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Swami Vivekananda Nirvana Day: PM मोदी, राजनाथ सिंह व अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, बताया प्रेरणास्रोत
स्वामी विवेकानंद के निर्वाण दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह ने श्रद्धांजलि दी। जानिए शिकागो धर्म संसद 1893 में ऐतिहासिक भाषण और भारतीय युवाओं पर उनके प्रभाव की पूरी जानकारी।
Swami Vivekananda Nirvana Day: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शनिवार को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि (निर्वाण दिवस) पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बौद्धिक कौशल और प्रेरणादायक विचार आज भी देश के लाखों युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय चेतना को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विवेकानंद के विचार विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करते रहेंगे।
स्वामी विवेकानंद ने सनातन मूल्यों को वैश्विक पहचान दिलाई: रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके विचार आज भी आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का संदेश राष्ट्र निर्माण, नैतिक विकास और सेवा भावना पर आधारित था। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने वेदांत और भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व मंच पर पुनः स्थापित किया। उन्होंने युवाओं में चरित्र निर्माण और देशभक्ति की भावना को प्रबल किया तथा रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर सेवा और अध्यात्म को संगठित रूप दिया।
स्वामी विवेकानंद, जिनका जन्म 1863 में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था, आधुनिक भारत के महान दार्शनिक, संत और विचारक थे। वे श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्यों में से एक थे। उन्होंने वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद, शिकागो 1893 (World’s Parliament of Religions, Chicago 1893) में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ उनके प्रसिद्ध संबोधन “Sisters and Brothers of America” ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
भारत लौटने के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो आज भी आध्यात्मिक शिक्षा, सेवा और मानव कल्याण के कार्यों के लिए जाना जाता है।
स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, शिक्षा, नैतिकता और सेवा का संदेश दिया, जो आज भी वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने 4 जुलाई 1902 को बेलूर मठ में महाप्रयाण किया, उस समय उनकी आयु मात्र 39 वर्ष थी।


