वे उनकी मदद कर सकते हैं।
विधायक ने कहा कि आत्महत्या करने वाले किसान अपने पीछे पत्नी और बच्चों को छोड़ जाते हैं, जिन्हें बाद में दूसरों के सहारे रहना पड़ता है। उन्होंने शादी के समय लिए जाने वाले सात फेरों और परिवार की जिम्मेदारी निभाने के वादे का भी जिक्र किया। गायकवाड़ का तर्क था कि किसानों को अपने इस कदम के परिणामों का एहसास कराने के लिए उनके अंतिम संस्कार में लोगों को शामिल नहीं होना चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान को किसानों की मुश्किलों के प्रति असंवेदनशील रवैये के तौर पर देखा जा रहा है।
सूखा और फसल बर्बादी से जूझ रहे किसान
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या (Farmer Suicides in Maharashtra) का मुद्दा ऐसे समय फिर चर्चा में आया है, जब राज्य के कई हिस्सों में सूखे और फसल बर्बाद होने से किसानों की परेशानी बढ़ी है। मॉनसून (Monsoon) की कमी और खेती पर पड़ रहे असर के बीच किसान आर्थिक तंगी (Financial Distress) का सामना कर रहे हैं। फसल खराब होने, कर्ज और आमदनी में कमी जैसी समस्याएं लंबे समय से किसानों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
ऐसे हालात में गायकवाड़ के बयान ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि किसानों की परेशानी का समाधान तलाशने के बजाय इस तरह की टिप्पणी उनके संकट को और गंभीर बना सकती है।
पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं गायकवाड़
संजय गायकवाड़ पहले भी अपने बयानों और व्यवहार को लेकर विवादों में रहे हैं। कैंटीन में कथित तौर पर खराब या बासी खाना परोसे जाने पर कर्मचारी को मुक्का मारने की घटना को लेकर भी उनकी आलोचना हुई थी। एक किताब के शीर्षक पर प्रकाशक को धमकी देने और बीजेपी के एक विधायक के खिलाफ महिलाओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में भी उनका नाम विवादों से जुड़ा रहा है।
वर्ष 2021 में महा विकास आघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) सरकार के कार्यकाल के दौरान गायकवाड़ ने कहा था कि कोविड वायरस (COVID-19 Virus) को देवेंद्र फडणवीस के गले में डाल देना चाहिए। सितंबर 2024 में उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की जीभ काटने वाले को इनाम देने की घोषणा की थी। मार्च 2024 में सामने आए एक वीडियो में वह पुलिस की लाठी से एक युवक की पिटाई करते दिखाई दिए थे। पिछले साल जुलाई में विधायक हॉस्टल की कैंटीन में खराब खाना परोसने के आरोप के बाद कर्मचारी को मुक्का मारने की घटना भी चर्चा में रही थी। उनके बयानों पर शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) उन्हें फटकार लगा चुके हैं।
किसान संगठनों ने की आलोचना, शिंदे से माफी की मांग
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं को किसानों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों के मुद्दे पर जिम्मेदारी से बात की जानी चाहिए।
किसान सभा (Kisan Sabha) के नेता अजीत नवले (Ajit Nawale) ने गायकवाड़ के बयान की निंदा की। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे विवादित बयानों के बावजूद गायकवाड़ को चुनाव लड़ने का टिकट देने वालों को अपने फैसले पर पछतावा क्यों नहीं होता। नवले ने मतदाताओं से भी पूछा कि उन्होंने ऐसे नेता को क्यों चुना, जिसकी छवि पहले से विवादों से जुड़ी रही है।
वहीं, स्वाभिमानी पक्ष (Swabhimani Paksha) के किसान नेता राजू शेट्टी (Raju Shetti) ने भी विधायक की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान कर्जत में टोरेंट पावर (Torrent Power) परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकता है। शेट्टी ने एकनाथ शिंदे से इस बयान से प्रभावित लोगों के सामने माफी मांगने की मांग की।


