'अब राजीव को भी मार डालेंगे...', इंदिरा गांधी की हत्या के बाद खौफ में थीं सोनिया गांधी, आत्मकथा में चौंकाने वाले खुलासे

सोनिया गांधी की आत्मकथा में बड़े खुलासे! इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी को खोने का डर और इमरजेंसी पर राजीव-संजय के मतभेद और मोदी सरकार पर तीखे आरोपों का किया जिक्र।

Alakha Singh
Published on: 8 Nov 2026 9:59 AM IST (Updated on: 8 Nov 2026 10:04 AM IST)
अब राजीव को भी मार डालेंगे..., इंदिरा गांधी की हत्या के बाद खौफ में थीं सोनिया गांधी, आत्मकथा में चौंकाने वाले खुलासे
X

Sonia Gandhi Memoir: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली आत्मकथा में गांधी परिवार के भीतर की अनकही कहानियों, इंदिरा गांधी की हत्या, राजीव गांधी की सुरक्षा को लेकर अपने डर और भारतीय राजनीति के सबसे उथल-पुथल भरे दौर का खुलासा किया है। सोनिया ने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके मन में हमेशा एक डर बना रहता था कि अब राजीव गांधी को भी मार दिया जाएगा। उन्होंने लिखा है कि राजनीतिक हिंसा और लगातार मिल रही धमकियों ने उनकी निजी जिंदगी को किस तरह भय और असुरक्षा से भर दिया था।

सोनिया गांधी का यह संस्मरण सिर्फ एक राजनीतिक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस महिला की निजी जिंदगी का दस्तावेज है, जिसने अपनी आंखों के सामने सास इंदिरा गांधी की हत्या देखी, पति राजीव गांधी को खोया और फिर अनिच्छा के बावजूद भारतीय राजनीति की सबसे ताकतवर हस्तियों में अपनी जगह बनाई।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव को लेकर सताता था डर

सोनिया गांधी ने अपनी किताब में बताया है कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री और उनकी सास इंदिरा गांधी की हत्या ने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर दिया था। इंदिरा गांधी को उनके ही सुरक्षा कर्मियों ने गोली मार दी थी। सोनिया ने उनके खून से लथपथ शरीर को अपनी बाहों में थामा था। यह ऐसा सदमा था, जिसने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।

इस घटना के बाद उनके मन में एक ही आशंका लगातार बनी रहती थी कि अगला निशाना राजीव गांधी होंगे। सोनिया के शब्दों में, 'मेरे मन में हमेशा यही विचार रहता था कि अब उनकी भी हत्या कर दी जाएगी।' यह डर महज आशंका नहीं था, बल्कि उस राजनीतिक हिंसा की भयावहता का अहसास था, जिसने गांधी परिवार को लगातार निशाने पर रखा।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद संभाला। सोनिया के लिए यह एक ऐसा दौर था, जब एक तरफ पति देश की सत्ता के केंद्र में थे, तो दूसरी तरफ परिवार पर मंडराता खतरा उनकी निजी जिंदगी को लगातार बेचैन कर रहा था।

कैम्ब्रिज में हुई थी राजीव से पहली मुलाकात, प्यार के लिए छोड़ा इटली

सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण में राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्रेम कहानी का भी जिक्र किया है। 1960 के दशक में कैम्ब्रिज में भाषा की पढ़ाई के दौरान एक ग्रीक रेस्तरां में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। उस समय सोनिया को यह अंदाजा भी नहीं था कि वह भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के वारिस से मिल रही हैं।



सोनिया के मुताबिक, पहली मुलाकात में ही उन्हें राजीव से प्यार हो गया था। उन्होंने राजीव को बेहद आकर्षक, संवेदनशील, प्यार करने वाला और ख्याल रखने वाला इंसान बताया। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव के नाना जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री थे और उनकी मां इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री हैं।

1968 में शादी के बाद सोनिया भारत आ गईं। उन्होंने अपनी भाषा, संस्कृति और जीवनशैली से जुड़े कई बदलावों को स्वीकार किया। वह लिखती हैं कि राजीव के लिए वह सब कुछ करने को तैयार थीं, यहां तक कि अपनी इतालवी पहचान को भी पीछे छोड़ने के लिए।

घर में अलग थीं इंदिरा गांधी, निजी जिंदगी में दिखता था मां का रूप

सोनिया गांधी ने अपनी किताब में इंदिरा गांधी के उस निजी व्यक्तित्व को भी सामने रखा है, जो सार्वजनिक छवि से काफी अलग था। उनके मुताबिक, देश की राजनीति में सख्त और प्रभावशाली नेता के रूप में पहचानी जाने वाली इंदिरा घर में एक सामान्य मां की तरह थीं।

हालांकि, शुरुआत में सोनिया अपनी प्रभावशाली सास से काफी डरती थीं। लेकिन धीरे-धीरे दोनों के रिश्ते सहज हुए। सोनिया बताती हैं कि इंदिरा गांधी ने एक बार उनसे स्वीकार किया था कि प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दिनों में वह भी बेहद डरी हुई थीं।

सोनिया ने यह भी लिखा है कि इंदिरा गांधी को राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के पुराने नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ता था। वह दिन-रात काम करती थीं और लगातार राजनीतिक हमलों के दबाव में रहती थीं। सोनिया के मुताबिक, प्रधानमंत्री की कुर्सी जितनी ताकतवर दिखाई देती है, उसके पीछे उतना ही अकेलापन भी होता है।

इमरजेंसी पर परिवार में दो फाड़, राजीव ने मां के फैसले का किया था विरोध

सोनिया गांधी की आत्मकथा का एक अहम हिस्सा 1975 में लगाई गई इमरजेंसी को लेकर भी है। उन्होंने खुलासा किया है कि आपातकाल लगाने के फैसले पर गांधी परिवार के भीतर ही मतभेद थे।

सोनिया के मुताबिक, राजीव गांधी अपनी मां इंदिरा गांधी के इस फैसले के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने इंदिरा को अगला चुनाव होने तक इंतजार करने की सलाह दी थी। वहीं, इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी इस फैसले के समर्थन में थे। संजय का मानना था कि विपक्ष उनकी मां की सरकार को गिराने की कोशिश कर रहा है और उसे रोकना जरूरी है।

सोनिया ने लिखा है कि संजय गांधी का अपनी मां पर काफी प्रभाव था। परिवार के भीतर इस मुद्दे पर तनाव बढ़ गया था। राजीव ने अपनी मां को समझाने की कोशिश की, लेकिन इंदिरा ने उनकी बात नहीं मानी।



(फोटो: इंदिरा गांधी की पाँचवीं बरसी पर श्रद्धांजलि देते राजीव और सोनिया गांधी)

सोनिया ने अपनी किताब में लिखा है कि अगर संजय गांधी को नियंत्रित रखा जाता, तो आपातकाल के दौरान हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।

उन्होंने स्वीकार किया कि इमरजेंसी लागू करना इंदिरा गांधी की बड़ी राजनीतिक गलती थी। हालांकि, सोनिया का मानना है कि इंदिरा गांधी मूल रूप से लोकतांत्रिक सोच वाली नेता थीं और आपातकाल के दौरान लिए गए फैसलों का बोझ उन्हें भी भीतर से परेशान करता रहा।

2004 में प्रधानमंत्री बनने से किया था इनकार

राजीव गांधी की 1991 में श्रीलंकाई तमिल अलगाववादी संगठन लिट्टे के आत्मघाती हमले में हत्या के बाद सोनिया गांधी ने खुद को राजनीति से दूर रखने की कोशिश की। लेकिन कांग्रेस के कमजोर होते संगठन और पार्टी के भीतर बढ़ते संकट ने उन्हें राजनीति में उतरने के लिए मजबूर किया।

आगे चलकर उन्होंने कांग्रेस की कमान संभाली और 2004 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाई। इसके बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। यह फैसला भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रहा।

सोनिया गांधी कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाली नेताओं में शामिल हैं। 2017 में उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद राहुल गांधी को सौंप दिया था।

मोदी सरकार पर सोनिया का तीखा हमला, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप

अपनी आत्मकथा के साथ दिए गए एक दुर्लभ साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने मौजूदा राजनीतिक हालात और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी तीखा हमला बोला है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को 'सत्तावादी ताकत' बताते हुए आरोप लगाया कि उनकी सरकार देश की मूल प्रकृति को बदलने की कोशिश कर रही है। सोनिया के मुताबिक, बीजेपी ने व्यवस्थित तरीके से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है।

उन्होंने संसद में विपक्ष की भूमिका सीमित किए जाने पर भी नाराजगी जताई। सोनिया का कहना है कि पहले सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत, विचार-विमर्श और परामर्श की परंपरा थी, लेकिन अब विपक्ष की बातों को महत्व नहीं दिया जाता।

सोनिया ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार को राजनीतिक विरोध के कारण निशाना बनाया जा रहा है और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने इसे प्रतिशोध की राजनीति करार दिया।

किताब के प्रकाशन पर भी विवाद, सेंसरशिप की आशंका जताई

सोनिया गांधी की आत्मकथा के प्रकाशन को लेकर भी विवाद सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इस किताब को प्रकाशित करने वाला था, लेकिन पांडुलिपि मिलने के बाद प्रकाशन को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।

सोनिया का दावा है कि प्रकाशक सरकार की आलोचना से असहज था और कुछ बदलावों का सुझाव दिया गया था। सोनिया के मुताबिक, सुझाए गए बदलावों को स्वीकार नहीं करने के बाद प्रकाशन की योजना रुक गई। हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इस दावे का खंडन किया है। प्रकाशक ने कहा कि किताब को प्रकाशित नहीं करने के फैसले को लेखिका द्वारा संपादकीय बदलावों से इनकार करने से जोड़ना परिस्थितियों की सही तस्वीर नहीं है।

सोनिया गांधी ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताई है। उनका मानना है कि राजनीतिक आलोचना को लेकर देश में ऐसा माहौल बन रहा है, जहां असहमति की आवाजों पर दबाव बढ़ रहा है।

कुल मिलाकर, सोनिया गांधी की यह आत्मकथा गांधी परिवार की निजी त्रासदियों, इंदिरा गांधी के राजनीतिक फैसलों, राजीव गांधी की हत्या के भय और मौजूदा भारतीय राजनीति पर उनके नजरिए को एक साथ सामने लाती है। खास बात यह है कि इस बार सोनिया गांधी ने उस निजी दुनिया के दरवाजे खोले हैं, जिसे उन्होंने दशकों तक सार्वजनिक नजरों से दूर रखा।

Alakha Singh
ABOUT THE AUTHOR

Alakha Singh

alakhsingh2025@hotmail.com

Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

Next Story