ट्रस्ट की बैठक से पहले अयोध्या का माहौल गरमाया! दो धड़ों में बंटे सदस्य

Ram Mandir Trust Meeting : अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक से पहले माहौल गरमा गया है। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट सदस्य दो धड़ों में बंटे दिखाई दे रहे हैं।

Newstrack Network
Published on: 6 July 2026 12:25 PM IST (Updated on: 6 July 2026 1:38 PM IST)
ram mandir trust meeting todayram mandir trust meeting today
X

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की की आज दोपहर बाद होने वाली चर्चित बैठक से पहले मंदिर परिसर का माहौल गरमा गया है। सभी की नजरें ट्रस्ट के महा सचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे पर हैं। खबर है कि इसी को लेकर ट्रस्ट के सदस्य दो धड़ों में बंट गए हैं। दोनों पदाधिकारियों से इस्तीफे को लेकर अयोध्या में अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। कहा जा रहा है कि ट्रस्ट का एक धड़ा चाहता है कि दोनों को पड़ पर बनाए रखा जाए। उनका इस्तीफा न लिया जाए। वहीं दूसरे धड़े के लोगों का कहना है कि राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले मे भले ही चंपत राय का डायरेक्ट रोल न हो लेकिन वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते। उनका इस्तीफा लिया जाना जरूरी है। जब लोग उनसे गड़बड़ी की शिकायत कर रहे थे तो क्यों मामले को नजरअंदाज किया? जिम्मेदारी तो ट्रस्ट के सभी सदस्यों की थी, लेकिन उनके पास ऐसी जानकारी आई थी तो सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कि गई?

सबसे खास बात यह भी है दोंनो धड़ों की अलग-अलग राय होने के बावजूद ज्यादातर लोग उन्हें निर्दोष भी मां रहे हैं। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि चंपत राय स्वयं यह काम नहीं कर सकते, लेकिन वह जिम्मेदारी से भी नहीं बच सकते।

ट्रस्ट के दो-तिहाई सदस्यों की बहुमत से होगा फैसला:

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे पर फैसला साधारण बहुमत से नहीं, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो-तिहाई (2/3) सदस्यों के बहुमत से लिया जाएगा। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी स्थायी ट्रस्टी के इस्तीफे को स्वीकार करने या उससे जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है। जानकारी के अनुसार, अयोध्या में आयोजित ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र द्वारा दिए गए इस्तीफों पर विस्तार से चर्चा होगी। बैठक में पहले दोनों नेताओं के इस्तीफे के कारणों और परिस्थितियों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट के सदस्य तय करेंगे कि इस्तीफे स्वीकार किए जाएं या उनसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया जाए। यदि बैठक में मौजूद ट्रस्ट सदस्यों में से दो-तिहाई सदस्य इस्तीफा स्वीकार करने के पक्ष में मतदान करते हैं, तभी इस्तीफे प्रभावी माने जाएंगे। यदि आवश्यक बहुमत नहीं मिलता, तो इस्तीफे स्वीकार नहीं होंगे और दोनों अपने वर्तमान पदों पर बने रह सकते हैं। यानी इस्तीफा देने वाले दोनों पदाधिकारियों के हटने को लेकर असमंजस की स्थिति है।

कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि शर्मिंदगी में क्यों हैं?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने हाल ही में मंदिर के चढ़ावे में हुए गबन (चोरी) के विवाद को लेकर एक खुला पत्र जारी किया है। उन्होंने कहा कि वह इस घाटना से दुखी हैं और शर्मिंदगी में हैं। उन्होंने इस घटना को "महापाप" और अत्यंत शर्मनाक बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्वामी गोविंद देव गिरि का कहना है कि वे ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष जरूर हैं, लेकिन चढ़ावा गिनने या दैनिक दान संभालने की प्रक्रिया से उनका सीधा संबंध नहीं था। यह जिम्मेदारी स्थानीय ट्रस्टियों की थी।

8 गिरफ्तार आरोपियों की संपत्ति जांच रही SIT

सूत्रों के अनुसार, SIT यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कथित गबन से अर्जित धन को कहां और किस रूप में निवेश किया। जांच एजेंसियां आरोपियों के बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों, जमीन, मकानों, व्यावसायिक निवेश और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं आरोपियों ने अपने या परिजनों के नाम पर संपत्ति खरीदकर अवैध धन को छिपाने का प्रयास तो नहीं किया।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack Desknewstracknetwork@gmail.com

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story