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Bengal Politics: बंगाल में होने वाला है ‘बड़ा खेल’! CM शुभेंदु अधिकारी की मीटिंग में TMC सांसद और दो विधायकों के शामिल होने पर बढ़ी हलचल
Bengal Politics: बारासात से टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीकार मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कल्याणी में आयोजित हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक बैठक में शामिल हुईं।
Suvendu Adhikari
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पहले से ही दबाव झेल रही तृणमूल कांगे्रस को अब एक और बड़ा झटका लग सकता है। बारासात से टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीकार मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कल्याणी में आयोजित हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक बैठक में शामिल हुईं। बैठक में टीएमसी सांसद के साथ ही दो विधायकों की मौजूदगी ने बंगाल राजनीति में दलबदल की अटकलों को फिर हवा दे दी है।
TMC सांसद का CM की बैठक में शामिल होना नया सियासी संकेत!
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंगलवार को उत्तर 24 परगना, नादिया और हुगली जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर समीक्षा बैठक कर रहे थे। मुख्यमंत्री की बैठक के दौरान अचानक टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार की एंट्री ने सभी को हैरत में डाल दिया। हालांकि सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह कहा था कि राज्य के विकास से जुड़े मामलों में विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों की भी राय ली जाएगी और उन्हें भी बैठकों में शामिल किया जाएगा। कयास लगाए जा रहे है कि इसी नीति के तहत काकोली दास दस्तीकार को आमंत्रण भेजा गया था। लेकिन राजनीतिक गलियारों में टीएमसी सांसद के सीएम की बैठक में शामिल होने को सामान्य प्रशासनिक भागीदारी से कहीं ज्यादा नये सियासी संकेत माना जा रहा है।
दो टीएमसी विधायक भी मौजूद
बैठक में काकोली घोष के साथ उत्तर 24 परगना के दो टीएमसी विधायक भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक इन विधायकों की मौजूदगी से टीएमसी नेतृत्व की चिंता को बढ़ा दिया है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मिली चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की सुर तेज हो गये हैं। माना जा रहा है कि टीएमसी के कई नेता भाजपा के संपर्क में हैं। काकोली घोष दस्तीदार का हालिया रुख इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने कुछ दिन पहले बारासात संसदीय जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भेजे पत्र में कहा था कि पार्टी को पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्व देना चाहिए, न कि बाहरी और विवादित तत्वों को। सांसद के इस पत्र से उनकी नाराजगी साफ जाहिर हो रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि काकोली दास दस्तीकार की नाराजगी की शुरुआत तब हुई जब उन्हें संसद में टीएमसी चीफ व्हिप पद से हटा दिया गया। उनकी जगह फिर से कल्याण बनर्जी को जिम्मेदारी सौंपी गई। फिलहाल बंगाल राजनीति में इस मुद्दे को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लग हैं। टीएमसी के अंदर बढ़ती असंतुष्टि और बीजेपी की बढ़ती सक्रियता आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकती है।


