अब नहीं चलेगा ये 'कानूनी खेल'... धर्म बदलते ही 'खत्म' हो जाएंगे ये बड़े अधिकार! SC/ST एक्ट पर SC का बड़ा फैसला

Supreme Court SC/ST Act verdict: अदालत ने अपने फैसले में 1950 के राष्ट्रपति आदेश का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म को मानने वाले ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं।

Priya Singh Bisen
Published on: 25 March 2026 5:50 AM IST
Supreme Court SC/ST Act verdict
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Supreme Court SC/ST Act verdict (PHOTO: SOCIAL MEDIA)

Supreme Court SC/ST Act verdict: देश में धर्मांतरण और आरक्षण से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने यह साफ़ कर दिया है कि अगर कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और उससे जुड़े कानूनी संरक्षण, विशेष रूप से SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम का फायदा किसी भी रूप में नहीं मिलेगा।

आपको बता दे, यह फैसला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी (या संबंधित पीठ) की बेंच द्वारा सुनाया गया, जिसमें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के पुराने फैसले को बरकरार रखा गया। अदालत ने अपने फैसले में 1950 के राष्ट्रपति आदेश का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म को मानने वाले ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं।

क्या है ये पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से संबंधित था जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और लंबे वक़्त से पादरी के रूप में काम कर रहा था। उसने कुछ लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कराया था और खुद को अनुसूचित जाति का सदस्य बताते हुए कानूनी सुरक्षा की मांग की थी।

हालांकि, आरोपियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मामले से जुड़े व्यक्ति धर्मांतरण कर चुका है, इसलिए उसे SC/ST कानून के अंतर्गत संरक्षण नहीं मिल सकता। बता दे मामला पहले हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं होती, इसलिए ऐसे व्यक्ति को SC का लाभ नहीं दिया जा सकता।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म से अलग होकर किसी अन्य धर्म को अपनाता है और उसी के मुताबिक जीवन जी रहा है, तो वह अनुसूचित जाति के दायरे में नहीं आएगा। कोर्ट ने यह भी साफ़ कर दिया है कि यह मायने नहीं रखता कि व्यक्ति ने बाद में अपने मूल धर्म में वापसी की या नहीं, बल्कि घटना के वक़्त उसकी धार्मिक पहचान क्या थी, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अदालत ने कहा कि SC/ST एक्ट का मकसद उन समुदायों को संरक्षण प्रदान करना है, जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करते रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति ऐसे धर्म में चला जाता है, जहां जातिगत भेदभाव की अवधारणा नहीं है, तो उसे इस कानून के अंतर्गत सुरक्षा देना उचित नहीं माना जाएगा।

1950 के राष्ट्रपति आदेश का महत्व

कोर्ट ने अपने फैसले में 1950 के राष्ट्रपति आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें अनुसूचित जातियों की परिभाषा तय की गई थी। इस आदेश के मुताबिक, सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायी ही SC श्रेणी में शामिल हो सकते हैं। बाद में सिख और बौद्ध धर्म को इसमें जोड़ा गया, लेकिन अन्य धर्मों को इसमें शामिल नहीं किया गया।

फैसले के व्यापक प्रभाव

इसे लेकर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में धर्मांतरण और आरक्षण से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इससे यह साफ़ हो गया है कि धर्म परिवर्तन का सीधा प्रभाव सामाजिक और कानूनी अधिकारों पर पड़ सकता है।

यह फैसला उन मामलों में भी महत्वपूर्ण साबित होगा, जहां धर्मांतरण के बाद लोग आरक्षण या विशेष कानूनों के अंतर्गत बड़ा फायदा लेने का पूरा प्रयास करते हैं। अब अदालत के इस फैसले के सामने आने के बाद ऐसे मामलों में स्पष्ट रूप से दिशा-निर्देश मिलेंगे।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस निर्णय के बाद देश में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना बनी हुई है। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे संविधान और कानून के अनुरूप ठहराते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ वर्ग इसे सामाजिक न्याय के नजरिए से देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ कानूनी नहीं माना जा सकता, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक विमर्श का भी अहम भाग है। अब आगामी वक़्त में इस पर और स्पष्टता और बहस देखने को मिल सकती है।

बता दे, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला धर्मांतरण और आरक्षण के बेहद पेचीदा मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टिकोण पेश करता है। इससे यह साफ़ हो गया है कि धार्मिक पहचान और सामाजिक श्रेणी के बीच गहरा जुड़ाव है, और इसमें परिवर्तन का सीधा प्रभाव कानूनी अधिकारों पर पड़ता है।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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