TMC Crisis: बागी विधायकों की शिकायत के बाद टीएमसी के 440 करोड़ वाले खाते फ्रीज, पार्टी में बढ़ी हलचल

TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा हैं। बागी विधायकों की शिकायत के बाद धन के स्रोत और लेन-देन की जांच की मांग तेज हो गई है। पार्टी के भीतर नेतृत्व और कोषाध्यक्ष पद को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 20 Jun 2026 9:59 PM IST
TMC Crisis
X

Image Source- Ai

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के बागी विधायकों की शिकायतों के बाद टीएमसी के तीन बैंक खातों (Bank Accounts) से पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई है। इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं। खातों को डेबिट फ्रीज (Debit Freeze) कर दिया गया है, जिससे फिलहाल इनसे किसी भी तरह का लेन-देन नहीं किया जा सकेगा।

इस कार्रवाई के बाद पार्टी के भीतर चल रहा विवाद और अधिक गहरा गया है। बागी विधायक इन खातों में जमा धनराशि के स्रोत की जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

क्या होता है डेबिट फ्रीज?

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार निजी क्षेत्र के एक बैंक में मौजूद तीन खातों को डेबिट फ्रीज कर दिया गया है। डेबिट फ्रीज का मतलब यह है कि खाते से पैसे निकालने, ट्रांसफर करने या किसी भी प्रकार का भुगतान करने पर अस्थायी रोक लगा दी जाती है। इस फैसले के बाद पार्टी के वित्तीय संचालन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच बढ़ा टकराव

तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक और वित्तीय तंत्र पर नियंत्रण को लेकर पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास (Aroop Biswas) और विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के समर्थक गुटों के बीच टकराव जारी है। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद यह विवाद और तेज हो गया है।

बताया जा रहा है कि बनर्जी समर्थक 10 विधायकों की शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई है। इन विधायकों ने बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय (Bidhannagar Police Commissionerate) के तहत साइबर अपराध थाना (Cyber Crime Police Station) में प्राथमिकी दर्ज कराकर खातों की विस्तृत जांच की मांग की है।

धन के स्रोत पर उठाए गए सवाल

अपनी शिकायत में विधायकों ने खातों में जमा धनराशि के स्रोत को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों से यह पता लगाने की मांग की है कि खातों में जमा धन वैध स्रोतों से आया है या फिर कथित अवैध गतिविधियों, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और घोटालों के जरिए अर्जित किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि खातों के जरिए हुए सभी लेन-देन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

ममता खेमे को पुलिस कार्रवाई की जानकारी

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के प्रति निष्ठावान एक वरिष्ठ विधायक ने कहा कि उनके गुट को पुलिस कार्रवाई की जानकारी मिल चुकी है, हालांकि वे अभी आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं। विधायक ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि तीन खातों पर रोक लगा दी गई है और शाम तक पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

अरूप बिस्वास ने बैंक को लिखा था पत्र

मामले के बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के खातों से लेन-देन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने इसके पीछे पार्टी के वैध नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता और विधायकों तथा सांसदों की बगावत का हवाला दिया था। उनका कहना था कि जब तक नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक खातों के संचालन पर रोक लगाई जानी चाहिए।

कोषाध्यक्ष को लेकर भी छिड़ा विवाद

इस पूरे विवाद के बीच ममता बनर्जी के करीबी विधायक कुणाल घोष (Kunal Ghosh) ने कहा कि अरूप बिस्वास अब पार्टी के कोषाध्यक्ष (Treasurer) नहीं हैं और इसलिए उन्हें पार्टी के वित्तीय मामलों में बोलने का अधिकार नहीं है।

कुणाल घोष ने कहा कि अरूप बिस्वास पहले कोषाध्यक्ष थे, लेकिन 5 जून को हुई कार्यकारी समिति (Executive Committee) की बैठक में सर्वसम्मति से शुभाशीष चक्रवर्ती (Subhashish Chakraborty) को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तब से वही इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

टीएमसी के भीतर गहराता जा रहा संकट

तीन बैंक खातों के फ्रीज होने और 440 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर उठे सवालों ने टीएमसी के भीतर चल रहे सत्ता और संगठनात्मक संघर्ष को और उजागर कर दिया है। बागी विधायकों की शिकायत, खातों की जांच की मांग और नेतृत्व को लेकर जारी खींचतान ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है।

Aditya Kumar Verma
ABOUT THE AUTHOR

Aditya Kumar Verma

आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

Next Story