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Tata Trusts और बोर्ड में मतभेद की वजह क्या है? चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर Tata Sons में फिर टकराव
Tata Sons Board ने N Chandrasekaran को 5 साल और Executive Chairman बनाने का फैसला किया है। Tata Trusts ने इसे अवैध बताया। जानें IPO और लिस्टिंग का पूरा विवाद।
मुंबई: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में चेयरमैन पद को लेकर एक बार फिर टकराव खुलकर सामने आ गया है। कंपनी के बोर्ड ने गुरुवार, 17 सितंबर को मौजूदा एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को एक और पांच साल का कार्यकाल देने का फैसला किया। हालांकि, Tata Trusts ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए इसे “अवैध” बताया है।
करीब तीन घंटे चली बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन को उनके मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव बहुमत से पारित किया गया। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होना है।
Tata Sons ने बयान में कहा कि बोर्ड के अनुरोध पर चंद्रशेखरन ने अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार किया। अगस्त में उन्होंने बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करना चाहते।
कंपनी के मुताबिक, बोर्ड की बैठक में Nomination & Remuneration Committee ने भी चंद्रशेखरन के योगदान और टाटा समूह के व्यापक हितों को देखते हुए उन्हें दोबारा नियुक्त करने की सिफारिश की। इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दी।
Tata Trusts ने जताई आपत्ति
बोर्ड के फैसले के बाद Tata Trusts और Tata Sons के बीच मतभेद और गहरा गया है। Tata Trusts के चेयरमैन नोएल एन टाटा ने बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। Trusts की ओर से इसे “illegal position” बताया गया और कहा गया कि चयन समिति को Tata Sons के Articles of Association के मुताबिक अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।
Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में बोर्ड का बहुमत से लिया गया फैसला आगे कंपनी के भीतर बड़े संस्थागत टकराव का रूप ले सकता है। हालांकि, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को अंतिम रूप देने के लिए कंपनी की AGM की मंजूरी भी जरूरी होगी।
Tata Sons की होगी लिस्टिंग?
गुरुवार की बैठक में बोर्ड ने Tata Sons को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में भी कदम आगे बढ़ाने का फैसला किया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब Reserve Bank of India (RBI) ने हाल ही में Tata Sons की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें कंपनी ने अपनी NBFC/CIC के रूप में रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग की थी।
RBI ने 2022 में Tata Sons को ‘Upper Layer’ NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था। इस वर्गीकरण के तहत कंपनी को निर्धारित समयसीमा में शेयर बाजार में लिस्ट होना था। Tata Sons ने इस दायित्व से बाहर निकलने के लिए अपना कर्ज चुकाने समेत कई कदम उठाए थे और रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की कोशिश की थी।
RBI के फैसले के बाद अब Tata Sons के लिए संभावित IPO और शेयर बाजार में लिस्टिंग का रास्ता फिर चर्चा में आ गया है।
IPO से पहले क्यों जरूरी है नेतृत्व की निरंतरता?
बोर्ड से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संभावित लिस्टिंग के मद्देनजर कंपनी में नेतृत्व की निरंतरता निवेशकों को भरोसा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसी बड़े IPO से पहले निवेशक कंपनी के मैनेजमेंट और भविष्य की रणनीति में स्थिरता को अहम मानते हैं।
इसी वजह से चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को Tata Sons की संभावित लिस्टिंग से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
चंद्रशेखरन की जगह तलाशने की प्रक्रिया पर भी असर
चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश के लिए Tata Trusts से जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी। इसमें Tata Steel के CEO TV Narendran, Tata Sons के ग्रुप CFO Saurabh Agrawal और NSE के CEO Ashish Chauhan जैसे नामों की चर्चा थी।
अब बोर्ड द्वारा चंद्रशेखरन के पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दिए जाने के बाद यह प्रक्रिया फिलहाल रुक सकती है या समाप्त हो सकती है।
चंद्रशेखरन फरवरी 2017 से Tata Sons का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने रतन टाटा के बाद कंपनी की कमान संभाली थी। 2022 में उन्हें दूसरी बार पांच साल के कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से दोबारा नियुक्त किया गया था।
Tata Trusts और बोर्ड में मतभेद की वजह क्या है?
चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का समर्थन Tata Trusts की ओर से पहले किया गया था, लेकिन 2026 में यह मामला अटक गया। नोएल टाटा की ओर से Tata Sons के अनलिस्टेड रहने समेत कुछ शर्तों को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। समूह की कुछ कंपनियों, खासकर Air India और Tata Digital से जुड़े प्रदर्शन और घाटे को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
अब बोर्ड द्वारा चंद्रशेखरन के पक्ष में मतदान और Tata Trusts की असहमति ने पुराने मतभेदों को फिर सामने ला दिया है।
Tata Sons की संभावित वैल्यूएशन कितनी?
Tata Sons में Shapoorji Pallonji Group की करीब 18 फीसदी हिस्सेदारी है। यह समूह लंबे समय से Tata Sons की लिस्टिंग के पक्ष में रहा है, क्योंकि इससे उसकी हिस्सेदारी का मूल्य सामने आ सकता है और कर्ज से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
संभावित लिस्टिंग की स्थिति में Tata Sons का IPO भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक कंपनी की कुल वैल्यूएशन करीब 20 लाख करोड़ रुपये तक आंकी जा सकती है। हालांकि, अंतिम वैल्यूएशन और IPO का आकार कंपनी के औपचारिक फैसलों तथा बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल Tata Sons में दो बड़े फैसले: 1-चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और कंपनी की संभावित लिस्टिंग, 2- AGM की मंजूरी के अगले चरण में जाएंगे। वहीं Tata Trusts की आपत्ति ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।


