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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: यूपी की राधा-बबीता कैसे पहुंचीं जांच के घेरे में? दिल्ली पुलिस ने खोले राज
Tiger Shroff Firing Case: दिल्ली पुलिस ने राधा, बबीता, कुणाल और सुमित को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, अमृतसर से पिस्टल और 20 कारतूस मुंबई पहुंचाए गए। जानें राधा-बबीता कौन हैं और फायरिंग केस में उनकी कथित भूमिका क्या है।
Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई में हुई फायरिंग के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हथियारों की कथित सप्लाई चेन से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें उत्तर प्रदेश की रहने वाली दो महिलाएं राधा और बबीता भी शामिल हैं। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने अमृतसर से लाए गए हथियार मुंबई पहुंचाए और उन्हें एक नाबालिग के हवाले किया, जिसके बाद ये हथियार कथित तौर पर हमलावरों तक पहुंचे। इस पूरे नेटवर्क में कुणाल, सुमित और विदेश में मौजूद बताए जा रहे गैंगस्टर अनिल पंडित की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
कौन हैं राधा और बबीता?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, राधा और बबीता दोनों उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं और हरियाणा के सोनीपत में रहकर सुरक्षा संबंधी काम करती थीं। दोनों की उम्र करीब 23 साल बताई गई है। पुलिस का दावा है कि इनका कुणाल और सुमित से संपर्क हाल के दो-तीन सप्ताह के दौरान इस खास काम के सिलसिले में हुआ था।
पुलिस के मुताबिक, कुणाल ने राधा के साथ अपने निजी संबंधों का इस्तेमाल कर उसे इस गतिविधि में शामिल किया। इसके बाद राधा और बबीता ने हथियारों को मुंबई पहुंचाने में कथित तौर पर कूरियर की भूमिका निभाई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों को इस काम के लिए किसने तैयार किया, हथियारों की सप्लाई में उनकी जानकारी कितनी थी और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन शामिल है।
अमृतसर से मुंबई तक ऐसे पहुंचाए गए हथियार
दिल्ली पुलिस के डीसीपी स्पेशल सेल प्रवीण त्रिपाठी के मुताबिक, कुणाल हाल ही में एक दूसरे मामले में जेल से बाहर आया था। इसके बाद वह कथित तौर पर अनिल पंडित के निर्देशों पर काम करने लगा। पुलिस का कहना है कि कुणाल अपने साथी सुमित के साथ अमृतसर गया, जहां से एक तय स्थान पर हथियार लेने की व्यवस्था की गई।
इसके बाद हथियारों को मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी कथित तौर पर राधा और बबीता को दी गई। पुलिस के अनुसार, दोनों 15 अक्टूबर को रवाना हुईं और 17 अक्टूबर की सुबह मुंबई पहुंचीं। करीब 11 बजे दादर रेलवे स्टेशन के पास उन्होंने एक नाबालिग लड़के को हथियार सौंपे।
जांच में यह भी सामने आया है कि हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए आरोपियों ने ट्रेन का इस्तेमाल किया। पुलिस अब हथियारों के स्रोत, उन्हें प्राप्त करने वाले लोगों और फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियारों के बीच संबंध की पड़ताल कर रही है।
कुणाल को मिले 70-80 हजार रुपये, बबीता को कितना भुगतान?
डीसीपी प्रवीण त्रिपाठी के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि हथियारों की आवाजाही की व्यवस्था करने के बदले कुणाल को करीब 70,000 से 80,000 रुपये मिले थे। इसमें से लगभग 10,000 से 12,000 रुपये कथित तौर पर बबीता को दिए गए।
पुलिस का दावा है कि कुणाल को केवल हथियारों की व्यवस्था करने और उन्हें तय ठिकाने तक पहुंचाने से संबंधित निर्देश दिए जा रहे थे। जांच एजेंसियां भुगतान के स्रोत, रकम के हस्तांतरण और आरोपियों के बीच संपर्क के तरीकों की भी जांच कर रही हैं।
एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जरिए मिल रहे थे निर्देश
पुलिस के मुताबिक, कुणाल कथित तौर पर अनिल पंडित के संपर्क में था। दोनों के बीच एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और सोशल मीडिया के जरिए निर्देशों का आदान-प्रदान होता था। इन निर्देशों में हथियार कहां से लेने हैं, उन्हें मुंबई कैसे पहुंचाना है और वहां किसे सौंपना है, जैसी जानकारियां शामिल थीं।
डीसीपी के मुताबिक, अनिल पंडित और हैरी बॉक्सर का नाम रंदीप मलिक गिरोह से जुड़े नेटवर्क के संदर्भ में सामने आया है। पुलिस इस कथित नेटवर्क के तार पहले हुई गोलीबारी की घटनाओं और रंगदारी की धमकियों से भी जोड़कर देख रही है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों की सप्लाई करने वाले लोगों और फायरिंग को अंजाम देने वाले कथित शूटरों के बीच संपर्क किसने स्थापित कराया था।
क्या किसी दूसरे सेलिब्रिटी को भी बनाया जाना था निशाना?
जांच के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या इस नेटवर्क के जरिए किसी अन्य बॉलीवुड सेलिब्रिटी पर हमले की योजना थी। डीसीपी प्रवीण त्रिपाठी के मुताबिक, पूछताछ में अब तक ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका हथियारों की सप्लाई तक सीमित दिखाई दे रही है और उन्हें हथियार लेने तथा तय स्थान पर पहुंचाने से संबंधित जानकारी दी गई थी।
हालांकि, इस बयान को पूरे मामले की अंतिम तस्वीर नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसियां कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क, इसके संचालकों और हमले के पीछे के मकसद की पड़ताल कर रही हैं।
टाइगर श्रॉफ की कार पर कब हुई थी फायरिंग?
मुंबई के जुहू इलाके में 18 अक्टूबर 2026 को टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। घटना के समय अभिनेता कार में मौजूद थे, लेकिन वह सुरक्षित बच गए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटना में उनके ड्राइवर को गोली लगने से चोट आई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर हमलावरों और उनके सहयोगियों की तलाश तेज कर दी थी।
इससे पहले मुंबई पुलिस ने राजस्थान के कोटा से तीन संदिग्धों को पकड़ा था। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े कुणाल, सुमित, राधा और बबीता को गिरफ्तार किया। इस तरह जांच अब केवल फायरिंग करने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि हथियारों की व्यवस्था करने और उन्हें हमलावरों तक पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क पर भी केंद्रित है।
अब आगे क्या?
21 अक्टूबर की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, चारों आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद मुंबई पुलिस की सीआईडी को उनकी औपचारिक गिरफ्तारी और पूछताछ की अनुमति मिली। मुंबई पुलिस को आरोपियों को आगे की जांच के लिए ले जाने के वास्ते तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड भी मिली है।
अब पुलिस के सामने तीन बड़े सवाल हैं कि हथियारों की सप्लाई का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है, अनिल पंडित और अन्य कथित संचालकों की वास्तविक भूमिका क्या है, और टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के पीछे असली मकसद क्या था। इन सवालों के जवाब आरोपियों से पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों और हथियारों की फॉरेंसिक जांच से मिलने की उम्मीद है। मामले में जांच जारी है।


