'निष्पक्षता अवश्य दिखनी भी चाहिए...' CEC की नियुक्ति पर SC ने की बड़ी टिप्पणी, पूछा- आजकल जज ही जजों को चुनते हैं?

SC Hearing on CEC Appointment: कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह यह नहीं कह रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है, लेकिन यह दिखना भी चाहिए कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष है।

Priya Singh Bisen
Published on: 30 July 2026 8:15 PM IST (Updated on: 30 July 2026 8:15 PM IST)
SC Hearing on CEC Appointment
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SC Hearing on CEC Appointment

SC Hearing on CEC Appointment: भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर देश के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं और नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए।

अदालत ने कहा कि चुनाव आयुक्त ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो पूरी तरह स्वतंत्र हो। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह यह नहीं कह रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है, लेकिन यह दिखना भी चाहिए कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष है।

‘क्या आजकल जज ही जजों को चुनते हैं?’ कोर्ट ने जताई हैरानी

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कार्यपालिका और विधायिका ही जनता के प्रति सीधे जवाबदेह होती हैं।

इसी दौरान जब यह तर्क सामने आया कि जज ही जजों को चुनते हैं, तब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या आज के वक़्त में वास्तव में जज ही जजों को चुनते हैं। अदालत ने इस टिप्पणी पर हैरानी जताई और नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर चर्चा की।

चुनाव आयुक्त पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहिए

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयुक्त ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो पूरी तरह स्वतंत्र हो। अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में चुनाव आयुक्तों का चयन करने वाली समिति में दो सदस्य सरकार की तरफ से होते हैं और केवल एक सदस्य विपक्ष की ओर से होता है।

बेंच ने कहा कि अब यह दो बनाम एक की स्थिति है। दो सदस्य प्रधानमंत्री की तरफ से हैं और एक सदस्य विपक्ष की तरफ से। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या समिति में निष्पक्षता दिखाई भी देनी चाहिए। अदालत ने साफ कहा कि वह यह नहीं कह रही है कि निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है, लेकिन यह दिखना भी चाहिए कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष है।

डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का भी किया जिक्र

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने अपनी मृत्यु से लगभग एक वर्ष पहले कहा था कि भारत में लोकतंत्र विफल हो गया है और इसका एक वीडियो भी मौजूद है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब वर्ष 1950 में संविधान लागू हुआ था, तब भी उन्होंने संविधान को पक्षपाती बताया था।

बेंच ने कहा कि डॉ. आंबेडकर को बाद में इस बात का अफसोस भी था और उन्होंने अपनी पहले की बातों से अलग राय भी व्यक्त की थी। अदालत ने कहा कि उन्होंने लोगों से जैसी उम्मीद की थी, वैसा नहीं हुआ। इसी संदर्भ में कोर्ट ने पूरे देश में कानून बनाने वालों और मंत्रियों के आपराधिक मामलों का भी जिक्र किया और पूछा कि ऐसे कितने राज्यों में मंत्री हैं जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं।

सरकार ने बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग की

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने पर जोर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या इस मामले की सुनवाई पांच जजों की संविधान पीठ को सौंपी जानी चाहिए।

अदालत ने कहा कि पहले यह तय किया जाएगा कि रिट याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजा जाए या नहीं, उसके बाद आगे की सुनवाई होगी।

साल 2023 के कानून को क्यों दी गई है चुनौती

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत नियुक्ति करने वाली समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।

इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कहा गया है कि इस नई व्यवस्था में भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे एक स्वतंत्र चुनाव आयोग की संवैधानिक आवश्यकता प्रभावित होती है।

2023 के SC के फैसले से जुड़ा है पूरा मामला

बता दे, यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट की वर्ष 2023 की संविधान पीठ के उस फैसले से जुड़ा है, जो अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में दिया गया था। उस निर्णय में सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया था कि जब तक संसद इस विषय पर नया कानून नहीं बनाती, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति के ज़रिये की जाएगी।

अब संसद द्वारा बनाए गए 2023 के कानून में भारत के मुख्य न्यायाधीश को इस समिति से बाहर रखा गया है। इसी बदलाव को SC में चुनौती दी गई है। फिलहाल सर्वोच्च अदालत ने यह तय करने पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है कि क्या इस मामले की सुनवाई पांच जजों की बड़ी बेंच करेगी। इसके बाद ही इस महत्वपूर्ण संवैधानिक विवाद पर आगे की सुनवाई का रास्ता साफ होगा।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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