सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत पर रोक, जानें कांग्रेस नेता के केस में अब आगे क्या

Pawan Khera Anticipatory Bail: कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 15 April 2026 3:08 PM IST
Pawan Khera Anticipatory Bail
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Pawan Khera Anticipatory Bail: कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर आश्चर्य भी जताया है। यह मामला असम सरकार द्वारा दायर याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसमें हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच और अहम टिप्पणी

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल शरचचंद्र चांदूरकर की बेंच ने की। अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए पवन खेड़ा को नोटिस भी जारी किया है और उनसे तीन हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर पवन खेड़ा असम के क्षेत्राधिकार वाली अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं तो सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश का उस प्रक्रिया पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

असम सरकार की दलील और फोरम शॉपिंग का आरोप

इस मामले में असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में दलील दी कि पवन खेड़ा ने अपनी याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया कि तेलंगाना हाई कोर्ट का क्षेत्राधिकार उनके मामले में कैसे बनता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले में अधिकतम दस साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन इस तथ्य पर तेलंगाना हाई कोर्ट ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि यह मामला फोरम शॉपिंग का है, यानी एक व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार अलग अलग अदालतों में जाकर राहत मांग रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।

तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि यदि ऐसा होने लगे तो कोई भी व्यक्ति देशभर में कहीं भी संपत्ति खरीदकर मनचाही अदालत से अग्रिम जमानत मांग सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पवन खेड़ा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे असम क्यों नहीं जा सकते।

पत्नी के पते को लेकर हुई बहस

सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण पहलू भी सामने आया। जस्टिस जेके माहेश्वरी ने यह टिप्पणी की कि सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से बताया गया था कि उनकी पत्नी हैदराबाद में रहती हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने जवाब देते हुए कहा कि पत्नी के आधार कार्ड के अनुसार उनका पता दिल्ली का है, इसलिए इस आधार पर क्षेत्राधिकार तय करना उचित नहीं है।

हाई कोर्ट के आदेश पर SC की हैरानी

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर स्पष्ट रूप से आश्चर्य जताया। जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कहा कि वे इस आदेश को देखकर हैरान हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पवन खेड़ा की ओर से अग्रिम जमानत को आगे बढ़ाने के लिए भी याचिका दायर की गई थी।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने पहले पवन खेड़ा को एक हफ्ते के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी और यह राहत शर्तों के आधार पर दी गई थी। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि उन्हें आगे की राहत के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट जाना होगा।

तेलंगाना हाई कोर्ट का पुराना आदेश

गौरतलब हो कि 10 अप्रैल 2026 को तेलंगाना हाई कोर्ट की सिंगल बेंच, जिसमें जस्टिस के सुजाना कलसिकम शामिल थे, ने पवन खेड़ा को एक हफ्ते की अंतरिम राहत दी थी। इस आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए असम सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया गया था।

हाई कोर्ट ने कहा था कि पवन खेड़ा को उचित राहत के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट जाना चाहिए। इसी आदेश के बाद असम सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

असम में दर्ज मामले और आरोप

पवन खेड़ा के खिलाफ असम में मानहानि, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में शिकायत दर्ज है। यह शिकायत असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की ओर से दर्ज कराई गई है।

आरोप है कि पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रिंकी भुइयां सरमा पर कई देशों के पासपोर्ट और विदेशों में संपत्ति होने को लेकर टिप्पणी की थी।

पुलिस ने क्या की कार्रवाई?

दरअसल इस मामले में 7 अप्रैल को असम पुलिस पवन खेड़ा की तलाश में हैदराबाद भी पहुंची थी। इससे पहले उनके दिल्ली स्थित आवास पर भी पुलिस के पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद मामला और अधिक कानूनी प्रक्रिया में प्रवेश कर गया है और आने वाले तीन हफ्तों में पवन खेड़ा को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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