Bengal Politics: ममता दीदी को हाईकोर्ट से भी लगा झटका, ऋतब्रत बनर्जी होंगे बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष

Bengal Politics: कलकत्ता हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष रथिन बसु के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था।

Shishumanjali kharwar
Published on: 18 Jun 2026 12:49 PM IST (Updated on: 18 Jun 2026 12:49 PM IST)
Mamata Banerjee
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Bengal Politics: पश्चिम बंगाल राजनीति में विपक्ष के नेता के पद को लेकर चल रहे विवाद के बीच ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष रथिन बसु के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी ही विपक्ष के नेता बने रहेंगे। न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर फिलहाल अंतरिम आदेश जारी करने का कोई प्रथम दृष्टया आधार नहीं बनता। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में न तो तत्काल राहत देने की आवश्यकता दिखाई देती है और न ही सुविधा का संतुलन याचिकाकर्ता के पक्ष में है। साथ ही अदालत ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किए जाने से जुड़ा है। इस फैसले को तृणमूल कांग्रेस विधायक और ममता बनर्जी के करीबी नेता शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने अदालत में चुनौती दी थी। याचिका में मांग की गई थी कि स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई जाए और मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। हालांकि हाई कोर्ट ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पीकर की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता से पूछा कि 9 मई को प्राप्त उस पत्र पर कोई निर्णय क्यों नहीं लिया गया, जिसमें शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब पहले आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो 3 जून को मिले दूसरे आवेदन पर इतनी तेजी से फैसला कैसे लिया गया। अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि पहले प्रस्ताव को नजरअंदाज करने का कोई स्पष्ट कारण रिकॉर्ड पर नहीं है।

टीएमसी में फूट के बाद बदले समीकरण

विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए। पार्टी नेतृत्व ने शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विधायक दल का नेता बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पार्टी के कई विधायकों ने इस निर्णय का समर्थन नहीं किया। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कथित तौर पर 58 विधायकों का समर्थन जुटाकर विपक्ष के नेता पद पर दावा पेश किया। वहीं, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित भी कर दिया।

जाली हस्ताक्षर विवाद और CID जांच

विवाद उस समय और गहरा गया जब टीएमसी के कई विधायकों ने आरोप लगाया कि शोवनदेब चट्टोपाध्याय के समर्थन में स्पीकर को सौंपे गए दस्तावेज पर उनके जाली हस्ताक्षर किए गए थे। इस आरोप के बाद मामला राजनीतिक विवाद से निकलकर जांच के दायरे में पहुंच गया। फिलहाल इस पूरे प्रकरण की जांच सीआईडी कर रही है। विपक्ष के नेता पद को लेकर चल रहा यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक महत्वपूर्ण रूप ले सकता है।

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Shishumanjali kharwar

मीडिया क्षेत्र में 12 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव। इस दौरान विभिन्न अखबारों में उप संपादक और एक न्यूज पोर्टल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्य किया। वर्तमान में प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल ‘न्यूजट्रैक’ में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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