ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका! नंदीग्राम उम्मीदवार ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद वापस लिया नामांकन

TMC में जारी अंदरूनी उठापटक के बीच ममता बनर्जी के नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद सामने आया फैसला।

Alakha Singh
Published on: 18 Sept 2026 4:37 PM IST (Updated on: 18 Sept 2026 5:04 PM IST)
ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका! नंदीग्राम उम्मीदवार ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद वापस लिया नामांकन
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी उठापटक के बीच ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के गुट की ओर से उतारी गई उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। खास बात यह है कि उनका यह फैसला पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद सामने आया है। इस घटनाक्रम ने नंदीग्राम उपचुनाव के साथ-साथ TMC में चल रही अंदरूनी खींचतान को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

शुभेंदु से मुलाकात के बाद बदला फैसला

संचिता प्रधान डे को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने नंदीग्राम सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने 16 सितंबर को अपना नामांकन भी दाखिल किया था। नामांकन के दौरान उनके साथ पूर्व TMC विधायक अखिल गिरी भी मौजूद थे। उस समय संचिता ने कहा था कि वह पार्टी के निर्देश के मुताबिक चुनाव प्रचार करेंगी।

लेकिन अब उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, संचिता की शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात हुई और इसके बाद उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि नामांकन वापस लेने की सटीक वजह क्या है। इसलिए यह कहना कि उन्होंने केवल ‘आशीर्वाद लेने’ के लिए मुलाकात की थी और बातचीत के बाद नाम वापस ले लिया, फिलहाल एक रिपोर्टेड घटनाक्रम से आगे की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

नंदीग्राम क्यों है ममता के लिए बेहद अहम?

नंदीग्राम का नाम ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा से गहराई से जुड़ा रहा है। 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने बंगाल की राजनीति में TMC को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, जहां उनका मुकाबला उनके पुराने सहयोगी और बाद में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बने शुभेंदु अधिकारी से हुआ था।

2026 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखते हुए नंदीग्राम सीट खाली कर दी, जिसके चलते यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

नाम वापस, अब तलाश करना होगा नया उम्मीदवार

ममता बनर्जी के गुट ने 13 सितंबर को नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) को उम्मीदवार घोषित किया था। वह पार्टी का नया चेहरा थीं और नंदीग्राम में स्थानीय स्तर पर पार्टी की ओर से मैदान में उतारी गई थीं। 16 सितंबर को उन्होंने नामांकन दाखिल किया, लेकिन अब नामांकन वापस लेने के साथ ही ममता गुट को नए उम्मीदवार की तलाश करनी पड़ सकती है।

TMC के नाम और चिन्ह पर भी बड़ा संकट

संचिता के नाम वापस लेने का घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब TMC पहले से ही अपने नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर अभूतपूर्व विवाद में फंसी हुई है। पार्टी के भीतर दो गुट सामने आने के बाद दोनों ने खुद को असली TMC बताते हुए पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चिन्ह पर दावा किया था।

चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और मुक्त चुनाव चिन्ह चुनने को कहा गया था।

ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिन्ह

18 सितंबर को चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिन्ह मंजूर कर दिए। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह मिला है।

इस तरह जिस TMC ने करीब 28 साल तक ‘जोड़ा फूल’ के निशान के साथ बंगाल की राजनीति की, उसके सामने अब उपचुनाव में नई पहचान के साथ उतरने की स्थिति बन गई है।

अब नंदीग्राम में क्या होगा?

नंदीग्राम उपचुनाव पहले ही इसलिए हाई-प्रोफाइल बन चुका था क्योंकि यहां ममता बनर्जी के गुट और TMC के दूसरे गुट ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे थे, जबकि BJP ने भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा है। अब संचिता प्रधान डे के नाम वापस लेने से मुकाबले का समीकरण फिर बदल गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि ममता गुट अब नंदीग्राम से किसे मैदान में उतारता है और क्या शुभेंदु अधिकारी से संचिता की मुलाकात के बाद उनका नाम वापस लेना बंगाल की सियासत में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है? फिलहाल संचिता की ओर से नाम वापसी की विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए इस मुलाकात के राजनीतिक मायने पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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