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10 बटालियन, 10000 कमांडो और 1 महिला IPS! कौन हैं संजुक्ता पराशर जो बनीं CoBRA की पहली IG
IPS Sanjukta Parashar: 2006 बैच की IPS अधिकारी संजुक्ता पराशर को CRPF की एलीट CoBRA फोर्स की पहली महिला IG नियुक्त किया गया है। जानिए उनकी IPS यात्रा, असम में उग्रवाद विरोधी अभियान, NIA अनुभव और CoBRA की 10 बटालियन व करीब 10 हजार कमांडो वाली ताकत के बारे में।
IPS Sanjukta Parashar: असम के बीहड़ और दुर्गम जंगलों में अपनी कड़क फील्ड पुलिसिंग और उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए देशभर में मशहूर 2006 बैच की निडर आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर ने भारतीय पुलिस व्यवस्था में एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। केंद्र सरकार ने उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की सबसे अत्यधिक विशिष्ट और घातक जंगल-वारफेयर यूनिट 'कोबरा' (Commando Battalion for Resolute Action - CoBRA) की कमान सौंपते हुए पहली महिला महानिरीक्षक (IG) नियुक्त किया है। यह पहला मौका है जब 10 बटालियनों वाली इस एलीट और बेहद चुनौतीपूर्ण कमांडो फोर्स की बागडोर किसी महिला अधिकारी के हाथों में सौंपी गई है। मणिपुर सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में जारी संवेदनशील परिस्थितियों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जारी अभियानों के बीच संजुक्ता पराशर की यह तैनाती रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
आखिर क्यों कहलाती हैं 'आयरन लेडी ऑफ असम'?
असम-मेघालय कैडर की आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर को पूर्वोत्तर भारत में उग्रवादियों के खिलाफ चलाए गए उनके बेखौफ और साहसिक अभियानों के कारण 'आयरन लेडी ऑफ असम' का नाम मिला है। साल 2013-14 में जब वे असम के अति-संवेदनशील शोणितपुर जिले की एसपी थीं, तब उन्होंने खूंखार उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और घातक ऑपरेशन चलाया था। हाथ में एके-47 राइफल थामकर घने जंगलों में खुद अपनी टीम का नेतृत्व करने वाली संजुक्ता पराशर ने अपने कार्यकाल के दौरान दर्जनों खूंखार उग्रवादियों को मार गिराया और 160 से अधिक संदिग्धों को जेल की सलाखों के पीछे धकेला।
क्या है घातक 'CoBRA' फोर्स और इसकी विशेषज्ञता
कोबरा (CoBRA) सीआरपीएफ की एक अत्यंत विशिष्ट और घातक इकाई है, जिसका गठन साल 2008 में माओवादियों और उग्रवादियों से कड़ाई से निपटने के लिए किया गया था। इस बल का मुख्य मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में है, जबकि इसके बटालियन केंद्र छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में स्थापित हैं। कोबरा कमांडो बेहद कठिन और दुर्गम इलाकों में पैदल लंबी दूरी तय करने, सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर घात लगाने और आईईडी (IED) जैसे घातक विस्फोटकों से निपटने में माहिर होते हैं। 10,000 कमांडोज वाली इस 10-बटालियन फोर्स की कमान संभालना सामान्य पुलिस तैनाती से बिल्कुल अलग है, जिसके लिए असाधारण रणनीतिक कौशल की आवश्यकता होती है।
DU और JNU से उच्च शिक्षा, फिर चुना IPS का कठिन रास्ता
संजुक्ता पराशर का अकादमिक रिकॉर्ड भी उनकी जांबाजी की तरह ही बेहद शानदार रहा है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित इंद्रप्रस्थ कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने देश के अग्रणी संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) में परास्नातक और एम.फिल की डिग्रियां हासिल कीं। साल 2006 में सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 85वीं रैंक हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के बजाय भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को चुना।
NIA में आतंकवाद विरोधी जांच का लंबा अनुभव
कोबरा की कमान संभालने से पहले संजुक्ता पराशर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर तैनात थीं। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बेहद संवेदनशील मामलों और आतंकवाद विरोधी नेटवर्कों की गहन जांच का नेतृत्व किया। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि असम के जंगलों में उग्रवाद विरोधी अभियानों का उनका ज़मीनी अनुभव और एनआईए में राष्ट्रीय सुरक्षा जांच की उनकी विशेषज्ञता, दोनों मिलकर कोबरा फोर्स को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश की करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय है।


