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सुप्रीम कोर्ट में हाई वोल्टेज ड्रामा! याचिकाकर्ता ने जजों को दिया आदेश, फिर मच गया हंगामा
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के हंगामे से तनावपूर्ण माहौल बन गया। जानिए पूरा मामला, कोर्ट ने क्यों नहीं की अवमानना की कार्रवाई।
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति बन गई, जब अपने मामले की पैरवी खुद कर रहे एक याचिकाकर्ता ने अदालत में ऐसा व्यवहार किया, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुनवाई के दौरान उसने न्यायाधीशों को संबोधित करने का तरीका भी विवाद का कारण बन गया। इसके बाद अदालत में मौजूद लोगों और कोर्ट स्टाफ को स्थिति संभालनी पड़ी।
याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने रखी अपनी मांग
जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता की पहचान प्रबल प्रताप के रूप में हुई है। वह पेशे से वकील हैं और अपने ही मामले में स्वयं अदालत में पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत से लखनऊ के एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देने की मांग की। इसी दौरान उन्होंने न्यायाधीशों को ऐसे शब्दों से संबोधित किया, जिन्हें अदालत ने अनुचित माना। इतना ही नहीं, उन्होंने कथित तौर पर अदालत को निर्देश देने जैसी भाषा का भी इस्तेमाल किया, जिससे माहौल और गंभीर हो गया।
जजों ने जताई आपत्ति
याचिकाकर्ता की बात सुनने के बाद पीठ में शामिल न्यायाधीशों ने उनसे सवाल किया कि क्या वह अदालत को आदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद बहस और तीखी हो गई। आरोप है कि याचिकाकर्ता ने अदालत के वरिष्ठ न्यायाधीश के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, उन्होंने अपने हाथ में रखे कुछ कागजात भी हवा में उछाल दिए, जिससे अदालत की कार्यवाही कुछ समय के लिए प्रभावित हुई।
सुरक्षाकर्मियों ने संभाला मामला
स्थिति बिगड़ते देख सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों और कोर्ट स्टाफ ने तुरंत हस्तक्षेप किया। याचिकाकर्ता को शांत कराने की कोशिश की गई, लेकिन जब स्थिति सामान्य नहीं हुई तो उन्हें कोर्टरूम से बाहर ले जाया गया। बताया गया कि कुछ समय तक उन्हें अदालत परिसर के एक कार्यालय में रखा गया। इस घटना के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या उनके खिलाफ अदालत की अवमानना या कोई अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने नहीं की दंडात्मक कार्रवाई
हालांकि, पूरे घटनाक्रम के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं करने का फैसला किया। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में कोई अलग दंडात्मक कदम उठाने का प्रस्ताव नहीं रखती। सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा की और अंत में याचिकाकर्ता की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया।
अदालत ने जताई सहानुभूति
सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता काफी परेशान दिखाई दे रहा था और संभव है कि उसका व्यवहार मानसिक तनाव या निराशा का परिणाम हो। अदालत ने कहा कि उसे याचिकाकर्ता के प्रति सहानुभूति है और इसी कारण उसके व्यवहार के बावजूद कोई अतिरिक्त कार्रवाई नहीं की गई।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने से जुड़ा था। याचिकाकर्ता चाहता था कि अदालत पुलिस को एक मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दे। हालांकि, निचली अदालत ने इस आवेदन को निजी शिकायत के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया था। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी और कहा कि याचिकाकर्ता के पास अन्य कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां भी अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इस तरह सुनवाई के दौरान हुए हंगामे के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम बरतते हुए केवल मामले का कानूनी पक्ष देखा और याचिका खारिज कर दी, जबकि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अलग दंडात्मक कार्रवाई नहीं की।


