शरद पवार का गजब खेल! बिना NDA में गए भी चमकाएंगे BJP की किस्मत? 15 मिनट का बड़ा सियासी गेम

Sharad Pawar NDA Benefit: शरद पवार और एकनाथ शिंदे की 15 मिनट की मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। जानिए क्यों बढ़ीं एनडीए में जाने की अटकलें, उद्धव ठाकरे खेमे की नाराजगी और इस मुलाकात के राजनीतिक मायने।

Harsh Srivastava
Published on: 9 July 2026 7:43 PM IST
शरद पवार का गजब खेल! बिना NDA में गए भी चमकाएंगे BJP की किस्मत? 15 मिनट का बड़ा सियासी गेम
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Sharad Pawar NDA Benefit: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ऐसा भूचाल आया है जिसने मुंबई से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों को पूरी तरह गर्मा दिया है। इस बड़े तूफान की वजह पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार और राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच हुई अचानक मुलाकात है। बुधवार यानी 08 जुलाई को हुई इस बैठक की तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हुईं, वैसे ही कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया। इस मुलाकात ने विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन के भीतर एक नई जंग छेड़ दी है और उद्धव ठाकरे की पार्टी को इससे सबसे तगड़ी मिर्ची लगी है।

उद्धव के हनुमान का तीखा हमला

शिवसेना यूबीटी के बड़े नेता और उद्धव ठाकरे के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार संजय राउत ने इस मुलाकात पर बेहद तल्ख तेवर दिखाए हैं। राउत ने शरद पवार की साख पर सीधे सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर हमारे साथ गद्दारी करने वालों के दफ्तर में जाकर ऐसी बैठक करने की क्या मजबूरी थी? उन्होंने कहा कि शरद पवार यकीनन देश के एक बहुत बड़े और सम्मानित राजनेता हैं, लेकिन जिन लोगों ने पीठ में छुरा घोंपकर हमारी सरकार को गिराया, उनके केबिन में खुद चलकर जाना एक बड़े लीडर की विश्वसनीयता को जनता की नजरों में बेहद कम कर देता है। हालांकि राउत ने यह उम्मीद भी जताई कि पवार कभी एनडीए के पाले में नहीं जाएंगे।

आव्हाड का करारा पलटवार

संजय राउत के इस तीखे बयान ने शरद पवार के करीबियों को बेहद नाराज कर दिया है। पवार गुट के कद्दावर विधायक जितेंद्र आव्हाड ने राउत को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि वह दफ्तर किसी नेता की निजी जागीर नहीं है, बल्कि वह राज्य के उपमुख्यमंत्री का आधिकारिक कार्यालय है। आव्हाड ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि संजय राउत को बात करते समय शरद पवार की उम्र और कद का लिहाज रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मेरा मुंह मत खुलवाओ, सब जानते हैं कि अजित पवार से गुपचुप मिलने के लिए पहले कौन दौड़कर गया था।

बदल गया लोकसभा का पूरा गणित

इस सियासी उठापटक के बीच महाराष्ट्र में लोकसभा का गणित भी तेजी से बदल चुका है। पिछले ही महीने उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसद पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो चुके हैं। इस दलबदल के बाद अब कांग्रेस के पास 13 सांसद हैं, जबकि शरद पवार की पार्टी के पास 8 सांसद मौजूद हैं। वहीं उद्धव की शिवसेना अब सिर्फ 3 सांसदों पर सिमट कर रह गई है। दूसरी तरफ एनडीए यानी महायुति गठबंधन में बीजेपी के पास 9 सांसद हैं, जबकि 6 नए सांसदों के आने के बाद अब शिंदे गुट का आंकड़ा बढ़कर सीधे 13 हो चुका है। अजीत पवार की एनसीपी के पास 1 सांसद है और 1 सीट अन्य के खाते में है।

देशभर में विपक्षी किलों का ढहना

पवार की पार्टी के एनडीए में जाने की अटकलें इसलिए भी तेज हैं क्योंकि हाल ही में विपक्षी खेमे में भारी टूट देखने को मिली है। इससे पहले टीएमसी पूरी तरह बिखर चुकी है, जिसके 20 लोकसभा और 4 राज्यसभा सांसद बीजेपी का दामन थाम चुके हैं। ठीक इसी तरह उद्धव की पार्टी से 6 लोकसभा सदस्य शिंदे के साथ चले गए। इतना ही नहीं, कुछ समय पहले आम आदमी पार्टी भी राज्यसभा में बुरी तरह टूटी थी और उसके 7 सांसद सीधे बीजेपी में शामिल हो गए थे। इसी वजह से अब शरद पवार के कुछ नेताओं की बीजेपी दिग्गजों से बढ़ती मुलाकातों ने इस चर्चा को और ज्यादा हवा दे दी है।

दरवाजे हमेशा खुले रखते हैं पवार

शरद पवार को भारतीय राजनीति का सबसे मंझा हुआ और चालाक खिलाड़ी माना जाता है। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे सियासत में कभी भी अपने सारे दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करते। चाहे सामने एकनाथ शिंदे हों या फिर देवेंद्र फडणवीस, पवार हमेशा बातचीत का एक रास्ता खुला रखते हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भले ही पवार सीधे एनडीए का हिस्सा न बनें, लेकिन वे कुछ अहम मुद्दों पर संसद के भीतर बीजेपी सरकार को फायदा पहुंचा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि केंद्र सरकार आगामी दिनों में देश में परिसीमन का नया बिल लेकर आती है, तो मुमकिन है कि पिछली बार इसका विरोध करने वाली शरद पवार की पार्टी इस बार पाला बदलकर सरकार के पक्ष में अपना वोट डाल दे।

15 मिनट का बड़ा सियासी खेल

पवार की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वे पहुंचे, तो एकनाथ शिंदे अपनी एक बेहद जरूरी कैबिनेट बैठक को बीच में ही छोड़कर उनसे मिलने के लिए दौड़े चले आए। दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बेहद औपचारिक बातचीत हुई। इस छोटी सी मुलाकात के जरिए शरद पवार ने पूरी दुनिया को यह साफ और कड़ा सियासी संदेश दे दिया है कि राजनीति में उनके लिए कोई भी अछूता या दुश्मन नहीं है और वे कभी भी बाजी पलट सकते हैं।

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Harsh Srivastava

Former Content Writer Mail ID - newstrack@gmail.comharshsri764@gmail.com

Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

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