Kolkata Former DCP Arrest: वर्दी की आड़ में 'रंगदारी' का खेल? कोलकाता के पूर्व DCP शांतनु बिस्वास गिरफ्तार, ED का बड़ा एक्शन

Kolkata Former DCP Arrest: कोलकाता के पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी से बंगाल की राजनीति में भूचाल! ED ने ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले अधिकारी पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और रंगदारी सिंडिकेट से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। जानिए पूरा मामला।

Harsh Srivastava
Published on: 14 May 2026 10:36 AM IST (Updated on: 14 May 2026 10:37 AM IST)
Kolkata Former DCP Arrest: वर्दी की आड़ में रंगदारी का खेल? कोलकाता के पूर्व DCP शांतनु बिस्वास गिरफ्तार, ED का बड़ा एक्शन
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Kolkata Former DCP Arrest: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए 'महापरिवर्तन' के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उन अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है, जिन्हें पिछली सरकार का करीबी माना जाता था। इसी कड़ी में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की इस बड़ी कार्रवाई ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। बिस्वास पर न केवल भ्रष्टाचार के आरोप हैं, बल्कि उन पर पद का दुरुपयोग कर एक खास राजनीतिक दल के हितों को साधने का भी गंभीर आरोप है।

ED का लुकआउट नोटिस और पांच समन की अनदेखी

शांतनु सिन्हा बिस्वास की मुश्किलें उस वक्त चरम पर पहुंच गईं जब ईडी ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया। दरअसल, केंद्रीय एजेंसी पिछले काफी समय से बिस्वास को पूछताछ के लिए बुला रही थी, लेकिन उन्होंने एक के बाद एक पांच समन को नजरअंदाज कर दिया। जांच एजेंसी को अंदेशा था कि वे देश छोड़कर भाग सकते हैं, जिसके चलते देश के सभी बंदरगाहों और हवाई अड्डों को अलर्ट कर दिया गया था। अंततः, कानून का हाथ उन तक पहुंच ही गया। बिस्वास पर आरोप है कि वे जांच में सहयोग करने के बजाय लगातार बहानेबाजी कर रहे थे, जिसके चलते एजेंसी को सख्त कदम उठाना पड़ा।

ममता बनर्जी से 'करीबी' और मंच पर मौजूदगी का विवाद

शांतनु सिन्हा बिस्वास को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद खास माना जाता था। उनकी गिरफ्तारी के पीछे एक बड़ी वजह उनकी कथित 'राजनीतिक वफादारी' भी बताई जा रही है। हाल ही में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बिस्वास को ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करते हुए देखा गया था। उस वक्त विपक्षी दलों ने पुलिस अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे, हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने सफाई दी थी कि वे सुरक्षा कारणों से वहां मौजूद थे। अब सरकार बदलते ही ईडी ने उन फाइलों को दोबारा खोल दिया है, जिनमें बिस्वास के कार्यकाल के दौरान हुए कथित घोटालों का जिक्र था।

परिवार तक पहुंची जांच की आंच

जांच की तपिश सिर्फ शांतनु सिन्हा बिस्वास तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार को भी अपनी जद में ले लिया है। ईडी ने बिस्वास के दोनों बेटों, सयंतन और मनीष को भी पूछताछ के लिए तलब किया था। आरोप है कि बिस्वास ने अपने पद का लाभ उठाकर अपने बेटों के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित की। जब ईडी की टीम ने बालीगंज स्थित उनके फर्न रोड वाले आवास पर छापेमारी की, तो वहां से कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे। बेटों के जांच में शामिल न होने के बाद अब उन पर भी कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

सोना पप्पू कनेक्शन

बिस्वास के खिलाफ सबसे गंभीर मामला स्थानीय अपराधी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' से जुड़ा है। सोना पप्पू पर हत्या की कोशिश और जबरन वसूली जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं। जांच में सामने आया है कि बिस्वास और व्यवसायी जॉय कामदार (सन एंटरप्राइज के एमडी) ने मिलकर इस अपराधी सिंडिकेट को संरक्षण दिया और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए करोड़ों का काला धन इधर-उधर किया। ईडी ने पूर्व में की गई छापेमारी के दौरान करीब 1.47 लाख रुपये नकद, 67 लाख रुपये से अधिक के जेवरात और एक अवैध देसी पिस्तौल भी बरामद की थी, जो एक पुलिस अधिकारी के लिए जवाब देना नामुमकिन साबित हो रहा है।

बंगाल पुलिस कल्याण समिति और भ्रष्टाचार के नए खुलासे

बिस्वास केवल डीसीपी ही नहीं थे, बल्कि वे पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण समिति के मुख्य समन्वयक और नोडल अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काबिज थे। ईडी को शक है कि इन पदों पर रहते हुए उन्होंने पुलिस फंड और अन्य योजनाओं में भी बड़ी हेराफेरी की है। नई सरकार के आने के बाद अब पुलिस विभाग के भीतर की उन 'काली भेड़ों' की पहचान की जा रही है जिन्होंने वर्दी की आड़ में सत्ता के गलियारों में अपनी सेटिंग कर रखी थी। शांतनु सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी तो महज एक शुरुआत मानी जा रही है, आने वाले दिनों में बंगाल की अफसरशाही में कई और बड़े विकेट गिर सकते हैं।

Harsh Srivastava

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