NTA Controversy: NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सच्चाई सामने आनी चाहिए

NTA Controversy: NEET पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने NTA से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि सभी सुधार लागू होने के बाद भी लीक कैसे हुआ।

Akriti Pandey
Published on: 29 May 2026 3:56 PM IST
Supreme Court on NEET
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Supreme Court on NEET

NTA Controversy: नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और परीक्षा सुधार प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने साफ कहा कि यदि विशेषज्ञ समिति की सभी सिफारिशें लागू कर दी गई थीं, तो फिर पेपर लीक जैसी गंभीर घटना कैसे हुई? कोर्ट ने इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि असली सच्चाई सामने आनी चाहिए।

सुप्रीम Court ने विशेषज्ञ समिति से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष और इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन से सीधे सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि जब समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी की जा रही थी, तब इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? अदालत ने कहा कि अगर हाई पावर कमेटी (HPC) की सिफारिशों के बावजूद यह घटना हुई है, तो या तो सिफारिशों में ही कमी थी या फिर उनकी निगरानी सही तरीके से नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

राधाकृष्णन बोले- अधिकांश सिफारिशें लागू हो चुकी हैं

डॉ. राधाकृष्णन ने कोर्ट को बताया कि समिति ने कुल 60 महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, जिनमें से अधिकांश लागू किए जा चुके हैं। कुछ सिफारिशों पर अभी भी काम जारी है। उन्होंने कहा कि NEET UG 2025 परीक्षा काफी हद तक संतोषजनक तरीके से आयोजित हुई थी। कुछ केंद्रों पर बिजली कटौती जैसी समस्याएं जरूर आईं, लेकिन बाकी व्यवस्थाएं सफल रहीं। उन्होंने यह भी बताया कि समिति ने NTA को संस्थागत रूप से मजबूत करने की सिफारिश की थी।

री-NEET परीक्षा के लिए किए गए अतिरिक्त इंतजाम

राधाकृष्णन ने कहा कि पेपर में हेराफेरी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कई नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अगले महीने होने वाली री-NEET परीक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है और सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। इस दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा कि क्या समिति नियमित रूप से बैठक कर रही है? इस पर राधाकृष्णन ने कहा कि निगरानी प्रक्रिया लगातार जारी है।

UPSC का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कभी इस तरह की समस्या सामने नहीं आई। अदालत ने कहा कि जब तक वास्तविक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार युवाओं से जुड़े इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए नई सुरक्षा व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं और इसकी निगरानी उच्चतम स्तर पर की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा विस्तृत हलफनामा

सुनवाई के अंत में जस्टिस नरसिम्हा ने आदेश दिया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। इसमें यह बताया जाए कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने, विशेषज्ञ कर्मचारियों की नियुक्ति और परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार लाने की स्पष्ट योजना पेश की जाए। अदालत ने जोर देकर कहा कि क्षमता किसी व्यक्ति में नहीं, बल्कि संस्था में होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह हलफनामा 2 जुलाई से पहले दाखिल किया जाए। सुनवाई के दौरान जब सरकार की ओर से कहा गया कि प्रधानमंत्री खुद इस मामले की निगरानी कर रहे हैं, तो कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि ऐसी स्थिति है, तो यह बेहद दुखद है।

Akriti Pandey

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Akriti Pandey is a Education & job Desk Content Writer at Newstrack.com.

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