तरुण तेजपाल 2013 गोवा यौन शोषण मामले में दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला

Tarun Tejpal Convicted: 2013 गोवा यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को दोषी करार देते हुए ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट दिया। कोर्ट अब सजा की अवधि पर सुनवाई कर रही है।

Alakha Singh
Published on: 6 Aug 2026 12:21 PM IST (Updated on: 6 Aug 2026 12:23 PM IST)
तरुण तेजपाल 2013 गोवा यौन शोषण मामले में दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला
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Tarun Tejpal Convicted: वर्ष 2013 के चर्चित गोवा यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने गुरुवार को पूर्व तहलका (Tehelka) के प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को दोषी करार देते हुए ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने 2021 में सत्र अदालत द्वारा दिए गए बरी किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत तेजपाल को दोषी ठहराया।

न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय रद्द किया जाता है। इसके बाद अदालत ने बचाव पक्ष से सजा की अवधि (Quantum of Punishment) पर अपनी दलीलें रखने को कहा।

किन धाराओं में दोषी ठहराया गया

हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी करार दिया। अब अदालत यह तय करेगी कि उन्हें कितनी सजा दी जाएगी।

अदालत से लगाई नरमी की गुहार

दोषसिद्धि के बाद तरुण तेजपाल ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा, "मैं 62 वर्ष का हूं। मेरा मानना है कि मैं भी एक पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है। कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें।"

उनके वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने भी अदालत से कहा कि कथित घटना को 13 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और इस दौरान तेजपाल के खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए दोषसिद्धि पर आठ सप्ताह की रोक लगाने का भी अनुरोध किया।

गोवा सरकार ने किया विरोध

गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नरमी की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत से कहा कि आरोपी पीड़िता के लिए पिता समान था, लेकिन उसने विश्वास का दुरुपयोग किया।

उन्होंने दलील दी कि अदालत को समाज के लिए स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि "जब कोई लड़की 'ना' कहती है, तो उसका मतलब 'ना' ही होता है।"

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तहलका की एक जूनियर महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।

शिकायत सामने आने के बाद तेजपाल ने तत्कालीन प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को ईमेल भेजकर अपने व्यवहार को "शर्मनाक निर्णय" बताते हुए माफी मांगी थी। महिला ने विशाखा दिशानिर्देशों के तहत आंतरिक जांच की मांग की, जबकि गोवा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया।

30 नवंबर 2013 को तरुण तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिली।

2021 में मिली थी बरी, अब हाईकोर्ट ने पलटा फैसला

मई 2021 में गोवा की सत्र अदालत ने यह कहते हुए तेजपाल को बरी कर दिया था कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त पुष्टिकरण (Corroborative Evidence) नहीं है और उन्हें संदेह का लाभ दिया जाता है।

इसके खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सरकार का तर्क था कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के घटना के बाद के व्यवहार पर अधिक जोर दिया और उपलब्ध साक्ष्यों, विशेषकर तेजपाल के माफीनामे वाले ईमेल, का समुचित मूल्यांकन नहीं किया।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया और तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया। अब अदालत सजा की अवधि पर अंतिम निर्णय सुनाएगी।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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