TMC Crisis: ममता बनर्जी ने कतरे भतीजे अभिषेक के पर, सुखेंदु-सौगत और महुआ को मिली कमान

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में हार के बाद TMC में बड़ा फेरबदल। ममता बनर्जी ने भतीजे अभिषेक बनर्जी के अधिकारों में कटौती कर सौगत रॉय, सुखेंदु और महुआ मोइत्रा जैसे पुराने दिग्गजों को कमान सौंप दी है।

Shivam Shrivastava
Published on: 7 Jun 2026 7:34 PM IST
TMC Crisis: ममता बनर्जी ने कतरे भतीजे अभिषेक के पर, सुखेंदु-सौगत और महुआ को मिली कमान
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TMC Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर मचे घमासान को शांत करने के लिए ममता बनर्जी ने एक बड़ा कदम उठाया है। लगातार बढ़ते आंतरिक असंतोष, विधायकों और सांसदों की बगावत को थामने के लिए पार्टी सुप्रीमो ने संगठन में एक बड़ा फेरबदल किया है, जिसे एक तरह की सांगठनिक सर्जिकल स्ट्राइक माना जा रहा है।

पार्टी के इतिहास में संभवतः पहली बार ममता बनर्जी ने अपने भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी गुट को पूरी तरह से किनारे लगा दिया है। संगठन को बिखरने से बचाने के लिए लिए गए इस फैसले के तहत अभिषेक के पूरे कोर ग्रुप को नीति-निर्धारक भूमिकाओं से बाहर कर दिया गया है।

राष्ट्रीय महासचिव के अधिकारों में कटौती

पार्टी में अब तक नंबर दो की हैसियत रखने वाले अभिषेक बनर्जी के राष्ट्रीय महासचिव पद के अधिकारों को व्यावहारिक रूप से बेहद सीमित कर दिया गया है। सांगठनिक फेरबदल की नई सूची में उनके इस पद का कोई स्पष्ट जिक्र तक नहीं है, जिससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि सांगठनिक फैसलों पर उनका एकाधिकार अब खत्म हो चुका है। अब पार्टी की पूरी कमान पुराने और अनुभवी नेताओं की कोर कमेटी के हाथों में सौंप दी गई है। इसी कड़ी में राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन को दोबारा मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली का मुख्य रणनीतिकार बनाया गया है, जो सीधे ममता बनर्जी को रिपोर्ट करेंगे।

अभिषेक की युवा टीम की छुट्टी और नए समीकरण

सोशल मीडिया से लेकर चुनाव प्रबंधन तक पर काबिज अभिषेक बनर्जी की युवा टीम को हटा दिया गया है। उत्तर 24 परगना, नदिया और मालदा जैसे महत्वपूर्ण जिलों के जिला अध्यक्षों को पदमुक्त कर दिया गया है, जिन्हें अभिषेक का करीबी माना जाता था और जहां चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा था। इसके अलावा, कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद कोलकाता और दक्षिण 24 परगना जैसे अहम क्षेत्रों की कमान सुब्रत बख्शी और अरूप विश्वास जैसे पुराने वफादारों को वापस दे दी गई है।

विद्रोह शांत करने के लिए पुराने दिग्गजों की वापसी

रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 से अधिक विधायकों और कई सांसदों द्वारा दी गई खुली चुनौती के बाद ममता बनर्जी ने अपने पुराने साथियों का रुख किया है। बागी गुट को शांत करने और बातचीत का रास्ता खोलने के लिए उन्होंने वरिष्ठ नेता सौगत रॉय और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय को ‘हाई-पावर्ड पॉलिसी डिसीजन कमेटी’ में शामिल किया है। वहीं, सांसदों पर कड़ा अनुशासन लागू करने के लिए कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि महुआ मोईत्रा को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की छवि सुधारने के लिए फ्रंटलाइन पर लाया गया है।

वजूद बचाने की आखिरी जंग

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव महज एक सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर ममता बनर्जी का वर्चस्व बनाए रखने की आखिरी कोशिश है। एक तरफ फिरहाद हकीम जैसे कद्दावर नेताओं ने यह कहकर कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया कि वे बिना सेना के सेनापति नहीं बने रहना चाहते, तो दूसरी तरफ कालीघाट बैठकों के दस्तावेजों में जाली हस्ताक्षरों के आरोपों की जांच सीआईडी कर रही है, जिससे संकट की गंभीरता साफ नजर आती है।

Shivam Shrivastava
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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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