"मैडम, नागरिकों का सम्मान करिए!" रेप पीड़िता के मामले में SC में CJI का फूटा गुस्सा, सरकार को लगाई फटकार

Supreme Court India: यह मामला है रेप पीड़िता 15 साल की एक बच्ची का जिसपर उसके 31 सप्ताह की गर्भावस्था को लेकर हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई।

Priya Singh Bisen
Published on: 30 April 2026 12:52 PM IST (Updated on: 30 April 2026 12:53 PM IST)
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Supreme Court India (PHOTO: SOCIAL MEDIA)

Supreme Court India: इस वक़्त सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसे मामले पर सुनवाई कर रही है, जिस पर CJI सूर्यकांत पूरी तरह से भावुक हो उठे। इस संवेदनशील मामले में चीफ जस्टिस ने कोर्ट में गहरी भावुकता व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़िता ने जो दर्द झेला है, उसकी भरपाई किसी भी प्रकार से संभव नहीं है। यह मामला है रेप पीड़िता 15 साल की एक बच्ची का जिसपर उसके 31 सप्ताह की गर्भावस्था को लेकर हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई।

सरकार ने कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती

दरअसल, सरकार ने कोर्ट के उस पहले आदेश को चुनौती देते हुए क्यूरेटिव याचिका दायर की थी, जिसमें गर्भपात कराने की अनुमति दी गई थी। इस पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से बेहद सख्त लहजे में कहा, "नागरिकों का सम्मान करें मैडम। इस आदेश को चुनौती देने का अधिकार सिर्फ पीड़िता या उसके परिवार को ही है, सरकार को नहीं।"

कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है यह मामला सिर्फ मेडिकल या कानूनी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से स्वतंत्रता और सम्मान से भी जुड़ा हुआ है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी इस दौरान कहा कि अदालत व्यक्तिगत पसंद का सम्मान करती है और सरकार को भी ऐसा ही करना चाहिए।

मामले पर सरकार की ओर से ऐश्वर्या भाटी ने पेश की ये दलील

सरकार की तरफ से पेश ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि 31 सप्ताह की इस अवस्था में गर्भपात कराना किसी भी प्रकार से संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि यह याचिका अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टेज पर गर्भपात से मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरे हो सकते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि जन्म लेने वाले बच्चे में गंभीर शारीरिक विकृतियां हो सकती हैं और नाबालिग मां को पूरे जीवन स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

मामले पर कोर्ट का स्पष्ट रुख

हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को लेकर नाराजगी जताई और यह साफ़ किया कि ऐसे मामलों में पीड़िता की इच्छा और उसकी मानसिक स्थिति को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि एक रेप पीड़िता के लिए इस तरह की स्थिति बहुत ही पीड़ादायक होती है और उसके अधिकारों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।

यह मामला महिलाओं के अपने शरीर पर अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से यह साफ़ संकेत मिल रहा है कि न्यायपालिका ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़ित के पक्ष और उसकी इच्छा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

Priya Singh Bisen

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