संविधान की 10वीं अनुसूची पर SC बेहद सख्त, Kapil Sibal की याचिका पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Anti Defection Law: सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल रोधी कानून और संविधान की 10वीं अनुसूची में पार्टी विलय प्रावधान को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कपिल सिब्बल की याचिका पर अहम सुनवाई हुई।

Priya Singh Bisen
Published on: 27 July 2026 4:24 PM IST
Kapil Sibal
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Anti Defection Law: देश में दलबदल रोधी कानून (Anti-Defection Law) और संविधान (Constitution) की 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) के तहत पार्टी विलय (Party Merger) के प्रावधान को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अहम सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता और निर्दलीय राज्यसभा (Rajya Sabha) सदस्य कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार (Central Government) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने माना कि इस मामले में कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर संसद (Parliament) को भी विचार करने की जरूरत है।

कपिल सिब्बल ने खड़ा किया बड़ा संवैधानिक सवाल

कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने अपनी याचिका में संविधान (Constitution) की 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) की उस व्याख्या पर पुनर्विचार करने की मांग की है, जिसके तहत विधायक और सांसद किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय का दावा करके दलबदल रोधी कानून (Anti-Defection Law) के अंतर्गत अयोग्यता से बच सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा (Justice P. S. Narasimha) और जस्टिस आलोक अराधे (Justice Alok Aradhe) की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार (Central Government) को नोटिस जारी किया और कहा कि यह ऐसा मामला है, जिसमें कई पहलुओं पर संसद (Parliament) को विचार करना चाहिए।

राजनीति पर पड़ने वाले प्रभाव का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने अदालत से कहा कि इस प्रावधान का देश की राजनीति पर व्यापक असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के कारण अल्पमत में मौजूद कोई दल बहुमत में पहुंच सकता है, जबकि बहुमत वाला दल अल्पमत में बदल सकता है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल भी है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए बनाई गई 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) संसद (Parliament) द्वारा पारित की गई थी और इसमें यदि किसी तरह की व्यवस्था या बदलाव की जरूरत है तो उसके लिए उचित तंत्र तैयार करना भी संसद की जिम्मेदारी है।

गोवा के मामले के साथ जोड़ी गई याचिका

कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने अदालत को यह भी बताया कि गोवा (Goa) में विधायकों के दल बदल से जुड़ा एक समान मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में लंबित है। इसके बाद अदालत ने उनकी याचिका को गोवा (Goa) से जुड़े मामले के साथ संबद्ध करने का फैसला किया, ताकि दोनों मामलों पर एक साथ विचार किया जा सके।

जल्द सुनवाई की थी मांग

कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने यह याचिका व्यक्तिगत रूप से दायर की है। उन्होंने 22 जुलाई को इस मामले में जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा था कि यह केवल कानून की व्याख्या का विषय नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या संसद (Parliament) की संरचना इस तरह बदली जा सकती है, जैसा वर्तमान समय में देखने को मिल रहा है। उन्होंने विशेष रूप से 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) के अनुच्छेद 4 (Article 4) की व्याख्या पर स्पष्टता मांगी है।

यह याचिका ऐसे वक़्त में आई है, जब आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) (Shiv Sena-Uddhav Balasaheb Thackeray) के कुछ सांसद 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) के विलय संबंधी प्रावधानों का सहारा लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party-BJP) और अन्य राजनीतिक दलों में शामिल हुए हैं।

ऐसे में अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की सुनवाई और केंद्र सरकार (Central Government) के जवाब पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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