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'अपने लोगों के बीच मरना...', घर वापसी पर शेख हसीना का बड़ा ऐलान, इस महीने लौट रही बांग्लादेश
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर में अपने देश लौटने का इरादा दोहराया है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी, जेल, प्रताड़ना और मौत का खतरा होने के बावजूद उनका फैसला नहीं बदलेगा।
Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह दिसंबर में अपने देश लौटने का इरादा रखती हैं। भारत में रह रहीं हसीना ने कहा है कि मौत की सजा का सामना करने का खतरा होने के बावजूद उनका फैसला नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी किस्मत में मौत लिखी है, तो वह अपने ही देश की मिट्टी पर और अपने लोगों के बीच मरना पसंद करेंगी। एसोसिएटेड प्रेस (AP) को ईमेल के जरिए दिए जवाब में हसीना ने कहा कि वह बांग्लादेश जरूर लौटेंगी।
बोलीं- गिरफ्तारी और मौत का खतरा पता है
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्हें जेल भेजे जाने, प्रताड़ित किए जाने या यहां तक कि जान से मारे जाने का भी खतरा है। इसके बावजूद वह अपना फैसला बदलने को तैयार नहीं हैं।
हसीना ने कहा कि वह अपने लोगों को मुश्किलों में देखते हुए बाकी जिंदगी दूर रहकर नहीं बिता सकतीं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह भारत से बांग्लादेश किस रास्ते और किस तरीके से लौटेंगी।
2024 में सत्ता से हटने के बाद भारत आई थीं हसीना
शेख हसीना ने 1996 से 2001 तक एक बार और 2009 से 2024 तक लगातार चार बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के तौर पर काम किया। साल 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े आंदोलन के बाद उनकी सरकार सत्ता से हट गई थी। इसके बाद हसीना ने नई दिल्ली में शरण ली थी।
साल 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों घायल हुए। AP की ओर से संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि उस अशांति के दौरान करीब 1,400 लोगों की जान गई थी।
हालांकि, हसीना ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने ट्रिब्यूनल के फैसले को भी स्वीकार नहीं किया और मुकदमे की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
भारत के सामने प्रत्यर्पण की मांग रख चुका है बांग्लादेश
बांग्लादेश सरकार कई बार भारत से शेख हसीना को वापस सौंपने की मांग कर चुकी है। दूसरी तरफ, भारत ने कहा है कि इस अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है।
ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने अक्टूबर में एक चर्चा के दौरान कहा था कि हसीना की वापसी की समयसीमा बताना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार बार-बार स्पष्ट कर चुकी है कि इस मामले में एक कानूनी और व्यवस्थित प्रक्रिया चल रही है।
अवामी लीग के नेताओं पर कार्रवाई का लगाया आरोप
शेख हसीना की संभावित वापसी ऐसे समय में चर्चा में है, जब उनकी पार्टी अवामी लीग का राजनीतिक भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। पार्टी पर प्रतिबंध लगा हुआ है और उसके कई वरिष्ठ नेता गिरफ्तार हो चुके हैं या देश छोड़कर बाहर रहने को मजबूर हैं।
हसीना ने दावा किया कि अगस्त 2024 के बाद से अवामी लीग के कम से कम 20 हजार सदस्यों की हत्या की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया, प्रताड़ित किया गया या छिपकर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके मुताबिक, राजनीतिक पहचान के कारण पार्टी समर्थकों के घर, कारोबार और आजीविका भी प्रभावित हुए हैं।
हसीना ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में सामान्य राजनीतिक और लोकतांत्रिक माहौल नहीं है और उनकी पार्टी को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
तारिक रहमान की जीत के बाद बदले बांग्लादेश के राजनीतिक हालात
हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने 18 महीने तक अंतरिम प्रशासन का नेतृत्व किया। इसके बाद फरवरी में हुए चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और हसीना के पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी तारिक रहमान को बड़ी जीत मिली। यह चुनाव अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हुआ था और अवामी लीग को इसमें हिस्सा लेने की अनुमति नहीं थी।
कई मानवाधिकार संगठनों, जिनमें ह्यूमन राइट्स वॉच भी शामिल है, ने हाल के महीनों में तारिक रहमान की सरकार पर नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि गिरफ्तारियां विशेष आरोपों के आधार पर की गई हैं।
कट्टरपंथी संगठनों के बढ़ते प्रभाव पर भी जताई चिंता
शेख हसीना ने बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में कट्टरपंथी तत्वों का हौसला बढ़ा है। हसीना के बयान के बाद दिसंबर में उनकी संभावित वापसी और भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।


