शिवसेना स्थापना दिवस पर सियासी शक्ति प्रदर्शन, शिंदे-उद्धव गुट आमने-सामने; 6 बागी सांसदों पर नजर

Shiv Sena News: शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। बागी सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चाएं भी तेज हैं।

Harsh Sharma
Published on: 18 Jun 2026 7:35 PM IST
शिवसेना स्थापना दिवस पर सियासी शक्ति प्रदर्शन, शिंदे-उद्धव गुट आमने-सामने; 6 बागी सांसदों पर नजर
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Shiv Sena News: मुंबई में शुक्रवार को शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस बार पार्टी के दोनों गुट अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं। एक तरफ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का कार्यक्रम गोरेगांव के नेस्को सेंटर में होगा, जबकि दूसरी ओर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) सायन स्थित शन्मुखानंद सभागृह में स्थापना दिवस मनाएगी।

शिंदे गुट के कार्यक्रम में बड़ी भीड़ की तैयारी

गोरेगांव के नेस्को सेंटर में होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सांसद, विधायक, पार्टी पदाधिकारी और राज्यभर से हजारों कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। पार्टी की ओर से बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने का दावा किया जा रहा है। बारिश की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम को एयर कंडीशंड इंडोर हॉल में आयोजित करने की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं और आसपास के इलाकों में पार्टी के पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं।

बागी सांसदों के शामिल होने की चर्चा तेज

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उद्धव ठाकरे गुट से अलग हुए कुछ सांसद शिंदे गुट के कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं के औपचारिक रूप से शिंदे शिवसेना में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

उद्धव ठाकरे भी दिखाएंगे अपनी ताकत

दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) का कार्यक्रम सायन के शन्मुखानंद सभागृह में आयोजित होगा। इस मौके पर उद्धव ठाकरे कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। सूत्रों का कहना है कि अपने भाषण में वे पार्टी छोड़कर गए नेताओं और हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों पर खुलकर अपनी बात रख सकते हैं। साथ ही वे अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि पार्टी का असली आधार आज भी शिवसैनिक और आम जनता हैं।

स्थापना दिवस बना राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच

शिवसेना की स्थापना वर्ष 1966 में हुई थी और इसके बाद पार्टी कई बार विभाजन और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर चुकी है। बावजूद इसके, हर बार पार्टी ने नए रूप में खुद को स्थापित किया है। इस बार का स्थापना दिवस इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों के बीच अपनी पकड़ और राजनीतिक ताकत दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।

सबकी नजरें दोनों कार्यक्रमों पर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार के स्थापना दिवस कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि आने वाले समय की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत भी दे सकते हैं। ऐसे में पूरे महाराष्ट्र की नजरें शिंदे और उद्धव ठाकरे के कार्यक्रमों और उनके संदेशों पर टिकी हुई हैं।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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