Tihar Jail: अब ऑनलाइन मिलेगा तिहाड़ जेल का सरसों तेल और कुकीज, MyStore ऐप पर शुरू हुई बिक्री

Tihar Jail Latest News: तिहाड़ जेल के कैदियों द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट्स की डिजिटल एंट्री, Amazon-Flipkart की तैयारी

Jyotsana Singh
Published on: 26 Dec 2025 6:40 AM IST
Tihar Jail: अब ऑनलाइन मिलेगा तिहाड़ जेल का सरसों तेल और कुकीज, MyStore ऐप पर शुरू हुई बिक्री
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Tihar Jail Latest News: दिल्ली की तिहाड़ जेल अब सिर्फ सजा और सुधार का केंद्र नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और हुनर का मंच भी बनती जा रही है। तिहाड़ जेल में बंद कैदियों के हाथों से बनाए जाने वाले प्रोडक्ट्स अब आम लोगों तक ऑनलाइन पहुंचेंगे। अब तक ये सामान केवल कोर्ट परिसरों, जेल कैंटीन और तिहाड़ एम्पोरिया तक सीमित थे, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इन्हें देशभर के लोग खरीद सकेंगे। तिहाड़ जेल प्रशासन ने हाल ही में कैदियों द्वारा बनाए गए कुछ प्रोडक्ट्स को सरकारी ऐप मायस्टोर पर लिस्ट किया है। इस पहल का मकसद कैदियों को रोजगार देना, उनकी आमदनी बढ़ाना और समाज से उन्हें सकारात्मक रूप से जोड़ना है।

मायस्टोर ऐप पर शुरू हुई ऑनलाइन बिक्री

तिहाड़ जेल प्रशासन के अनुसार मायस्टोर ऐप पर फिलहाल 13 तरह के प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन बिक्री शुरू की गई है। इनमें तिहाड़ ब्रांड का सरसों तेल, अलग-अलग फ्लेवर की कुकीज और कुछ चुनिंदा हैंडीक्राफ्ट आइटम शामिल हैं। मायस्टोर एक सरकारी डिजिटल मार्केटप्लेस है, जो ONDC नेटवर्क से जुड़ा हुआ है और खास तौर पर भारतीय विक्रेताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जो प्रोडक्ट उपलब्ध कराए गए हैं, उनमें नारियल, आटा, जीरा, मिल्क क्रीम, स्वीट जलेबी, ओट्स और नानखटाई जैसी बेकरी आइटम्स शामिल हैं। इसके साथ ही कैदियों के हाथों से तैयार किया गया टीकवुड गणेश शोपीस भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। इन सभी प्रोडक्ट्स को गुणवत्ता जांच के बाद ही बिक्री के लिए रखा गया है। ताकि ग्राहकों को भरोसेमंद और सुरक्षित सामान मिल सके।

अमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट तक पहुंचाने की तैयारी

तिहाड़ जेल प्रशासन का कहना है कि अगर मायस्टोर पर बिक्री का अनुभव सकारात्मक रहा, तो भविष्य में इन प्रोडक्ट्स को फ्लिपकार्ट और अमेज़ॉन जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी लॉन्च किया जा सकता है। इससे इन प्रोडक्ट्स की पहुंच और बढ़ेगी और कैदियों को ज्यादा काम व बेहतर आमदनी का मौका मिलेगा।

तिहाड़ जेल के डीजी एस. बी. के. सिंह ने भी इस पहल की पुष्टि की है। उनके अनुसार ऑनलाइन बिक्री से न केवल तिहाड़ ब्रांड को पहचान मिलेगी, बल्कि कैदियों के मन में आत्मविश्वास भी बढ़ेगा कि उनके बनाए प्रोडक्ट्स आम बाजार में पसंद किए जा रहे हैं।

तिहाड़ जेल फैक्ट्री में कैसे होता है काम

एशिया की सबसे बड़ी जेल मानी जाने वाली तिहाड़ में करीब 20 हजार कैदी बंद हैं। इनमें से लगभग 500 कैदी रोजाना सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक जेल फैक्ट्री में काम करते हैं। यह काम पूरी तरह से प्रशिक्षण और निगरानी के साथ कराया जाता है। ताकि कैदियों को व्यावसायिक कौशल सिखाया जा सके।

तिहाड़ जेल फैक्ट्री में बेकरी प्रोडक्ट्स के अलावा जूट बैग, स्कूल फर्नीचर, हैंडमेड साड़ियां, कार्डबोर्ड, फाइल और सुप्रीम कोर्ट में इस्तेमाल होने वाले कागज भी तैयार किए जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार तिहाड़ की बेकरी यूनिट सबसे बड़ी है, जहां करीब 70 तरह के प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं।

करोड़ों का टर्नओवर और बढ़ती मांग

तिहाड़ जेल की फैक्ट्रियों का आर्थिक प्रदर्शन भी लगातार बेहतर हो रहा है। साल 2024 में केवल बेकरी यूनिट से करीब 8 करोड़ रुपए का टर्नओवर हुआ। वहीं बाकी यूनिट्स से लगभग 11 करोड़ रुपए की कमाई दर्ज की गई।

हाल के महीनों में खासकर बेकरी आइटम्स की मांग तेजी से बढ़ी है। इसकी एक बड़ी वजह इन प्रोडक्ट्स की किफायती कीमत और अच्छी गुणवत्ता मानी जा रही है। अब ऑनलाइन बिक्री शुरू होने से यह मांग और बढ़ने की उम्मीद है।

कैदियों की आमदनी और परिवार को सहारा

जेल फैक्ट्री में काम करने वाले कैदियों को रोजाना करीब 412 रुपए मेहनताना दिया जाता है। यह राशि सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा होती है। हर महीने कैदी इस पैसे को अपने परिवार को भेज सकते हैं या भविष्य के लिए बचा सकते हैं।

तिहाड़ जेल प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था कैदियों को आर्थिक रूप से जिम्मेदार बनाती है और उन्हें अपराध से दूर एक नई दिशा देती है। ऑनलाइन बिक्री बढ़ने से कैदियों की आमदनी में और सुधार होने की संभावना है, जो उनकी सुधार प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

अभी कहां बिकते हैं तिहाड़ के प्रोडक्ट्स

फिलहाल तिहाड़ जेल के प्रोडक्ट्स दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों, दिल्ली हाई कोर्ट, जेल कैंटीन, तिहाड़ हाट और तिहाड़ एम्पोरिया में बेचे जाते हैं। इसके अलावा जेल के अंदर भी कैदी इनका इस्तेमाल करते हैं। अब मायस्टोर ऐप के जरिए यह सामान आम लोगों तक सीधे पहुंचेगा, जिससे तिहाड़ ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है।

अन्य राज्यों की जेलों में भी हो रहा ऐसा काम

तिहाड़ की तरह देश के कई राज्यों की जेलों में भी कैदियों के हाथों से प्रोडक्ट तैयार करने की यूनिट्स पहले से काम कर रही हैं। तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की जेलों में भी इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

तिहाड़ जेल में बने प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन बिक्री सिर्फ एक व्यावसायिक पहल नहीं, बल्कि कैदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरसों के तेल से लेकर कुकीज और हैंडीक्राफ्ट आइटम्स तक, अब लोग घर बैठे इन प्रोडक्ट्स को खरीद सकेंगे। जेलें केवल सजा का स्थान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का अवसर भी बन रही हैं।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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