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CJP प्रदर्शन के बाद रविवार को भी खुलेगा सुप्रीम कोर्ट! इस मामले पर होगी स्पेशल सुनवाई
SC Hearing on CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर रविवार को भी सुप्रीम कोर्ट खुलेगा। 11 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशन बंद करने और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने से जुड़ी दो अवमानना याचिकाओं पर विशेष बेंच सुनवाई करेगी।
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SC Hearing on CJP Protest: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रविवार, 11 अक्टूबर को विशेष सुनवाई होगी। अदालत की अवमानना (Contempt of Court) से जुड़ी याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया और दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशन बंद कर दिए गए। इसी दिन विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने के मामले में दायर एक दूसरी अवमानना याचिका पर भी सुनवाई होनी है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो स्टेशन बंद करने से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष बेंच 11 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे बैठेगी। दोनों याचिकाओं में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
45 मेट्रो स्टेशन बंद करने पर क्या है आरोप?
अदालत की अवमानना से जुड़ी पहली याचिका वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दायर की है। इसमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की चेयरपर्सन डी. थारा को पक्ष बनाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की और उनका पालन नहीं किया।
याचिका के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान निर्देश दिया था कि सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) को पूरी तरह बंद नहीं किया जाए। इसके बावजूद शनिवार को दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशन बंद रहे। याचिकाकर्ता ने इसे अदालत के निर्देशों का उल्लंघन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला बताया है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच सुनवाई करेगी। अदालत में यह मामला ऐसे समय पहुंचा है, जब दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की आवाजाही पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
विपक्षी नेताओं की हिरासत पर भी सुनवाई
11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना से जुड़ी एक दूसरी याचिका पर भी सुनवाई होगी। इसमें जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और अन्य राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत (Preventive Detention) में लिए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में हिरासत में लिए गए नेताओं में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के शामिल होने का भी उल्लेख है।
यह याचिका तृणमूल कांग्रेस की सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने दायर की है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के मौलिक अधिकार (Fundamental Right to Peaceful Protest) को दबाने के लिए एहतियातन हिरासत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
प्रदर्शनकारियों और नेताओं को हिरासत में लेने पर सवाल
मेनका गुरुस्वामी ने अपनी याचिका में उन पुलिस कार्रवाइयों पर सवाल उठाए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों को सड़कों से और विपक्षी नेताओं को उनके घरों से हिरासत में लिए जाने का आरोप है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को रोकने के लिए इस तरह की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। याचिका में खास तौर पर उन नेताओं की हिरासत का मुद्दा उठाया गया है, जिनमें चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए हैं।
इस तरह रविवार को सुप्रीम कोर्ट में सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े दो अलग-अलग मामलों पर सुनवाई होगी। पहले मामले में मेट्रो के 45 स्टेशन बंद किए जाने को अदालत के निर्देशों से जोड़कर चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी याचिका में विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लेने की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। दोनों मामलों में याचिकाकर्ताओं ने अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इन आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख सुनवाई के दौरान सामने आएगा।


