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श्रीनगर में आधी रात को भीषण अग्निकांड, 80 झोपड़ियां जलकर राख; दो की मौत
Srinagar Bemina Fire Break: श्रीनगर के बाहरी इलाके में भीषण आग का तांडव देखने को मिला है। मंगलवार देर रात लगी आग ने 80 झुग्गी-झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें दो लोगों की दर्दनाक मौत भी हो गई है।
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Srinagar Bemina Fire Break: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के बाहरी इलाके बेमिना में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात भीषण आग लगने से करीब 80 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। इस अग्निकांड में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक खाली पोल्ट्री फार्म और एक मालवाहक वाहन भी आग की चपेट में आ गए। घटना बेमिना के दुर्बल इलाके में रात करीब 12 बजकर 23 मिनट पर हुई। लकड़ी और तिरपाल से बनी अस्थायी झोपड़ियों में आग इतनी तेजी से फैली कि दमकल विभाग को सूचना मिलने तक पूरा इलाका लपटों से घिर चुका था। कई दमकल केंद्रों की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद मलबे की तलाशी में दो जले हुए शव बरामद हुए। मृतकों में एक 16 वर्षीय किशोर भी शामिल है। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है।
लकड़ी और तिरपाल की झोपड़ियों में तेजी से फैली आग
अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बुधवार तड़के दुर्बल क्षेत्र में आग लगने की सूचना मिली थी। यहां बड़ी संख्या में लोग लकड़ी और तिरपाल से बने अस्थायी आवासों में रहते हैं। आग लगने के बाद इन ढांचों के बीच लपटें तेजी से फैल गईं और कुछ ही समय में करीब 80 झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। आग ने आसपास स्थित एक खाली पोल्ट्री फार्म और एक टिपर वाहन को भी नुकसान पहुंचाया। अधिकारियों के मुताबिक, जब तक अग्निशमन विभाग को सूचना मिली, तब तक आग बड़े इलाके में फैल चुकी थी। झोपड़ियों की बनावट और उनमें इस्तेमाल सामग्री के कारण आग पर नियंत्रण पाना चुनौतीपूर्ण हो गया। हालांकि, आग की शुरुआत किस स्थान से हुई और किस वजह से हुई, इसकी जांच अभी बाकी है।
दिल्ली के रहने वाले दो कबाड़ श्रमिकों की मौत
आग बुझाने के बाद बचावकर्मियों ने मलबे की तलाशी ली तो दो लोगों के शव बरामद हुए। मृतकों की पहचान 27 वर्षीय मोहम्मद नूर आलम, पुत्र अब्दुल वहाब, और 16 वर्षीय अल अमीन, पुत्र मोहम्मद रफी, के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले थे और श्रीनगर में कबाड़ एकत्र करने का काम करते थे। नूर आलम दुर्बल इलाके में रह रहा था, जबकि अल अमीन का वर्तमान निवास कुपवाड़ा बताया गया है। फॉरेंसिक जांच की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों शव स्थानीय पुलिस को सौंप दिए गए। हादसे में अन्य लोगों के घायल होने या लापता होने की कोई पुष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है। 
तीन दमकल केंद्रों से पहुंचीं टीमें, कई घंटे चला अभियान
आग लगने की सूचना मिलते ही जेवीसी और रावलपोरा अग्निशमन केंद्रों से दमकल वाहन मौके पर भेजे गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बटमालू स्थित अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मुख्यालय से अतिरिक्त टीमें भी बुलाई गईं। श्रीनगर के डिप्टी डायरेक्टर कमांड डॉ. आकिब हुसैन मीर, मोबिलाइजिंग ऑफिसर एजाज अहमद शाह तथा संबंधित डिवीजनल फायर अधिकारियों की निगरानी में राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। दमकलकर्मियों ने आग को आसपास के दूसरे इलाकों तक फैलने से रोकने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद लपटों पर नियंत्रण पाया जा सका। इसके बाद क्षतिग्रस्त ढांचों में तलाशी अभियान चलाया गया। 
आशियानों के साथ रोजगार पर भी संकट, नुकसान का आकलन बाकी
अग्निकांड से प्रभावित इलाके में बड़ी संख्या में कबाड़ एकत्र करने और उससे जुड़ा काम करने वाले लोग रहते हैं। लगभग 80 अस्थायी ढांचे नष्ट होने से कई परिवारों के सामने रहने की जगह और रोजमर्रा की आजीविका का संकट पैदा हो गया है। झोपड़ियों में रखा घरेलू सामान और कामकाज से जुड़ी सामग्री भी आग की चपेट में आने की आशंका है। हालांकि, कितने परिवार प्रभावित हुए हैं और कुल कितनी संपत्ति का नुकसान हुआ है, इसका आधिकारिक आकलन अभी उपलब्ध नहीं है। प्रशासन को प्रभावित परिवारों की संख्या, उनके नुकसान और तत्काल राहत की जरूरतों का आकलन करना होगा।
आग लगने के कारणों की जांच शुरू
पुलिस और अग्निशमन विभाग आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं। फिलहाल शॉर्ट सर्किट, खाना पकाने के उपकरण या किसी अन्य कारण को जिम्मेदार ठहराने का प्रमाण नहीं मिला है। फॉरेंसिक जांच और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आग की शुरुआत का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। अस्थायी बस्तियों में लकड़ी, तिरपाल और अन्य ज्वलनशील सामग्री के इस्तेमाल से आग तेजी से फैलने का खतरा अधिक होता है। ऐसे इलाकों में संकरे रास्ते और पर्याप्त अग्निशमन सुविधाओं का अभाव भी राहत कार्यों को कठिन बना सकता है, हालांकि बेमिना की इस घटना में इन परिस्थितियों की वास्तविक भूमिका जांच से ही स्पष्ट होगी।
श्रीनगर के इस अग्निकांड में दो लोगों की जान जाने के साथ दर्जनों अस्थायी आश्रय नष्ट हुए हैं। अब प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और आग के वास्तविक कारणों का पता लगाने की चुनौती है। विशेष रूप से अस्थायी बस्तियों में आग से बचाव की व्यवस्था, सुरक्षित विद्युत कनेक्शन और आपातकालीन रास्तों की उपलब्धता की समीक्षा भी आवश्यक होगी।


