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पुलिस हिरासत में TMC कार्यकर्ता की मौत...पत्नी से मिले सुवेंदु अधिकारी, नौकरी और ₹10 लाख का ऐलान
TMC Worker Custodial Death: पुलिस हिरासत में मृत टीएमसी कार्यकर्ता की पत्नी से सुवेंदु अधिकारी ने मुलाकात की। उन्होंने पत्नी को नौकरी और 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का वादा किया। मामले में मजिस्ट्रियल जांच भी होगी।
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TMC Worker Custodial Death: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पुलिस हिरासत (Police Custody) में टीएमसी (TMC) कार्यकर्ता की मौत को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने उत्तर 24 परगना (North 24 Parganas) के हालीशहर (Halisahar) में पुलिस हिरासत में जान गंवाने वाले टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मृतक की पत्नी को नौकरी और 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (Ex-Gratia) देने का भरोसा दिया।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को पीड़ित परिवार से मिलने के दौरान भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। मृतक की पत्नी जेनी शर्मा केओट (Jenny Sharma Keot), जो कांचरापाड़ा नगरपालिका की पूर्व टीएमसी पार्षद भी रह चुकी हैं, ने ममता बनर्जी से मिलने से इनकार कर दिया था।
‘पुलिस हिरासत में मौत हुई, लापरवाही जरूर हुई’
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह तथ्य है कि व्यक्ति की मौत पुलिस हिरासत में हुई है। हालांकि, मौत की असली वजह क्या थी और क्या उसके साथ किसी तरह की प्रताड़ना हुई थी, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) आने के बाद ही साफ हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस की लापरवाही जरूर हुई है, क्योंकि व्यक्ति की मौत उनकी हिरासत में हुई। अधिकारी ने बताया कि स्थानीय थाने के प्रभारी निरीक्षक को पद से हटाया जा रहा है और जांच अधिकारी को निलंबित किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में मजिस्ट्रियल जांच (Magisterial Inquiry) अनिवार्य है। उत्तर 24 परगना के जिलाधिकारी इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच करेंगे।
पत्नी को नौकरी और 10 लाख रुपये की मदद
सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि मृतक की पत्नी को अटेंडेंट (Attendant) की नौकरी देने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही परिवार को 10 लाख रुपये का चेक भी दिया गया।
मृतक की पत्नी जेनी शर्मा केओट ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया है और उन्हें प्रशासन पर पूरा विश्वास है। उन्होंने बताया कि उनके दो बच्चे हैं और मुख्यमंत्री ने उन्हें नौकरी के साथ 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का वादा किया है।
हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि वह इस मदद को स्वीकार करेंगी, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अपने पति की मौत की उचित जांच और उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई है, जिनके कारण उनके पति की जान गई।
1 अगस्त की शिकायत के बाद हुई थी गिरफ्तारी
यह पूरा मामला शनिवार को उस समय राजनीतिक मुद्दा बन गया था, जब हालीशहर के एक स्थानीय टीएमसी नेता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी एक महिला की ओर से 1 अगस्त को की गई शिकायत के आधार पर हुई थी।
मौत के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई और टीएमसी तथा बीजेपी (BJP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया।
ममता बनर्जी की कार पर जूते फेंकने का आरोप
रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब मृतक के परिवार से मिलने पहुंचीं तो उनकी कार को लेकर भारी विरोध हुआ। गुस्साई भीड़ ने उनकी कार पर जूते और कीचड़ फेंके। हालांकि, ममता बनर्जी कार से बाहर नहीं निकलीं, इसलिए उन्हें कोई चोट नहीं आई। इसके बाद टीएमसी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी पर हमला करने की साजिश थी।
अभिषेक बनर्जी ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने सोमवार को रविवार की घटना को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रविवार को जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह सरकार के समर्थन से हुआ।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार के पूरे समर्थन के बिना कोई भी ऐसा करने की हिम्मत नहीं कर सकता था। उन्होंने दावा किया कि वाहन से रिकॉर्ड किए गए फुटेज में साफ दिखाई देता है कि कार पर ईंटें, पत्थर, कीचड़ और दूसरी चीजें लगातार फेंकी गईं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में जो कुछ हुआ है, उसे देखने के बाद उन्हें विश्वास है कि बंगाल की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।
अभिषेक बनर्जी ने आगे आरोप लगाया कि रविवार की घटना प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के समर्थन के बिना नहीं हो सकती थी। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी को दिल्ली का गुलाम बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने सिर्फ दिल्ली के आदेशों को लागू किया है।
ममता के समर्थन में TMC ने निकाली रैलियां
रविवार की घटना के विरोध में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी धड़े ने सोमवार को कोलकाता (Kolkata) समेत राज्य के कई हिस्सों में रैलियां निकालीं। इन रैलियों के जरिए रविवार को हुए हमले का विरोध किया गया। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। बताया गया कि इन रैलियों का आयोजन बिना अनुमति के किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
‘कुछ नहीं हुआ, पत्थर नहीं फेंके गए’
दूसरी ओर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की कार पर पथराव या हमला किए जाने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कुछ नहीं हुआ और किसी ने पत्थर नहीं फेंके।
अधिकारी ने इसे टीएमसी शासन के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का गुस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी ने पुलिस को जानकारी देकर दौरा किया होता तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की होती।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी जेड प्लस (Z+) श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त हैं और इसलिए उन्हें अपने कार्यक्रम की जानकारी पहले से पुलिस को देनी चाहिए थी। अधिकारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी गतिविधियों की जानकारी पहले से पुलिस को नहीं दी थी, इसलिए राज्य के गृह मंत्री या डीजीपी को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
TMC ने कहा- कैमरे में बीजेपी के चेहरे दिखे
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष (Kunal Ghosh) ने सुवेंदु अधिकारी के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री ने तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश की है।
कुणाल घोष ने कहा कि सभी जानते हैं कि हमले के पीछे कौन लोग थे। उनके मुताबिक, कैमरे में दिखाई देने वाले लोग इलाके में बीजेपी से जुड़े जाने-पहचाने चेहरे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से तथ्यों को दबाने की कोशिश नहीं करने की अपील की।
सुवेंदु ने पुराने मुख्यमंत्रियों पर भी साधा निशाना
सुवेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले को लेकर अपने पूर्ववर्तियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो मुख्यमंत्रियों ने कभी किसी विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ता की हत्या के बाद उसके परिवार से मिलने की कोशिश नहीं की। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी शासन के 15 वर्षों के दौरान कम से कम 315 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हुई।
अधिकारी ने कहा कि राज्य में राजनीतिक हिंसा (Political Violence) के कारण कई लोगों की जान गई है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य (Buddhadeb Bhattacharjee) या ममता बनर्जी ने कभी विपक्षी राजनीतिक दल के किसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने के लिए कैबिनेट मंत्री और राज्य के डीजीपी (DGP) के साथ दौरा नहीं किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए जो काम उनके पूर्ववर्ती नहीं कर सके, उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर वही करने की कोशिश की है।
इस पूरे मामले में एक तरफ पुलिस हिरासत में टीएमसी कार्यकर्ता की मौत की जांच और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी की कार पर हुए विरोध को लेकर टीएमसी और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। अब नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रियल जांच के नतीजों पर है।


