74 लाख नाम हटाने पर बवाल! TVK-DMK का वॉकआउट, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

Tamil Nadu Voter List: तमिलनाडु में SSR बैठक से TVK और DMK ने वॉकआउट किया। दोनों दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और वोटर लिस्ट से 74 लाख से ज्यादा नाम हटाने पर सवाल उठाए।

Shalni Kumari
Published on: 23 Oct 2026 5:33 PM IST
Gyanesh Kumar Resignation
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 TVK DMK Walkout

Tamil Nadu Voter List: मतदाता सूची (Voter List) में बदलाव को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार को स्पेशल समरी रिवीजन (Special Summary Revision-SSR) पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब सत्तारूढ़ टीवीके गठबंधन और विपक्षी डीएमके ने बैठक से वॉकआउट (Walkout) कर दिया। दोनों दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर सवाल खड़े करते हुए निर्वाचन आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति जताई।

TVK ने उठाए SSR प्रक्रिया पर सवाल

तमिलनाडु के मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी टीवीके (TVK) शुरुआत से ही स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) की प्रक्रिया का विरोध करती रही है। उन्होंने दावा किया कि अगर यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई होती, तो उनकी पार्टी 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में 234 में से 160 से अधिक सीटें जीत सकती थी।

निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के संशोधन के दौरान बड़े पैमाने पर गलतियां हुई हैं। उनके मुताबिक, इन कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता (Impartiality) बनाए रखने की मांग भी की।

डीएमके ने 74 लाख से ज्यादा नाम हटाने पर मांगा जवाब

विपक्षी दल डीएमके (DMK) ने भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग को घेरा। पार्टी की कानूनी शाखा के सचिव आई. परंथमन ने सवाल किया कि तमिलनाडु में 74 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में आयोग ने क्या कार्रवाई की है।

परंथमन के अनुसार, बैठक के दौरान पार्टी ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। इसके बाद डीएमके के प्रतिनिधियों ने बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया। इस तरह मतदाता सूची के संशोधन पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक राजनीतिक विरोध और इस्तीफे की मांग के बीच विवादित हो गई।

यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है, जब इसी महीने दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर भी विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसे समाप्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की थी।

17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR की प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (States and Union Territories) में मतदाता सूची का स्पेशल समरी रिवीजन कराने का फैसला किया है। इसके लिए 1 जनवरी को पात्रता की तारीख (Qualifying Date) निर्धारित किया गया है।

आयोग के अनुसार, SSR और SIR दोनों का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त रखना है, लेकिन इनकी प्रक्रिया अलग-अलग है। स्पेशल समरी रिवीजन के तहत पहले से मौजूद मतदाता सूची में जरूरी सुधार, नाम जोड़ने, हटाने या विवरण अपडेट करने जैसे बदलाव किए जाते हैं। इसके विपरीत, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में मतदाता सूची की अधिक व्यापक जांच की जाती है और उसे नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

SSR को आम तौर पर मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करने की प्रक्रिया माना जाता है। तमिलनाडु में इसी प्रक्रिया को लेकर TVK और DMK के विरोध के बाद अब निर्वाचन आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

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