लद्दाख में 'हम Gen-Z हैं...' का रौब दिखाना महिला को पड़ा भारी! सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर लगाई लताड़, वीडियो वायरल

Social Media Users Slams Ladakh Gen Z Woman: लद्दाख के करगिल जिले के मिनीमार्ग चेकपॉइंट पर एक महिला पर्यटक का सुरक्षाकर्मियों से बहस और कथित बदसलूकी का वीडियो वायरल हो गया। महिला के 'हम Gen-Z हैं' और टैक्स वाले बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर नाराजगी जताई।

Harsh Srivastava
Published on: 20 Aug 2026 11:22 AM IST (Updated on: 20 Aug 2026 11:22 AM IST)
लद्दाख में हम Gen-Z हैं... का रौब दिखाना महिला को पड़ा भारी! सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर लगाई लताड़, वीडियो वायरल
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Social Media Users Slams Ladakh Gen Z Woman: लद्दाख के शांत और बेहद संवेदनशील वातावरण में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब एक महिला पर्यटक ने सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। करगिल जिले के मिनीमार्ग चेकपॉइंट का यह पूरा वाकया अब इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। रास्ते पर गाड़ियों की आवाजाही को कुछ देर के लिए क्या रोका गया, महिला का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उसने ऑन-ड्यूटी जवानों पर भड़ास निकालना शुरू कर दिया।

'टैक्स' की अकड़ और Gen-Z का रौब

सामने आए वीडियो में महिला पर्यटक जवानों की तरफ उंगली उठाकर चीखती और बहस करती नजर आ रही है। अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उसने कहा, "हम Gen Z हैं और यह सब बकवास सहन नहीं करेंगे।" इतना ही नहीं, उसने जवानों को यह तक सुना दिया कि उनकी तनख्वाह आम जनता द्वारा भरे जाने वाले टैक्स से आती है। हद तो तब हो गई जब उसने मौके पर मौजूद दूसरे मुसाफिरों को भी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने के लिए उकसाया। महिला ने कश्मीर के हालात से तुलना करते हुए आरोप लगाया कि पहले वहां के लोगों को रोका जाता था और अब पर्यटकों को परेशान किया जा रहा है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने लगाई लताड़

सोशल मीडिया पर भी देशवासी महिला पर जमकर बरस रहे हैं। "एक सोशल मीडिया यूजर अनुपमा जामवाल ने लिखा, कुछ पर्यटक संवेदनशील लद्दाख में आर्मी काफिले को रोकते हैं, जबकि यही आर्मी फंसे पर्यटकों को बचाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा देती है. उनका सम्मान करो."

" एक अन्य यूजर गरिमा ने कहा, Gen Z होना संवेदनशील इलाके में तैनात सैनिकों का अपमान करने का लाइसेंस नहीं है. सुरक्षा बल मनोरंजन के लिए बैरियर नहीं लगाते."

"डॉ. डी. पिल्लई नाम के एक यूजर ने कहा, टैक्स देश चलाते हैं, लेकिन अपमान करने का अधिकार नहीं देता. सीमाएं सिर्फ पैसे से नहीं, हिम्मत, अनुशासन और बलिदान से सुरक्षित रहती हैं."

लोगों का कहना है कि संकट के समय यही सेना पर्यटकों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देती है। यूजर्स ने दो टूक शब्दों में कहा कि Gen-Z होना देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात शूरवीरों का अनादर करने का लाइसेंस बिल्कुल नहीं है।

सेना के संयम की हुई तारीफ

पूरे घटनाक्रम के दौरान अपनी सीमा पर मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों ने गजब के धैर्य और संयम का परिचय दिया। महिला के आक्रामक और बदतमीजी भरे रवैये के बावजूद जवानों ने संयम बनाए रखा और स्थिति को शांति से संभालने की कोशिश की। जानकारी के मुताबिक, मिनीमार्ग चेकपॉइंट पर खराब मौसम और सेना की गाड़ियों की मूवमेंट की वजह से रास्ता अस्थायी तौर पर रोका गया था। संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में जवानों की सुरक्षा के लिए ऐसा कदम उठाना एक सामान्य और अनिवार्य प्रक्रिया है।

पूर्व सैन्य अधिकारियों ने दिखाया आईना

वीडियो के वायरल होते ही पूर्व सैन्य अधिकारियों ने महिला के इस बर्ताव पर सख्त नाराजगी जताई। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने कहा कि टैक्स का हवाला देकर सेना के त्याग का अपमान करना बेहद शर्मनाक है, क्योंकि देश के जवान भी ईमानदारी से टैक्स चुकाते हैं। वहीं, लेफ्टिनेंट कर्नल एन. थियागराजन ने साफ किया कि सुरक्षा कारणों से रास्ता रोकना बिल्कुल कानूनी है और सिर्फ टैक्स भरने से किसी को देश के सुरक्षा नियमों को तोड़ने का हक नहीं मिल जाता।

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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