2047 तक भारत विकसित देश नहीं बन पाएगा? सोनम वांगचुक का बड़ा दावा

सोनम वांगचुक ने दावा किया कि मौजूदा हालात में 2047 तक भारत विकसित देश नहीं बन पाएगा। उन्होंने श्रीलंका-बांग्लादेश समेत पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए शांतिपूर्ण क्रांति और नए नेतृत्व की जरूरत बताई।

Alakha Singh
Published on: 16 Aug 2026 3:38 PM IST (Updated on: 16 Aug 2026 3:40 PM IST)
2047 तक भारत विकसित देश नहीं बन पाएगा? सोनम वांगचुक का बड़ा दावा
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Sonam Wangchuk 2047 Developed India: एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भारत के विकास मॉडल और राजनीतिक व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने दावा किया कि अगर देश में मौजूदा हालात जारी रहे तो 2047 तक भारत विकसित देश बनने के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएगा। वांगचुक ने भारत की प्रति व्यक्ति आय का हवाला देते हुए कहा कि कई ऐसे देश, जो कभी भारत से पीछे या बराबरी पर थे, आज उससे आगे निकल चुके हैं।

गुरुवार देर रात सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसी दौरान उन्होंने देश और उसके भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार किया। इसके बाद उन्होंने भारत की राजनीतिक व्यवस्था, भ्रष्टाचार, शिक्षा और नेतृत्व को लेकर अपनी चिंता सामने रखी।

वांगचुक का दावा- पड़ोसी देश भारत से आगे निकल गए

वांगचुक ने कहा कि करीब 50 साल पहले भारत से पीछे या उसके बराबर रहने वाले कई देश आज काफी आगे निकल चुके हैं। उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को अगर 2047 तक दुनिया में सम्मानित और मजबूत देश बनना है तो मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव करने होंगे।


उन्होंने कहा कि भारत को केवल आर्थिक विकास के आंकड़ों पर ध्यान देने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जिसमें आम लोगों के लिए बेहतर अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जवाबदेह शासन सुनिश्चित हो।


'समस्या किसी एक राजनीतिक पार्टी की नहीं'

सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो में राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की शासन व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

उनके मुताबिक अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों के दौरान भी विरोध की आवाजों को दबाने के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए केवल सत्ता बदलने से व्यवस्था की बुनियादी समस्याएं खत्म नहीं होंगी।

2012-13 के आंदोलन का जिक्र, बोले- भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ

वांगचुक ने 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस आंदोलन के बाद देश में राजनीतिक बदलाव देखने को मिला और सरकार भी बदली, लेकिन भ्रष्टाचार और अन्याय पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

उन्होंने दावा किया कि समय के साथ ये समस्याएं खत्म होने के बजाय नए रूप में सामने आई हैं और कई मामलों में पहले से ज्यादा गंभीर हो गई हैं।

'भारत को शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत'

वांगचुक ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए केवल सरकार बदलना पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक राजनीतिक नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया में भी बदलाव जरूरी है।

उन्होंने भारत के लिए 'शांतिपूर्ण क्रांति' की जरूरत बताते हुए कहा कि देश को ऐसा नेतृत्व चुनना होगा जो ईमानदार, निडर, सक्षम और चरित्रवान हो।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र और देश में कम से कम ऐसे एक व्यक्ति की पहचान करें, जो निस्वार्थ भाव से देश के लिए काम कर सकता हो।

वांगचुक ने मांगे 'नए नेतृत्व' के नाम

वांगचुक ने कहा कि वह ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जो देश का नया नक्शा बनाने में योगदान दे सकें। उन्होंने लोगों से ऐसे संभावित नेताओं के नाम सुझाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि देशभर से ऐसे लोगों के नाम मिलना उनके लिए स्वतंत्रता दिवस का तोहफा होगा। उनका कहना है कि ऐसे लोगों से मिलकर वे देश के भविष्य को लेकर आगे की दिशा पर विचार करना चाहते हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था को देश की प्रगति से सीधे जोड़ते हुए कहा कि जब तक भारत की शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक देश का भविष्य भी मजबूत नहीं हो सकता।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नए मंत्री से भी उन्हें बड़े बदलाव की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। उनके मुताबिक भारत के विकास की बुनियाद उसकी शिक्षा व्यवस्था में है और इस क्षेत्र में व्यापक सुधार जरूरी हैं।

NEET विवाद के खिलाफ शुरू किया था अनशन

सोनम वांगचुक ने इससे पहले 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उन्होंने यह कदम NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में उठाया था।

तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद वांगचुक ने 24 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर दिया था।

लद्दाख के मुद्दे पर भी सरकार से टकराव

वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। इससे पहले वह इस मुद्दे को लेकर करीब 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे थे।

उनकी हिरासत का संबंध 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा से जोड़ा गया था। उस हिंसा में चार लोगों की मौत और करीब 90 लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी। सरकार की ओर से वांगचुक पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए गए थे।

26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजा गया था।

वांगचुक का संदेश कितना बड़ा राजनीतिक संकेत?

सोनम वांगचुक का ताजा बयान सिर्फ आर्थिक विकास पर टिप्पणी नहीं है। उन्होंने एक साथ राजनीतिक नेतृत्व, भ्रष्टाचार, शिक्षा व्यवस्था और शासन के मॉडल पर सवाल उठाए हैं। हालांकि 2047 तक भारत के विकसित देश बनने को लेकर उनका दावा एक राजनीतिक-आर्थिक आकलन है, लेकिन उनका संदेश साफ है—वह मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि वांगचुक की 'शांतिपूर्ण क्रांति' की अपील को देश में कितना समर्थन मिलता है और क्या उनकी तलाश किए जा रहे 'नए नेतृत्व' के चेहरे वास्तव में सामने आते हैं।

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alakhsingh2025@hotmail.com

Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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