सत्य निकेतन PG हादसे के बाद SC का बड़ा कदम, देशभर के PG-Hostel की होगी जांच? जानें पूरा मामला

Delhi Satya Niketan PG Collapse: 7 मौतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के PG और हॉस्टल की सुरक्षा जांच का संकेत दिया है। SC दिल्ली हाई कोर्ट की PIL को अपने पास ट्रांसफर कर सकता है।

Alakha Singh
Published on: 8 Sept 2026 5:35 PM IST (Updated on: 8 Sept 2026 5:46 PM IST)
सत्य निकेतन PG हादसे के बाद SC का बड़ा कदम, देशभर के PG-Hostel की होगी जांच? जानें पूरा मामला
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Satya Niketan PG Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने से हुई 7 लोगों की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में चल रहे प्राइवेट PG, हॉस्टल और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर बड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संकेत दिया कि वह इस पूरे मामले को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि Pan-India स्तर पर बिल्डिंग सेफ्टी और निर्माण नियमों के उल्लंघन की जांच का दायरा बढ़ा सकता है।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि अदालत के दिमाग में पहले से कुछ योजना है और यह मुद्दा पूरे देश के स्तर पर उठाया जाना चाहिए। अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित PIL को अपने पास ट्रांसफर करने की संभावना भी जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “We already have something in mind. It has to be on a pan-India basis.” कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित याचिका को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है और इस पर आगे सुनवाई की जाएगी।

7 मौतों के बाद उठा बड़ा सवाल- कितने PG और हॉस्टल सुरक्षित?

सत्य निकेतन में हुए हादसे ने दिल्ली समेत देशभर के उन PG और हॉस्टल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। खासकर ऐसे निजी आवास सवालों के घेरे में हैं, जहां निर्माण की अनुमति, नक्शे, फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सुरक्षा की पर्याप्त जांच नहीं होती।

सुप्रीम कोर्ट के सामने कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने इस मामले को उठाया। उन्होंने PG, हॉस्टल और छात्रों के लिए इस्तेमाल होने वाली अन्य आवासीय इमारतों की तत्काल सुरक्षा जांच और Structural Audit कराने की मांग की।

सिन्हा ने अदालत को बताया कि हालिया हादसे के बाद निरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है और आखिरी निरीक्षण मंगलवार दोपहर 2:30 बजे किया जाना है।


दिल्ली हाई कोर्ट में पहले से लंबित है PIL

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में भी एक PIL लंबित है। हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम यानी MCD को हादसे की हाई लेवल जांच करने का निर्देश दिया है।

जांच में यह भी पता लगाया जाना है कि इमारत के निर्माण के लिए जरूरी अनुमति थी या नहीं और कथित लापरवाही के लिए कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार हो सकते हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी में तेजी से बढ़ रहे निजी PG और छात्रों के लिए अपर्याप्त हॉस्टल सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई है।

सत्य निकेतन में कैसे हुआ हादसा?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन में एक इमारत 6 सितंबर को ढह गई थी। इस बिल्डिंग का इस्तेमाल लड़कों के PG के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था।

हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद बिल्डिंग की सुरक्षा, निर्माण नियमों और मरम्मत कार्य से जुड़े सवालों ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।

पहले भी सुप्रीम कोर्ट जता चुका है चिंता

यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में असुरक्षित और अवैध निर्माण को लेकर चिंता जताई है। साकेत में बिल्डिंग गिरने और मालवीय नगर में होटल में आग जैसी घटनाओं के बाद भी अदालत ने इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सर्वे कराने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।

अब देशभर के PG और हॉस्टल पर नजर?

सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के रुख से संकेत मिल रहा है कि PG और हॉस्टल की सुरक्षा का मुद्दा अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रह सकता।

अगर PIL सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर होती है और अदालत इसे Pan-India स्तर पर ले जाती है, तो देश के अलग-अलग शहरों में चल रहे निजी PG, हॉस्टल और छात्र आवासों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी, निर्माण अनुमति, फायर सेफ्टी और नियमों के अनुपालन की जांच का रास्ता खुल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर आगे क्या दिशा-निर्देश देता है, इस पर अब सबकी नजर है।

7 छात्रों की मौत के बाद NHRC भी सख्त, मांगी योजना

दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने से 7 छात्रों की मौत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी दिल्ली में छात्रों के लिए पर्याप्त और किफायती हॉस्टल की कमी पर गंभीर चिंता जताई है।

NHRC ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और UGC चेयरमैन को दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ समन्वय कर हॉस्टल क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने कहा कि योजना सिर्फ दिल्ली विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती आवास की जरूरत को व्यापक स्तर पर ध्यान में रखा जाए।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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