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4 दिन में टाटा समूह को ₹1.53 लाख करोड़ का झटका, आखिर क्यों दबाव में आए शेयर?
Tata Group Market Value: टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग और पुनर्गठन को लेकर जारी खींचतान के बीच 14 दिनों में टाटा समूह की 26 सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब ₹1.53 लाख करोड़ घट गया। कई कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
Tata Group Market Value
Tata Group Market Value: टाटा संस की प्रस्तावित शेयर बाजार सूचीबद्धता, एन. चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल और समूह की होल्डिंग कंपनी के पुनर्गठन को लेकर जारी खींचतान का असर टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर दिखाई देने लगा है। 17 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 के बीच समूह की 26 सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब ₹1.53 लाख करोड़ घट गया। 17 सितंबर को इन कंपनियों का कुल बाजार मूल्य लगभग ₹25.73 लाख करोड़ था, जो 1 अक्टूबर को घटकर करीब ₹24.20 लाख करोड़ रह गया। इस तरह महज 14 दिनों में समूह की कंपनियों के बाजार मूल्य में लगभग छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, बाजार पूंजीकरण में आई ₹1.53 लाख करोड़ की कमी का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों के खातों से इतनी ही नकदी वास्तव में निकल गई। यह सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कीमतों में गिरावट के कारण उनके संयुक्त बाजार मूल्य में आई कमी है। किसी निवेशक का वास्तविक लाभ या नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कौन-सा शेयर किस कीमत पर खरीदा और उसे बेचा है या अभी अपने पास रखा हुआ है।
इसके अलावा, इस पूरी गिरावट को केवल टाटा समूह के आंतरिक विवाद से जोड़ना भी जल्दबाजी होगी। सितंबर के दौरान भारतीय शेयर बाजार में भी व्यापक दबाव रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में महीने के दौरान करीब छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी जैसे कारकों ने भी बाजार को प्रभावित किया।
टाटा संस की सूचीबद्धता पर टाटा ट्रस्ट्स और बोर्ड के अलग-अलग रुख
टाटा समूह में अतिरिक्त अनिश्चितता की प्रमुख वजह टाटा संस को लेकर जारी मतभेद हैं। 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन को पांच वर्ष का नया कार्यकाल देने का फैसला किया गया। रॉयटर्स के अनुसार, बोर्ड ने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ने का भी समर्थन किया। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इन मुद्दों पर अलग रुख अपनाया।
टाटा ट्रस्ट्स की आधिकारिक जानकारी में भी स्पष्ट किया गया कि ट्रस्ट्स टाटा संस की सूचीबद्धता के पक्ष में नहीं हैं। उनकी ओर से सूचीबद्धता के अलावा उपलब्ध अन्य विकल्पों का भी परीक्षण करने की बात कही गई है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में दोनों पक्षों के अलग-अलग रुख के कारण इस मामले का महत्व और बढ़ गया है।
टाटा संस के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी आया सामने
इसके बाद 28 सितंबर को टाटा ट्रस्ट्स की ओर से एक महत्वपूर्ण पुनर्गठन प्रस्ताव सामने आया। इसमें Tata Electronics Systems Solutions Private Limited और Tata Consulting Engineers का टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव है।
टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि इस पुनर्गठन के बाद टाटा संस न तो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) रहेगा और न ही कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी की मौजूदा श्रेणी में आएगा। ऐसा होने पर टाटा संस की नियामकीय स्थिति बदल सकती है और अनिवार्य सूचीबद्धता का मुद्दा भी नए रूप में सामने आ सकता है। हालांकि, यह अभी केवल प्रस्ताव है, कोई लागू हो चुका फैसला नहीं। इसे संबंधित बोर्ड और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
टाटा ट्रस्ट्स के भीतर भी सामने आए मतभेद
पुनर्गठन के प्रस्ताव ने टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चल रहे मतभेदों को भी सार्वजनिक कर दिया है। टाटा ट्रस्ट्स के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने सवाल उठाया है कि दोनों कंपनियों के टाटा संस में विलय का प्रस्ताव ट्रस्ट्स के बोर्ड में चर्चा और मंजूरी के बिना कैसे आगे बढ़ाया गया।
रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों ने इस प्रक्रिया और समूह के वाणिज्यिक मामलों में हस्तक्षेप को लेकर आपत्तियां जताई हैं। इस तरह विवाद अब केवल टाटा संस की सूचीबद्धता तक सीमित नहीं रह गया है। अब सवाल यह भी है कि समूह की सबसे महत्वपूर्ण होल्डिंग कंपनी की भविष्य की संरचना कैसी होगी और उससे जुड़े बड़े फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए जाएंगे।
टाटा समूह के कई शेयरों में दर्ज हुई गिरावट
टाटा संस से जुड़ी अनिश्चितता का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया है। पुनर्गठन प्रस्ताव सामने आने के बाद टाटा समूह की कई कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा केमिकल्स जैसे शेयर दबाव में रहे।
1 अक्टूबर के कारोबार में तेजस नेटवर्क्स के शेयर करीब 4.42 प्रतिशत, टाटा स्टील के 3.01 प्रतिशत, टाटा कैपिटल के 2.62 प्रतिशत और टाटा पावर के 2.51 प्रतिशत नीचे रहे। इंडियन होटल्स, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, ट्रेंट और टाइटन समेत समूह की कई अन्य कंपनियों के शेयर भी उस दिन कमजोर रहे।
हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट को केवल टाटा संस विवाद का नतीजा नहीं माना जा सकता। प्रत्येक कंपनी की आय, कारोबारी परिस्थितियां, मूल्यांकन और संबंधित क्षेत्र के हालात भी उसके शेयर भाव को प्रभावित करते हैं।
RBI के वर्गीकरण से शुरू हुआ था सूचीबद्धता का मुद्दा
बाजार की सबसे अधिक नजर अब टाटा संस की सूचीबद्धता पर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वर्ष 2022 में टाटा संस को ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी की श्रेणी में रखा था। इसके बाद कंपनी के लिए सूचीबद्धता का मुद्दा सामने आया।
टाटा संस ने इस श्रेणी से बाहर निकलने के लिए नियामकीय रास्ते तलाशे। अब उसके सामने एक ओर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया है, तो दूसरी ओर कारोबारी पुनर्गठन के जरिए अपनी संरचना बदलने का प्रस्ताव भी है। यही वजह है कि टाटा संस में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी रखने वाली कुछ सूचीबद्ध टाटा कंपनियों के शेयर इस घटनाक्रम के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील दिखाई दे रहे हैं।
निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भी नजर रखने की सलाह
एक्सिस डायरेक्ट के फंडामेंटल रिसर्च के डिप्टी हेड उत्तम कुमार श्रीमल के मुताबिक, टाटा समूह के शेयरों में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। उनका कहना है कि निवेशकों के लिए समूह स्तर पर हो रहे घटनाक्रम के साथ संबंधित कंपनी की कमाई, कारोबारी बुनियाद, नकदी प्रवाह और मूल्यांकन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
फिलहाल टाटा समूह की कंपनियों के बाजार मूल्य में आई ₹1.53 लाख करोड़ की कमी यह दिखाती है कि टाटा संस को लेकर अनिश्चितता ऐसे समय सामने आई है, जब पूरा शेयर बाजार पहले से दबाव में है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि टाटा संस की सूचीबद्धता और प्रस्तावित पुनर्गठन में से कौन-सा रास्ता आगे बढ़ता है और इस मामले पर नियामकों का क्या रुख रहता है।


