‘मैं लव डोज देने का एक्सपर्ट...’, जेल से बाहर आने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज की धमकी, पोस्ट में क्या?

Swatantra Bhardwaj Threat: जेल से बाहर आने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने उमर खालिद और शरजील इमाम को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा बयान दिया। जानिए पूरा मामला।

Aditya Kumar Verma
Published on: 22 Oct 2026 2:50 PM IST
Swatantra Bhardwaj Threat
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Image Source- Social Media

Swatantra Bhardwaj Threat: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान मारपीट के मामले में जेल जा चुके यूट्यूबर और खुद को हिंदूवादी एक्टिविस्ट बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने लंबी चुप्पी के बाद सोशल मीडिया पर वापसी की है। 15 सितंबर को जेल से बाहर आने के बाद सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए भारद्वाज ने अपने पहले पोस्ट में जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को लेकर विवादित और धमकी भरा बयान दिया।

स्वतंत्र भारद्वाज का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में नियमित जमानत पर बाहर हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 6 अक्टूबर को उन्हें नियमित जमानत दी थी। इससे पहले 15 सितंबर को उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मिली थी।

उमर और शरजील पर क्या कहा?

दरभंगा, बिहार के रहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने जेल से बाहर आने के बाद गुरुवार को एक्स पर अपना पहला पोस्ट किया। इसमें उसने उन लोगों को निशाना बनाया जो उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग कर रहे हैं।

भारद्वाज ने लिखा, “जो लोग कहते हैं उमर खालिद और शरजील इमाम को रिहा करो, मैं उन्हें एक बात कहना चाहता हूं, क्यों आप भूल जाते हो कि स्वतंत्र भारद्वाज बाहर है और मैं इस देश विरोधी के इलाज को उत्सुक हूं। इसलिए उन्हें वहीं रहने दो जहां हैं, वरना आप जानते हो कि मैं लव डोज देने का एक्सपर्ट हूं।”

इस पोस्ट में भारद्वाज ने उमर खालिद और शरजील इमाम को लेकर बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया है। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुआ था विवाद

स्वतंत्र भारद्वाज का नाम कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर हुए विवाद के बाद सामने आया था। वहां एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ उसकी कथित तौर पर झगड़ा और मारपीट हुई थी। अदालत में यह मामला बाद में गंभीर कानूनी विवाद में बदल गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, भारद्वाज को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब भारद्वाज का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उसने कथित तौर पर यह दावा किया कि राजनीतिक प्रभाव की वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्षी दलों की ओर से उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। सितंबर की शुरुआत में हुए घटनाक्रम के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

पहले अंतरिम जमानत, फिर मिली नियमित बेल

स्वतंत्र भारद्वाज को 15 सितंबर को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मिली थी। अदालत ने उस समय साफ किया था कि नियमित जमानत पर फैसला लेने से पहले इस अवधि में उसके व्यवहार और आचरण को देखा जाएगा।

इसके बाद 6 अक्टूबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत ने उसे नियमित जमानत दे दी। अदालत ने इससे पहले लगाई गई शर्तों और उनके आचरण को ध्यान में रखते हुए नियमित जमानत पर फैसला किया।

सोशल मीडिया पोस्ट पर लगी थी रोक

अंतरिम जमानत देते समय अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज पर कई शर्तें लगाई थीं। इनमें सबसे अहम शर्त यह थी कि वह इस मामले, अपने बचाव या शिकायतकर्ता के परिवार को लेकर सोशल मीडिया या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर कोई टिप्पणी, पोस्ट या चर्चा नहीं करेंगे।

अदालत ने उसे शिकायतकर्ता, उनकी बेटी या किसी भी गवाह से संपर्क करने से भी रोका था। साथ ही मामले से जुड़े सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने अंतरिम जमानत देते समय यह भी कहा था कि जमानत अदालत के भरोसे की अभिव्यक्ति है, इसे सार्वजनिक रूप से दिखाने वाली किसी ट्रॉफी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत ने जमानत के बाद खुलेआम जश्न मनाने से भी चेताया था।

फिर सोशल मीडिया पर सक्रिय हुआ भारद्वाज

नियमित जमानत मिलने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है। उमर खालिद और शरजील इमाम को लेकर किया गया उसका पहला पोस्ट इसी सिलसिले में सामने आया है।

इस पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा ने एक बार फिर उसके पुराने विवाद को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, अदालत में चल रहे मामले का अंतिम फैसला सोशल मीडिया पर दिए गए बयानों से नहीं बल्कि अदालत के सामने पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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