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रात में फडणवीस, दिन में शिंदे... आखिर Sharad Pawar के नेताओं की इन 'गुप्त' मुलाकातों के पीछे क्या है असली खेल?
Maharashtra Politics: इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।
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Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक़्त हलचल तेज हो गई जब NCP शरद पवार गुट के 2 बड़े नेता जयंत पाटिल (Jayant Patil) और जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने मुंबई में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के सरकारी आवास 'नंदनवन' में तकरीबन 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।
इन लगातार बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि शरद पवार (Sharad Pawar) की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन का अहम भाग बन सकती है।
NDA में शामिल होने की अटकलों पर नेताओं ने दिया जवाब
हालांकि, इन चर्चाओं के बीच जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड दोनों ने स्पष्ट तौर पर ऐसी सभी अटकलों को खारिज कर दिया। दोनों नेताओं का कहना है कि इन मुलाकातों का किसी भी तरह के राजनीतिक गठजोड़ या सत्ता परिवर्तन से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार यह बैठक पूरी तरह से उनके क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों और लंबित प्रशासनिक मामलों को लेकर हुई थी।
विकास कार्यों और लंबित मामलों पर हुई चर्चा
जयंत पाटिल ने एक साक्षात्कार के दौरान यह साफ़ किया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात शहरी विकास (Urban Development) से जुड़े लंबित परियोजना और एक नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ दायर अपील पर चर्चा करने के लिए की थी। उनका कहना है कि यह मुलाकात पूरी तरह प्रशासनिक और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर थी, न कि किसी राजनीतिक समझौते के लिए।
जितेंद्र आव्हाड ने अफवाहों को बताया बेबुनियाद
जयंत पाटिल की बात का समर्थन करते हुए जितेंद्र आव्हाड ने भी स्पष्ट कहा कि 40 साल का राजनीतिक अनुभव रखने वाला कोई भी नेता किसी संवेदनशील राजनीतिक गठजोड़ पर चर्चा करने के लिए सत्तारूढ़ दल के बड़े नेताओं से इस तरह खुलेआम मुलाकात नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें केवल अफवाहों को हवा देने का काम कर रही हैं।
सत्तारूढ़ गठबंधन पर लगाए दबाव बनाने के आरोप
जितेंद्र आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके इलाके के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराया जाना सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का भाग है। उनका कहना है कि इस निर्णय के माध्यम से उन्हें झुकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के प्रति उनकी वफादारी पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस पूरे मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहे हैं, क्योंकि इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता।
फिलहाल दोनों नेताओं ने यह साफ़ कर दिया है कि उनकी मुलाकातों को राजनीतिक गठजोड़ से जोड़कर देखना सही नहीं है और इन बैठकों का उद्देश्य सिर्फ विकास कार्यों और प्रशासनिक मामलों पर चर्चा करना था।


