TRENDING TAGS :
Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी केस में SDPO राजेश शर्मा बनाए गए आरोपी, 19 साल पहले भी लगा था खौफनाक दाग
Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने राज्य की राजनीति और पुलिस व्यवस्था में हलचल मचा दी है।
Bharat Tiwari Encounter Case
Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले ने राज्य की राजनीति और पुलिस व्यवस्था में हलचल मचा दी है। इस मामले में नाम आने के बाद जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को पद से हटा दिया गया है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब उनका नाम किसी विवादित एनकाउंटर से जुड़ा हो। करीब 19 साल पहले मुजफ्फरपुर में हुए मनीष महिवाल एनकाउंटर मामले की पीड़ित मां ने भी अब राजेश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
2007 के एनकाउंटर का दर्द आज भी नहीं भूली मां
मुजफ्फरपुर की रहने वाली अनिता देवी का आरोप है कि वर्ष 2007 में उनके 17 वर्षीय बेटे मनीष महिवाल को पुलिस पूछताछ के नाम पर घर से ले गई थी और बाद में उसे फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया। उस समय छठ पूजा की तैयारियां चल रही थीं और परिवार त्योहार की खुशियों में डूबा था। लेकिन अगले ही दिन बेटे की मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। अनिता देवी का कहना है कि तत्कालीन सदर थाना प्रभारी राजेश कुमार शर्मा उनके बेटे को पूछताछ के बहाने ले गए थे। बाद में पुलिस ने दावा किया कि मनीष और उसके दो साथी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। हालांकि परिवार लगातार इस कार्रवाई को फर्जी एनकाउंटर बताता रहा है।
क्या था मनीष महिवाल एनकाउंटर मामला?
4 नवंबर 2007 की रात मुजफ्फरपुर के एमआईटी कॉलेज के पास तीन युवकों मनीष महिवाल, मुकुल ठाकुर और सुबोध कुमार सिंह के शव बरामद हुए थे। पुलिस का दावा था कि वाहन जांच के दौरान युवकों ने पुलिस पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में उनकी मौत हुई। मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई थी और जांच में पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट मिल गई थी। लेकिन बाद में मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के दौरान कई सवाल उठे। पुलिसकर्मियों के बयान आपस में मेल नहीं खाते थे और कथित रूप से बरामद हथियारों से जुड़े पर्याप्त सबूत भी सामने नहीं आए थे।
भरत तिवारी एनकाउंटर में भी लगे गंभीर आरोप
अब भोजपुर के भरत तिवारी मामले में भी राजेश शर्मा का नाम सामने आया है। भरत की मां आशा देवी ने दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी। एफआईआर के अनुसार भरत तिवारी फेसबुक लाइव के दौरान पुलिस के सामने सरेंडर कर चुका था, लेकिन इसके बाद भी उसे कथित रूप से निशाना बनाया गया। गंभीर रूप से घायल भरत को अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई।
न्यायिक जांच के आदेश, आंदोलन की चेतावनी
भरत तिवारी मामले को लेकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। बिलौटी गांव में आयोजित महापंचायत में निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई गई। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस बीच बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठित कर दिया है। पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में जांच कराई जाएगी। वहीं, राजेश कुमार शर्मा को पद से हटाकर मुख्यालय भेज दिया गया है और उनकी जगह डीएसपी पंकज मिश्रा की तैनाती की गई है।
दो मांओं का एक जैसा दर्द
मनीष महिवाल की मां अनिता देवी और भरत तिवारी की मां आशा देवी के आरोपों ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर 19 साल पुराना मामला अब भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है, तो दूसरी ओर भरत तिवारी एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। अब सभी की नजरें न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।


