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'NDA में शामिल होने' की चर्चाओं पर Sharad Pawar ने तोड़ी चुप्पी, इस एक 'बयान' से बदल गया पूरा सियासी
Maharashtra Politics News: इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गयी है कि क्या शरद पवार की पार्टी भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का भाग बनने को तैयार हैं।
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Maharashtra Politics News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज होती नज़र आ रही है। हाल ही में शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद अब शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को लेकर नई राजनीतिक अटकलें शुरू हो गई हैं।
इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गयी है कि क्या शरद पवार की पार्टी भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का भाग बनने को तैयार हैं। इन चर्चाओं ने उस वक़्त और जोर पकड़ लिया था, जब BJP के वरिष्ठ नेता और NCP के नेताओं के बीच हुई मुलाकातों की खबरें सामने आईं। हालांकि, बढ़ती अटकलों के बीच खुद शरद पवार ने सामने आकर इन सभी दावों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया।
शरद पवार ने अफवाहों पर लगाया विराम
लगातार चल रही चर्चाओं के बीच जब शरद पवार से उनकी पार्टी के NDA में शामिल होने की संभावना पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि यह सिर्फ अफवाह है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के NDA में जाने जैसी कोई योजना नहीं है और इस तरह की खबरों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
शरद पवार ने कहा कि बिना किसी तथ्य के राजनीतिक अटकलें किसी भी तरह से फैलाना बिलकुल भी उचित नहीं है। उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया है कि उनकी पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति स्वतंत्र रूप से तय करती है और फिलहाल गठबंधन बदलने को लेकर कोई भी फैसला नहीं लिया गया है। उनके इस बयान के बाद बहुत हद तक इन चर्चाओं पर विराम लग गया।
जयंत पाटील और विनोद तावड़े की मुलाकात से बढ़ी चर्चा
इन अटकलों को सबसे अधिक हवा उस वक़्त मिली, जब BJP के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े और NCP के प्रमुख नेता जयंत पाटील के बीच लगभग 50 मिनट तक मुलाकात हुई। इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें सामने आईं कि दोनों नेताओं के बीच भविष्य के राजनीतिक समीकरणों और संसद में सहयोग को लेकर बातचीत हुई। कुछ रिपोर्टों में ऐसा भी दावा किया गया कि NCP केंद्र सरकार के कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर बाहर से समर्थन देने के विकल्प पर विचार कर सकती है।
हालांकि, न तो BJP और न ही NCP की तरफ से इस बैठक को किसी राजनीतिक समझौते से जोड़ते हुए आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई। बावजूद इसके, इस मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया।
पार्टी के अंदर रायशुमारी की भी चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा हो रही कि NCP नेतृत्व अपने विधायकों और सांसदों की राय जानने का पूरा प्रयास कर रहा है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पार्टी यह समझना चाहती है कि विपक्ष में बने रहना अधिक फायदेमंद होगा या सत्ता पक्ष के साथ जाना।
ऐसा भी कहा गया कि कुछ जनप्रतिनिधियों ने यह राय रखी कि विपक्ष में रहने से उनके क्षेत्रों के विकास कार्य प्रभावित होते हैं और सरकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाता। हालांकि, इन दावों की भी किसी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई। बाद में पार्टी नेतृत्व ने ऐसी सभी खबरों को आधारहीन बताते हुए कहा कि संगठन के भीतर इस तरह की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं चल रही है।
देवेंद्र फडणवीस ने भी किया साफ़ मना
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट करते हुए कहा कि फिलहाल NDA में किसी नए राजनीतिक दल को शामिल करने जैसी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि BJP किसी भी दल के विधायक या सांसदों को तोड़ने की राजनीति नहीं कर रही है। उनका कहना था कि BJP का पूरा ध्यान अपने मौजूदा सहयोगी दलों के साथ गठबंधन को मजबूत करने पर है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला कि BJP भी सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी नए राजनीतिक समीकरण की संभावना से इनकार कर रही है।
संसद के आगामी सत्र को लेकर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के आगामी मानसून सत्र और कई महत्वपूर्ण विधेयकों को देखते हुए राजनीतिक गतिविधियां तेज होना स्वाभाविक है।
अब आगामी वक़्त में कई अहम विधेयकों के अलावा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में संसद में हर एक सांसद का महत्व बढ़ जाता है। इसी कारण से विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच संभावित सहयोग और नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। हालांकि, अभी तक किसी भी स्तर पर ऐसा कोई आधिकारिक तौर पर संकेत नहीं मिला है कि NCP NDA में शामिल होने जा रही है।
रोहित पवार और अमोल मिटकरी के बयान भी बने चर्चा का विषय
राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक रोहित पवार ने भी इन अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के NDA में शामिल होने जैसी कोई स्थिति फिलहाल नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह अवश्य कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में बीते कुछ सालों के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। इसलिए राजनीति में भविष्य की संभावनाओं से पूरी तरह मना भी नहीं किया जा सकता।
वहीं, पार्टी के पूर्व विधायक अमोल मिटकरी के कुछ संकेतात्मक बयानों ने भी चर्चाओं को हवा दे दी, हालांकि उन्होंने भी किसी औपचारिक फैसले की पुष्टि नहीं की।
महाराष्ट्र की राजनीति पर टिकी निगाहें
फिलहाल शरद पवार, देवेंद्र फडणवीस और अन्य प्रमुख नेताओं के बयानों के बाद NCP के NDA में शामिल होने की चर्चाओं पर विराम जरूर लग गया है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति लगातार बदलते समीकरणों के लिए जानी जाती रही है।
इसे लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक किसी दल की तरफ से कोई भी आधिकारिक रूप से ऐलान नहीं होता, तब तक इस तरह की खबरों को सिर्फ राजनीतिक अटकलें ही माना जाना चाहिए।
अब आगामी दिनों में संसद के मानसून सत्र, राज्य की राजनीति और विभिन्न दलों के बीच होने वाली बैठकों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। और अगर भविष्य में कोई बड़ा राजनीतिक निर्णय लिया जाता है, तो उसका बड़ा प्रभाव महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।


